भारत-इजराइल FTA: व्यापार बढ़ाने की नई कोशिश, लेकिन राह में चुनौतियां!

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
भारत-इजराइल FTA: व्यापार बढ़ाने की नई कोशिश, लेकिन राह में चुनौतियां!
Overview

भारत और इजराइल ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के लिए बातचीत का एक नया दौर शुरू कर दिया है। दोनों देशों के बीच यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब द्विपक्षीय व्यापार में हालिया गिरावट देखी गई है, और पिछली बातचीत अक्टूबर 2021 में अटक गई थी।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

व्यापार बढ़ाने की नई उम्मीदें

भारत और इजराइल के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर बातचीत का एक नया दौर शुरू हो गया है। यह इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को और गहरा करना है। इस FTA के पहले दौर की बातचीत 26 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में संपन्न हुई, और अगली बैठक मई 2026 में इजराइल में होने वाली है। इस 'आधुनिक, व्यापक और भविष्य के लिए तैयार' समझौते का लक्ष्य दोनों देशों की पूरी व्यापारिक क्षमता का इस्तेमाल करना है।

व्यापार में गिरावट, फिर भी नई शुरुआत

हालांकि, FTA को लेकर उत्साह के बावजूद, दोनों देशों के बीच व्यापार के आंकड़े चिंताजनक तस्वीर पेश कर रहे हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में, द्विपक्षीय माल व्यापार लगभग $3.62 बिलियन रहा, जो पिछले वित्त वर्ष 2023-24 के $6.53 बिलियन की तुलना में काफी कम है। विशेष रूप से, भारत से इजराइल को निर्यात में 52% की भारी गिरावट आई, जो $2.14 बिलियन तक पहुंच गया। वहीं, आयात 26.2% घटकर $1.48 बिलियन रहा। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब वित्त वर्ष 2022-23 में द्विपक्षीय व्यापार $10.77 बिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था। इस FTA का उद्देश्य इन गिरते आंकड़ों को थामना और व्यापार को फिर से गति देना है।

भारत की व्यापक रणनीति और इजराइल की विशेषज्ञता

यह बातचीत भारत की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह वैश्विक स्तर पर अपने व्यापारिक साझेदारियों का विस्तार कर रहा है। भारत ने हाल ही में यूरोपीय संघ, यूनाइटेड किंगडम, ओमान और न्यूजीलैंड जैसे देशों के साथ महत्वपूर्ण समझौते किए हैं। इजराइल, जो एक उच्च-आय वाला और टेक्नोलॉजी-संचालित देश है, विशेष रूप से नवाचार, उन्नत विनिर्माण, जल प्रबंधन और कृषि-तकनीक जैसे क्षेत्रों में भारत के लिए विशेष तालमेल रखता है। दोनों देशों ने सितंबर 2025 में एक द्विपक्षीय निवेश समझौता (BIA) भी किया है, जिसने इजरायली निवेशकों के लिए स्थानीय उपचार की अवधि को तीन साल तक कम कर दिया है। इजराइल ने भारत में अब तक लगभग $334.2 मिलियन का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) किया है, जबकि अप्रैल 2025 तक भारत से इजराइल को गया निवेश $443 मिलियन था।

पुरानी अड़चनें और भू-राजनीतिक चुनौतियां

हालांकि, FTA की राह आसान नहीं है। पिछली बार 2021 में बातचीत के आठ दौर पूरे होने के बावजूद समझौता अटक गया था। भारत के व्यापक FTAs को अंतिम रूप देने में अक्सर एक दशक से अधिक का समय लग जाता है। इसके अलावा, क्षेत्र में भू-राजनीतिक अस्थिरता ने व्यापार मार्गों को प्रभावित किया है, और यह वैश्विक स्तर पर आपूर्ति श्रृंखलाओं में अनिश्चितता पैदा कर सकता है। व्यापार में मौजूदा गिरावट के पीछे केवल टैरिफ की बातचीत से कहीं अधिक गहरे संरचनात्मक और नियामक मुद्दों को हल करने की आवश्यकता है।

भविष्य की राह

मई 2026 में इजराइल में होने वाली अगली बैठक FTA की गति और दायरे को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। दोनों पक्ष मशीनरी, रसायन, वस्त्र, कृषि, चिकित्सा उपकरण और उन्नत प्रौद्योगिकियों जैसे क्षेत्रों में बड़ी क्षमता देखते हैं। यह समझौता पारंपरिक वस्तुओं के व्यापार से आगे बढ़कर सेवाओं, बौद्धिक संपदा अधिकारों और डिजिटल व्यापार को भी कवर कर सकता है। यदि दोनों देश पुरानी अड़चनों को दूर करने और बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुकूल ढलने में सफल होते हैं, तो यह समझौता व्यापार और निवेश को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा दे सकता है।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.