भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर ₹5.66 लाख करोड़ का भारी बोझ! लागत बढ़ने से विकास पर असर?

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर ₹5.66 लाख करोड़ का भारी बोझ! लागत बढ़ने से विकास पर असर?
Overview

भारत के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की लागत में बड़ा इजाफा हुआ है। फरवरी 2026 तक, **1,948** प्रोजेक्ट्स की कुल रिवाइज्ड लागत **₹41.98 लाख करोड़** तक पहुँच गई है, जो शुरुआती अनुमान **₹36.32 लाख करोड़** से **₹5.66 लाख करोड़** ज्यादा है।

भारत के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की लागत में भारी वृद्धि एक गंभीर चिंता का विषय बन गई है। भले ही सरकार की तरफ से खर्च बढ़ाया जा रहा है और कई प्रोजेक्ट्स में फिजिकल प्रोग्रेस अच्छी दिख रही है, लेकिन बजट से ज्यादा हो रहा खर्च फाइनेंशियल मैनेजमेंट पर सवाल खड़े कर रहा है।

फरवरी 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, ₹150 करोड़ या उससे अधिक लागत वाले सेंट्रल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में कुल ₹5.66 लाख करोड़ का कॉस्ट ओवररन (लागत वृद्धि) हुआ है। इससे 1,948 प्रोजेक्ट्स की कुल रिवाइज्ड लागत बढ़कर ₹41.98 लाख करोड़ हो गई है, जो मूल अनुमान ₹36.32 लाख करोड़ से काफी ज्यादा है। अब तक ₹19.71 लाख करोड़ (कुल रिवाइज्ड लागत का लगभग 46.95%) खर्च किए जा चुके हैं, जो दर्शाता है कि प्रोजेक्ट्स आगे बढ़ रहे हैं। खास बात यह है कि इनमें से 38% प्रोजेक्ट्स में 80% से ज्यादा का फिजिकल वर्क पूरा हो चुका है, जो यह बताता है कि बजट बढ़ने के बावजूद निर्माण कार्य जारी है।

लागत बढ़ने का यह सिलसिला नया नहीं है

पिछली रिपोर्ट्स के अनुसार, मई 2024 तक 458 प्रमुख प्रोजेक्ट्स में ₹5.71 लाख करोड़ का ओवररन था (यह 20.70% की बढ़ोतरी थी)। जनवरी 2024 में 431 प्रोजेक्ट्स में ₹4.80 लाख करोड़ से ज्यादा का ओवररन रिपोर्ट किया गया था। यह बताता है कि सिस्टम में लगातार समस्याएं बनी हुई हैं।

ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में सबसे ज्यादा प्रोजेक्ट्स (1,421) हैं, जिनकी रिवाइज्ड लागत ₹22.96 लाख करोड़ है। इनमें से इंडियन रेलवेज के प्रोजेक्ट्स में लागत में खास बढ़ोतरी देखी गई है, जो ₹4.44 लाख करोड़ से बढ़कर लगभग 54% यानी ₹6.85 लाख करोड़ तक पहुँच गई है। वहीं, रोड और हाईवे प्रोजेक्ट्स में बढ़ोतरी थोड़ी कम, लगभग 3.5% रही है।

हालांकि, महंगाई (2024 में कंस्ट्रक्शन कॉस्ट 2-4% बढ़ी, जो 2021-22 के 6-8% से कम है) और सप्लाई चेन की दिक्कतें कुछ हद तक जिम्मेदार हैं, लेकिन कुछ अन्य कारण भी अहम हैं। इनमें अप्रूवल्स में देरी, प्रोजेक्ट प्लान में बीच में बदलाव, मटेरियल खरीदने में समस्याएं और शुरुआती कॉस्ट एस्टीमेट का बहुत कम होना शामिल है, जिसका इस्तेमाल अक्सर प्रोजेक्ट्स को मंजूर करवाने के लिए किया जाता है।

कॉस्ट ओवररन का वित्तीय प्रभाव (Financial Impact)

यह बड़ा और लगातार हो रहा कॉस्ट ओवररन पब्लिक फाइनेंस पर गहरा असर डालता है। सरकार ने कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ाया है, FY2024-25 के लिए ₹11 लाख करोड़ से ज्यादा का आवंटन किया है और FY2026-27 के लिए भी बड़ी योजनाएं हैं। लेकिन, इस खर्च की इफेक्टिवनेस पर अब सवाल उठ रहे हैं।

बार-बार बजट रिवाइज होने का पैटर्न यह बताता है कि शुरुआती प्रोजेक्ट प्लानिंग और कॉस्ट एस्टीमेट्स में गंभीर खामियां हो सकती हैं। लागत कम आंकने की यह प्रैक्टिस पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्लान को कमजोर कर सकती है, और संभव है कि पैसा दूसरे जरूरी सोशल या इकोनॉमिक प्रोजेक्ट्स से डायवर्ट हो जाए। लगातार बजट से ऊपर जाने वाले प्रोजेक्ट्स पर पब्लिक मनी पर ज्यादा निर्भरता सरकार के फाइनेंस पर दबाव डाल सकती है और लंबे समय में देश की क्रेडिट रेटिंग को भी प्रभावित कर सकती है।

फरवरी की रिपोर्ट में स्पेसिफिक प्रोजेक्ट ओवररन के डिटेल्ड फिगर्स की कमी पारदर्शिता को लेकर भी चिंताएं बढ़ाती है। पिछली रिपोर्ट्स में सामने आया है कि कई प्रोजेक्ट्स में महीनों या सालों की देरी होती है, जिससे समय बीतने के साथ लागत और भी बढ़ जाती है।

आउटलुक: जारी रहेगा निवेश, पर एफिशिएंसी पर सवाल

सरकार अभी भी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर फोकस कर रही है, इसे इकोनॉमिक ग्रोथ के लिए महत्वपूर्ण मानती है। योजनाओं में पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान जैसे इनिशिएटिव्स और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के जरिए प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी को बढ़ावा देने के प्रयास शामिल हैं।

हालांकि, मुख्य चुनौती इन प्लान्स को ऐसे प्रोजेक्ट्स में बदलना है जो समय पर और बजट के अंदर पूरे हों। अगर कॉस्ट कंट्रोल, प्रोजेक्ट रिव्यू प्रोसेस और रिपोर्टिंग ट्रांसपेरेंसी में बड़ा सुधार नहीं हुआ, तो कॉस्ट ओवररन का सिलसिला जारी रहेगा। इससे इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च से मिलने वाले इकोनॉमिक बेनेफिट्स कम हो सकते हैं और देश के फाइनेंस पर भारी बोझ पड़ सकता है।

Disclaimer:This content is for informational purposes only and does not constitute financial or investment advice. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making decisions. Investments are subject to market risks, and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors are not liable for any losses. Accuracy and completeness are not guaranteed, and views expressed may not reflect the publication’s editorial stance.