क्यों आई ग्रांट्स में भारी कटौती?
सरकारी खर्चों के संशोधित अनुमानों (Revised Estimates) के अनुसार, इस बार राज्यों को पूंजीगत संपत्ति बनाने के लिए दी जाने वाली केंद्रीय सहायता (Grants-in-Aid) में 30% की भारी कमी आई है। यह राशि ₹4.27 लाख करोड़ के शुरुआती अनुमान से घटकर ₹3.08 लाख करोड़ हो गई है। पिछले कुछ सालों में इस मद में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली थी, लेकिन यह कटौती बताती है कि राज्य स्तर पर प्रोजेक्ट्स को पूरा करने और फंड जारी करने में बाधाएं आ रही हैं। आमतौर पर, संशोधित अनुमानों में जमीनी हकीकत को ध्यान में रखते हुए आंकड़े अपडेट किए जाते हैं, और इस बार का बड़ा कट यह दर्शाता है कि या तो प्रोजेक्ट्स की क्षमता या मंजूरी मिलने में देरी हो रही है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की समय-सीमा प्रभावित हो रही है।
फंड आवंटन में बदलाव
जहां एक ओर राज्यों के लिए ग्रांट्स में कमी आई है, वहीं चालू वित्त वर्ष के लिए केंद्र सरकार के अपने कुल सार्वजनिक पूंजीगत व्यय (Public Capital Expenditure) में भी मामूली गिरावट देखी गई है। यह ₹11.21 लाख करोड़ के बजट अनुमान (Budget Estimates) से घटकर ₹10.95 लाख करोड़ रह गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, खासकर पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों को इस तरह की केंद्रीय ग्रांट्स में कटौती के कारण वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
कैपेक्स का भविष्य: उम्मीदें बरकरार
इन कटौतियों के बावजूद, सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर पर अपने फोकस को कम नहीं कर रही है। फाइनेंशियल ईयर 2026-27 (FY27) के बजट अनुमानों में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय को रिकॉर्ड ₹12.22 लाख करोड़ तक पहुंचाने का प्रस्ताव है। यह पिछले वित्त वर्ष के संशोधित अनुमानों से 11.5% अधिक है। यह आगे भी इंफ्रास्ट्रक्चर-आधारित विकास को जारी रखने की रणनीति को दर्शाता है। पिछले कुछ सालों में इंफ्रास्ट्रक्चर ने ग्रोथ को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है, और सरकार इस गति को बनाए रखना चाहती है।
इंफ्रास्ट्रक्चर का रोडमैप
FY27 के बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बड़े पैमाने पर प्लान हैं। रेलवे के लिए ₹2.8 लाख करोड़ आवंटित किए गए हैं, जो पिछले साल से 10% ज्यादा है। इसमें सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (High-Speed Rail Corridors) का विकास शामिल है। इसी तरह, सड़क और राजमार्ग (Roads and Highways) क्षेत्र के लिए ₹2.9 लाख करोड़ का आवंटन किया गया है। प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी को बढ़ाने और प्रोजेक्ट्स के जोखिम को कम करने के लिए, सरकार एक इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड (Infrastructure Risk Guarantee Fund) बनाने और CPSEs (Central Public Sector Enterprises) की संपत्तियों को रीसायकल करने की योजना पर भी काम कर रही है। कुल मिलाकर, पूंजीगत व्यय में लगातार बढ़ोतरी और सेक्टर-विशिष्ट निवेश, राष्ट्रीय कनेक्टिविटी और आर्थिक मजबूती पर सरकार के इरादों को स्पष्ट करते हैं।