नए CPI सीरीज से महंगाई की तस्वीर हुई धुंधली!
जनवरी के लिए भारत की महंगाई दर (Inflation Rate) के 2.4% रहने का अनुमान है, जो दिसंबर के 1.33% से एक उछाल दिखाता है और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के 2-6% के लक्ष्य बैंड के भीतर वापसी का संकेत देता है। लेकिन, इस बार ये आंकड़े एक नई कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) सीरीज के आने से चर्चा में हैं। इस नई सीरीज का आधार वर्ष 2024 रखा गया है और इसमें खाने-पीने की वस्तुओं का वेटेज पहले के लगभग 46% से घटाकर करीब 37% कर दिया गया है। यह बदलाव 2023-24 के हाउसहोल्ड कंजम्पशन एक्सपेंडिचर सर्वे (HCES) पर आधारित है और इसका मकसद खाने-पीने की कीमतों में होने वाली तेज उतार-चढ़ाव (volatility) को कम करना है। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि इससे महंगाई के असली मांग दबाव को समझना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि इस नई प्रणाली में हाउसिंग का वेटेज बढ़ाकर 17.66% कर दिया गया है।
RBI के लिए नीतिगत फैसले में अनिश्चितता
इस नई पद्धति से नीति निर्माताओं और विश्लेषकों के लिए काफी अनिश्चितता पैदा हो गई है। अर्थशास्त्रियों के अनुमानों में काफी भिन्नता देखी गई है, जो 1.40% से लेकर 3.10% तक हैं, और कई लोग नई डेटा सीरीज पर स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं [cite: source]। स्टैंडर्ड चार्टर्ड की अनुभवृति सहाय ने कहा कि कोर इन्फ्लेशन (core inflation) के थोड़ा बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन नई वेटेज प्रणाली एक कम अस्थिर, लेकिन संभावित रूप से कम जानकारीपूर्ण तस्वीर पेश कर सकती है [cite: source, 27]। RBI, जिसका लक्ष्य 4% महंगाई दर को +/- 2% के बैंड में रखना है, इन नए संकेतों की व्याख्या करने में चुनौती का सामना कर रहा है। पुरानी सीरीज की आलोचना इसलिए भी होती थी क्योंकि वह 2011-12 के उपभोग पैटर्न को दर्शाती थी, जो अब काफी पुराना हो चुका है। वहीं, नई सीरीज में ई-कॉमर्स और डिजिटल सेवाओं जैसी आधुनिक वस्तुओं और सेवाओं को शामिल किया गया है, लेकिन इसमें मांग से जुड़े दबावों का तत्काल प्रभाव छिप जाने का जोखिम है। ग्रामीण परिवारों का खाद्य पदार्थों पर खर्च पहले के 52% से घटकर लगभग 47% हो गया है, जबकि शहरी खर्च 42% से नीचे 40% से भी कम आ गया है।
जोखिम और आगे का रास्ता
नई CPI सीरीज, खाद्य कीमतों की अस्थिरता के प्रभाव को कम करके, महंगाई की एक भ्रामक स्थिर तस्वीर पेश कर सकती है। यदि वास्तविक अंतर्निहित महंगाई दर नई सीरीज की सटीक रूप से पकड़ने की क्षमता से परे तेज हो जाती है, तो RBI प्रतिक्रिया देने में धीमा हो सकता है, जिससे मूल्य दबाव जड़ें जमा सकते हैं। इसके अलावा, आवास पर बढ़ा हुआ वेटेज केवल तत्काल मांग से परे कारकों से प्रभावित हो सकता है। जनवरी में सोने (Gold) और चांदी (Silver) की कीमतों में भारी उछाल के बाद, फरवरी की शुरुआत में इनमें लगभग 10% की गिरावट आई है। वैश्विक स्तर पर, IMF का अनुमान है कि 2026 में वैश्विक महंगाई दर 3.8% रहने की उम्मीद है, लेकिन यह अभी भी एक चिंता का विषय बनी रहेगी। भू-राजनीतिक तनावों और सप्लाई चेन की दिक्कतों के कारण कमोडिटी की ऊंची कीमतें भारतीय महंगाई पर लगातार दबाव बनाए रख सकती हैं, भले ही नई CPI सीरीज के आंकड़े स्थिर दिखें।
डेटा की अस्पष्टता और नीतिगत सतर्कता
आगे चलकर, विश्लेषक अंतर्निहित महंगाई दबाव के संकेतों के लिए नई CPI के विभिन्न घटकों का बारीकी से अध्ययन करेंगे। होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI), जिसके जनवरी में मामूली बढ़कर 1.25% रहने की उम्मीद है, एक पूरक दृष्टिकोण प्रदान करेगा। RBI के आगामी मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) के फैसले इस नई मुद्रास्फीति डेटा की उसकी व्याख्या पर बहुत अधिक निर्भर करेंगे, जिसमें मूल्य स्थिरता की इच्छा और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच आर्थिक विकास का समर्थन करने का संतुलन बनाना शामिल होगा।