भारत की औद्योगिक ग्रोथ हुई धीमी, FY26 में 4.3% पर आई: NSO डेटा

ECONOMY
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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
भारत की औद्योगिक ग्रोथ हुई धीमी, FY26 में 4.3% पर आई: NSO डेटा

भारत की औद्योगिक विकास दर वित्तीय वर्ष 2026 में घटकर **4.3%** रह गई है, जो FY25 के **5.7%** से काफी कम है। नेशनल स्टैटिस्टिकल ऑफिस (NSO) की नई रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। नए **2022-23** बेस ईयर के तहत जारी यह आंकड़े मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सुस्ती का संकेत दे रहे हैं।

औद्योगिक विकास में आई नरमी

नेशनल स्टैटिस्टिकल ऑफिस (NSO) द्वारा जारी किए गए नए इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) डेटा के अनुसार, भारत के औद्योगिक क्षेत्र की रफ्तार धीमी पड़ गई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए सालाना औद्योगिक विकास दर घटकर 4.3% पर आ गई है। यह पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में दर्ज 5.7% और 2023-24 में 6.8% की वृद्धि दर से काफी कम है। हालांकि, मई 2026 में 5.1% की मामूली मासिक रिकवरी देखी गई, जो अप्रैल के 4.9% से बेहतर है, लेकिन यह पिछले कुछ तिमाहियों से देखी जा रही व्यापक सुस्ती को दूर करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

नया बेस ईयर और सुस्त रुझान

सरकार ने हाल ही में IIP गणना का बेस ईयर 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया है। इस बदलाव का उद्देश्य आधुनिक भारतीय अर्थव्यवस्था को बेहतर ढंग से दर्शाना है, जिसमें उत्पादन में आए संरचनात्मक बदलावों को शामिल करने के लिए 455 आइटम ग्रुप्स को जोड़ा गया है। हालांकि, इस नए सीरीज के तहत औद्योगिक उत्पादन में गिरावट का रुझान पुराने इंडेक्स की तुलना में अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। तिमाही औसत वृद्धि दर में भी गिरावट का स्पष्ट पैटर्न दिख रहा है, जो सितंबर 2025 तिमाही में 5.4% से घटकर उसी वित्तीय वर्ष की अगली दो तिमाहियों में 4.3% और 3.9% पर आ गई।

डेटा की सीमाओं को समझना

निवेशकों के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि आधिकारिक IIP आंकड़े और समग्र आर्थिक गतिविधि के बीच अंतर को समझना जरूरी है। IIP एक प्रमुख संकेतक है, लेकिन यह मुख्य रूप से औपचारिक विनिर्माण (manufacturing), खनन (mining) और बिजली (electricity) क्षेत्रों को ट्रैक करता है। यह विशाल अनौपचारिक क्षेत्र (informal sector) को पूरी तरह से कवर नहीं करता है, जो भारत के उत्पादन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके अतिरिक्त, यह इंडेक्स डेटा संग्रह पर निर्भर करता है, जो उत्तरदाताओं के गैर-अनुपालन के कारण सांख्यिकीय समायोजन के अधीन हो सकता है।

एक और तकनीकी पहलू यह है कि मूल्य-आधारित डेटा के लिए डिफ्लेटर के रूप में होलसेल प्राइस इंडेक्स (Wholesale Price Index) से प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (Producer Price Index) में बदलाव किया गया है, जो अब लगभग 36% बास्केट को कवर करता है। विश्लेषण से पता चलता है कि दोनों मूल्य सूचकांकों ने लगभग समान प्रदर्शन किया है, इसलिए यह बदलाव देखी गई नरमी का प्राथमिक कारण नहीं है। इसके बजाय, यह निरंतर मंदी अंतर्निहित मांग पैटर्न (demand patterns) से प्रेरित प्रतीत होती है।

निवेशक कोर मैन्युफैक्चरिंग सेगमेंट के स्वास्थ्य का आकलन करने के लिए इन तिमाही रुझानों की निगरानी कर सकते हैं। जैसे-जैसे औद्योगिक क्षेत्र इन दबावों का सामना कर रहा है, भविष्य के अपडेट संभवतः इस बात पर ध्यान केंद्रित करेंगे कि क्या खपत (consumption) और निजी खर्च (private spending) उत्पादन मात्रा में सुधार का समर्थन करने के लिए बढ़ सकते हैं। ऑटोमोबाइल जैसे प्रमुख क्षेत्रों का प्रदर्शन, जो एक उल्लेखनीय अपवाद रहा है, अक्सर व्यापक औद्योगिक भावना (industrial sentiment) के बैरोमीटर के रूप में कार्य करता है, जिस पर प्रतिभागी बारीकी से नजर रखते हैं।

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