Infosys के Narayana Murthy और HDFC Bank के Aditya Puri का AI और बाजार पर 'असली' सच: 'चमक-दमक नहीं, मुनाफे पर ध्यान दें'

ECONOMY
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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Infosys के Narayana Murthy और HDFC Bank के Aditya Puri का AI और बाजार पर 'असली' सच: 'चमक-दमक नहीं, मुनाफे पर ध्यान दें'
Overview

भारत के दो दिग्गज बिज़नेस लीडर्स, Infosys के सह-संस्थापक NR Narayana Murthy और HDFC Bank के पूर्व CEO Aditya Puri ने उद्यमियों को AI और बाजार की चकाचौंध के बजाय लंबी अवधि के मुनाफे (Profit) और शेयरधारकों के हितों को प्राथमिकता देने की सलाह दी है।

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AI की चमक-दमक बनाम असली मुनाफा: भारतीय टाइटन्स की लंबी अवधि की प्रॉफिटेबिलिटी पर पैनी नजर

उद्योग जगत के दो बड़े नाम, Infosys के सह-संस्थापक NR Narayana Murthy और HDFC Bank के पूर्व CEO Aditya Puri ने बाजार में चल रहे AI के शोर और स्टार्टअप्स की चमक-दमक के बीच एक यथार्थवादी नजरिया पेश किया है। उन्होंने उद्यमियों को शॉर्ट-टर्म के फायदों या मेट्रिक्स के बजाय लंबी अवधि के मुनाफे (Long-term Profitability) और सभी हितधारकों (Stakeholders) के साथ निष्पक्षता (Fairness) पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी है।

असली 'बॉटम लाइन' ही मायने रखती है: प्रॉफिट और निष्पक्षता का जोर

Puri और Murthy ने स्पष्ट किया कि किसी भी बिजनेस का असली मकसद अंततः मुनाफा कमाना ही होता है। Puri ने 'एडजस्टेड EBITDA' जैसे मेट्रिक्स को भ्रामक बताते हुए कहा, "आप या तो यूनिट प्रॉफिट (Unit Profit) कमाते हैं... अगर बॉटम लाइन (Bottom Line) नहीं है, तो यह काम नहीं करता।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि व्यवसाय का मूल उद्देश्य लाभ, रोजगार सृजन, विकास और निष्पक्षता है। Murthy ने 'विलंबित संतुष्टि' (Deferred Gratification) की वकालत की, यानी उद्यमियों को स्थायी मध्यम और लंबी अवधि के रिटर्न के लिए अल्पावधि में कुछ त्याग करना होगा। यह दृष्टिकोण उन नए-युग के स्टार्टअप्स के विपरीत है जो निवेशक की फंडिंग के माध्यम से तेजी से विस्तार और बाजार हिस्सेदारी को प्राथमिकता देते हैं।

AI का प्रभाव: विनाश नहीं, अनुकूलन (Adaptation)

AI को लेकर नौकरियों के खत्म होने की आशंकाओं के बीच, दोनों दिग्गजों ने इसे अतिरंजित बताया। Puri का मानना है कि AI से कुछ नौकरियों की भूमिकाएं बदलेंगी, लेकिन बड़े पैमाने पर बेरोजगारी की संभावना कम है। उन्होंने AI को दशकों में धीरे-धीरे अपनाने की उम्मीद जताई, जिसमें मानव और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) के बीच सहजीवन (Symbiosis) होगा। Murthy ने कहा कि जो लोग AI को एक सहायक तकनीक के रूप में महारत हासिल करेंगे, उन्हें अंततः फायदा होगा। यह दृष्टिकोण ICRIER की एक स्टडी (नवंबर 2025-जनवरी 2026) के अनुरूप है, जिसमें पाया गया कि AI उत्पादकता बढ़ा रहा है और एंट्री-लेवल हायरिंग पर मामूली असर डाल रहा है। यह भारत के 2024-2025 के इकोनॉमिक सर्वे की चेतावनियों से अलग है, जिसमें ऑटोमेशन से नौकरियों के बड़े पैमाने पर विस्थापन का अंदेशा जताया गया था। वहीं, Citrini Research की एक रिपोर्ट 2028 तक भारतीय IT कंपनियों जैसे TCS, Infosys और Wipro के लिए AI कोडिंग एजेंट्स से गंभीर व्यवधान की संभावना जताती है।

सेक्टर-वार विश्लेषण: बैंकिंग और IT वैल्यूएशन पर नजर

भारतीय बैंकिंग सेक्टर में अभी भी विकास की काफी गुंजाइश है। दिसंबर 2025 तक अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (Scheduled Commercial Banks) का क्रेडिट आउटस्टैंडिंग ₹200 लाख करोड़ से अधिक रहा, और FY26 के लिए 10.4-11.3% की वृद्धि का अनुमान है। हालांकि, HDFC Bank, जिसका मार्केट कैप लगभग $165-174 बिलियन है, विश्लेषकों की सावधानी का सामना कर रहा है। फरवरी 2026 में एक रेटिंग एजेंसी ने स्ट्रेच्ड वैल्यूएशन (Stretched Valuations) और चुनौतियों के कारण HDFC Bank को 'Sell' रेटिंग दी थी।

IT सेवाओं के क्षेत्र में, Infosys और TCS राजस्व और पैमाने पर हावी हैं, लेकिन दोनों AI की क्षमता को भुनाने की कोशिश कर रहे हैं। Wipro को डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और AI प्रोजेक्ट्स पर अधिक केंद्रित माना जाता है। प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, और रिपोर्टों से पता चलता है कि यदि Wipro और Cognizant AI नवाचारों और कर्मचारियों के कौशल उन्नयन (Upskilling) में पर्याप्त निवेश नहीं करते हैं, तो वे Infosys और TCS से पिछड़ सकते हैं।

IPO मार्केट में बूम, पर जोखिम भी

2025 में भारतीय IPO मार्केट ने 18 स्टार्टअप्स द्वारा INR 41,284 करोड़ जुटाकर शानदार प्रदर्शन किया। 2026 में 44 स्टार्टअप्स द्वारा INR 70,000 करोड़ जुटाने की उम्मीद है। हालांकि, 2025 के एक-तिहाई से अधिक IPO, 2026 की शुरुआत तक इश्यू प्राइस (Issue Price) से नीचे कारोबार कर रहे थे, जो निवेशकों को बाजार की हवा में बहने के बजाय फंडामेंटल पर ध्यान देने की जरूरत को दर्शाता है।

भविष्य की राह: AI और बदलती अर्थव्यवस्था में बने रहना

तकनीकी प्रगति और बदलती आर्थिक स्थितियों की इस जुगलबंदी में रणनीतिक पुनर्मूल्यांकन की आवश्यकता है। IT कंपनियों के लिए AI को सिर्फ दक्षता के लिए ही नहीं, बल्कि नई सेवाएँ देने के लिए भी इस्तेमाल करना होगा। बैंकों को डिजिटल नवाचार का लाभ उठाते हुए जोखिम प्रबंधन पर भी ध्यान देना होगा। उद्यमियों और कंपनियों दोनों के लिए, मुख्य फोकस लचीले, लाभदायक और नैतिक व्यवसायों के निर्माण पर होना चाहिए। केवल 4% फर्मों ने ही अपने कर्मचारियों के बड़े हिस्से को AI स्किल्स में प्रशिक्षित किया है, जो भारत में कौशल की कमी को उजागर करता है।

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