India Inc: बोर्ड में पूर्व रेगुलेटर्स की एंट्री, क्या गवर्नेंस सुधरेगी या स्ट्रैटेजी पर पड़ेगा असर?

ECONOMY
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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
India Inc: बोर्ड में पूर्व रेगुलेटर्स की एंट्री, क्या गवर्नेंस सुधरेगी या स्ट्रैटेजी पर पड़ेगा असर?
Overview

भारतीय कंपनियों (India Inc) में अब रिटायर्ड सरकारी अफसरों और पूर्व रेगुलेटर्स को नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बनाने का चलन बढ़ रहा है। मकसद कॉर्पोरेट गवर्नेंस (Corporate Governance) को मजबूत करना है, लेकिन नियम लागू करने की पुरानी आदत से बिज़नेस की स्ट्रैटेजी (Strategy) बनाने की ओर बढ़ना एक बड़ी चुनौती है, जिसके लिए सोच और स्किल्स में बड़े बदलाव की जरूरत है।

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गवर्नेंस का बूस्ट या स्ट्रैटेजी का जोखिम?

भारतीय कंपनियों (India Inc) में अब धड़ल्ले से रिटायर्ड सरकारी सचिवों और पूर्व रेगुलेटर्स को नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन (Non-Executive Chairperson) बनाया जा रहा है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य कॉर्पोरेट गवर्नेंस (Corporate Governance) को मजबूत करना और उन अफसरों के अनुभव का फायदा उठाना है जो रेगुलेटरी माहौल को अच्छी तरह समझते हैं। लेकिन, असली परीक्षा यह है कि वे पब्लिक नियमों को लागू करने से प्राइवेट सेक्टर की स्ट्रैटेजी बनाने में कितनी अच्छी तरह ढल पाते हैं। रेगुलेटरी आदतों से हटकर मार्केट-केंद्रित और एक्टिव स्ट्रैटेजिक फैसलों की ओर बढ़ना ही सबसे बड़ी चुनौती है।

क्यों बढ़ रहा है यह चलन?

इस ट्रेंड के पीछे की वजह है बेहतर गवर्नेंस की कॉर्पोरेट चाहत, खासकर तब जब निवेशकों की नजरें तेज हो रही हैं और रेगुलेशंस (Regulations), जैसे कि Companies Act, 2013, और SEBI के LODR रूल्स, लगातार विकसित हो रहे हैं। HUL, Adani Enterprises, Maruti Suzuki, और PTC India जैसी कई बड़ी कंपनियां इस ट्रेंड में शामिल रही हैं। फर्म्स को उम्मीद है कि ये नियुक्तियां सरकारी मंजूरियों में तेजी ला सकती हैं और कंप्लायंस (Compliance) को बेहतर बना सकती हैं। साथ ही, ये नियुक्तियां प्रतिष्ठा भी बढ़ाती हैं और व्यापक प्रशासनिक अनुभव प्रदान करती हैं।

रेगुलेटर से डायरेक्टर: स्किल का गैप

भले ही यह ट्रेंड कम से कम 2018 से देखा जा रहा है, लेकिन अब फोकस सिर्फ नियुक्तियों से हटकर भूमिका के अनुकूलन (Role Adaptation) की अहमियत पर आ गया है। पब्लिक सेक्टर अक्सर पदानुक्रम (Hierarchy) और जोखिम से बचने पर काम करता है। इसके विपरीत, बोर्डरूम में बिजनेस की गहरी समझ, स्ट्रैटेजिक विजन और ग्रोथ को आगे बढ़ाने की क्षमता की जरूरत होती है। कुछ स्टडीज बताती हैं कि जहां पूर्व अधिकारी गवर्नेंस अनुशासन और संकट प्रबंधन (Crisis Management) में मूल्यवान हो सकते हैं, वहीं यह बदलाव हमेशा आसान नहीं होता। अत्यधिक सावधानी और नियम लागू करने पर केंद्रित सोच इनोवेशन (Innovation) और स्ट्रैटेजिक एजिलिटी (Strategic Agility) को दबा सकती है, जिससे कंपीटिटिवनेस (Competitiveness) को नुकसान हो सकता है।

आगे की राह: सिर्फ टाइटल काफी नहीं

यह मानना कि गहरा रेगुलेटरी अनुभव अपने आप प्रभावी बोर्डरूम लीडरशिप में बदल जाएगा, एक बड़ी गलती है। पब्लिक सर्विस (Public Service) स्पष्ट कानूनी सीमाओं और जवाबदेही के भीतर काम करती है, जो मार्केट-ड्रिवन (Market-driven) फैसलों की अप्रत्याशित प्रकृति से बहुत अलग है। नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई करने और केस जज करने के लिए इस्तेमाल होने वाले स्किल्स, कैपिटल एलोकेट करने (Capital Allocation), स्ट्रैटेजिक पोजीशनिंग (Strategic Positioning) या स्टेकहोल्डर्स (Stakeholders) को प्रभावित करने के लिए जरूरी स्किल्स के समान नहीं हैं। ऐसे में यह जोखिम है कि व्यक्ति पुराने पदानुक्रम वाले तरीकों से चिपके रह सकते हैं, बजाय इसके कि वे खुलकर बहस और रचनात्मक चुनौतियों को बढ़ावा दें, जो बोर्ड के लिए महत्वपूर्ण हैं।

कंपनियों के विकसित होते कॉर्पोरेट गवर्नेंस के साथ, यह समझ बढ़ रही है कि बोर्ड में सेवा देने, खासकर नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर, खास प्रोफेशनल स्किल्स की जरूरत होती है। इसका मतलब है कि कंपनियों को स्ट्रक्चर्ड ऑनबोर्डिंग (Structured Onboarding), लगातार ट्रेनिंग (Ongoing Training) और Thorough Assessments प्रदान करने होंगे जो सिर्फ एक प्रतिष्ठित पब्लिक सर्विस रिकॉर्ड से परे हों। इन नियुक्तियों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वे कितनी प्रभावी ढंग से रणनीतियों पर सवाल उठा पाते हैं, बिजनेस की दिशा में योगदान दे पाते हैं और स्वतंत्र निर्णय ले पाते हैं, जो रेगुलेटरी ज्ञान को व्यावहारिक व्यापारिक समझ के साथ जोड़ते हैं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.