AI का IT सेक्टर पर असर
Deloitte की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का IT सर्विसेज सेक्टर 2026 में सैलरी ग्रोथ में नरमी का सामना कर सकता है। ग्लोबल इकोनॉमी की अनिश्चितता और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का तेजी से बढ़ता दखल इसके मुख्य कारण हैं। इस वजह से कंपनियां अपने कंपनसेशन बजट को एडजस्ट कर रही हैं। IT सेक्टर की ग्रोथ 2025 में करीब 7.6% से घटकर 2026 में 6.9% रहने का अनुमान है। यह सर्वे किए गए सेक्टर्स में सबसे धीमी ग्रोथ होगी। IT कंपनियां अपने ग्रोथ और सैलरी अनुमानों को पिछले साल के मुकाबले 0.7% पॉइंट तक कम कर सकती हैं।
अन्य सेक्टर्स में बंपर सैलरी हाइक
IT सेक्टर के विपरीत, भारत के कई अहम सेक्टर्स 2026 में मजबूत सैलरी इंक्रीमेंट (Salary Increment) दे सकते हैं। फार्मा इंडस्ट्री सबसे आगे रहने की उम्मीद है, जहां 10.1% का हाइक मिल सकता है (2025 में यह 9.8% था)। लाइफ साइंसेज सेक्टर में करीब 9.9% की उम्मीद है। मैन्युफैक्चरिंग फर्म्स औसतन 9.8% का हाइक दे सकती हैं, जबकि ऑटोमोटिव OEMs 10.3% तक पहुंच सकते हैं। पावर और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में 10.4% और सेमीकंडक्टर फर्मों में 10.1% का इजाफा संभव है। फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर भी मजबूत दिख रहा है, जहां 2026 में कुल सैलरी ग्रोथ 9.1% रहने का अनुमान है (2025 में यह 8.9% था)। नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां (NBFCs) और एसेट मैनेजमेंट फर्म्स क्रमशः 9.5% और 9.4% का हाइक दे सकती हैं।
GCCs दे रहे हैं सबसे ज्यादा सैलरी
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) पारंपरिक IT फर्मों की तुलना में लगातार काफी ज्यादा कंपनसेशन दे रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, GCCs पारंपरिक IT सर्विसेज फर्मों से 20-25% ज्यादा सैलरी ऑफर कर रहे हैं। सामान्य IT फर्मों में सालाना सैलरी ₹12 लाख से ₹15 लाख के बीच होती है। GCCs की ग्रोथ भी थोड़ी धीमी हो रही है, 2025 में 9% से घटकर 2026 में 8.8% हो सकती है, लेकिन उनकी ऊंची सैलरी टैलेंट को आकर्षित करने में एक बड़ा फैक्टर बनी हुई है। यह IT सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए एक चुनौती है जो कॉस्ट प्रेशर और AI-ड्रिवन मार्केट चेंजेस का सामना कर रहे हैं।
AI का खतरा और IT कंपनियों के प्रॉफिट पर दबाव
IT सर्विसेज में सैलरी ग्रोथ का रुकना, खासकर AI के तेजी से बढ़ते दखल के कारण, एक बड़ा रिस्क पैदा करता है। AI ऑटोमेटेड रोल्स में जॉब लॉसेस (Job Losses) का कारण बन सकता है, जिससे मिड-टियर टैलेंट की अधिकता और कम हाई-स्किल्ड नौकरियों के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा की स्थिति बन सकती है। फार्मा और एनर्जी जैसे सेक्टर्स की स्थिर ग्रोथ के विपरीत, IT सर्विसेज ग्लोबल क्लाइंट स्पेंडिंग पर बहुत ज्यादा निर्भर करती हैं, जिससे वे इकोनॉमिक चुनौतियों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाती हैं।