IPO से विकास को झटका? जुटाई रकम कर्ज चुकाने में जा रही, बजट 2026 पर टिकीं निगाहें

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorSaanvi Reddy|Published at:
IPO से विकास को झटका? जुटाई रकम कर्ज चुकाने में जा रही, बजट 2026 पर टिकीं निगाहें
Overview

भारतीय शेयर बाजार में हाल के इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) से जुटाए जा रहे पैसे का एक बड़ा हिस्सा कंपनियों के असली विकास, यानी कैपिटल एक्सपेंडिचर (capex) और विस्तार योजनाओं में नहीं जा रहा है। इसके बजाय, यह रकम कर्ज चुकाने और पुराने निवेशकों को बाहर निकालने (exits) में इस्तेमाल हो रही है।

IPO का पैसा, विकास का दिखावा?

हाल के सालों में भारत में IPO मार्केट में जबरदस्त तेजी देखी गई है। लेकिन, अब इस बात पर चिंता जताई जा रही है कि IPO से जुटाई जा रही रकम का सही इस्तेमाल नहीं हो रहा है। पिछले तीन फाइनेंशियल ईयर (FY) में, IPO से मिले कुल फंड का लगभग 28% से 30% सिर्फ कर्ज चुकाने में चला गया है।

इसके अलावा, 12% से 15% फंड को सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए रखा गया है। वहीं, देश के लंबे समय के आर्थिक विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले कैपिटल एक्सपेंडिचर (capex) और कंपनी के विस्तार पर औसतन केवल 8% से 13% ही खर्च हुआ है।

जब इसमें वो पैसा भी जोड़ दें जो प्रमोटरों और प्राइवेट इक्विटी फर्मों जैसे बड़े निवेशकों के निकलने (secondary sales) में चला जाता है, तो यह साफ हो जाता है कि IPO अब नए फंड जुटाने के बजाय लिक्विडिटी (पैसे की उपलब्धता) बढ़ाने का जरिया बन गए हैं। यह ट्रेंड सीधे तौर पर भारत की प्रोडक्टिव इन्वेस्टमेंट कैपेसिटी और लंबे समय के कैपिटल एक्सपेंडिचर साइकिल को कमजोर करता है।

बाजार का फोकस: जल्दी पैसा बनाना

इसी वजह से शेयर बाजार में इंट्राडे ट्रेडिंग का बोलबाला है। अनुमान है कि FY25 में हुए कुल इक्विटी कैश ट्रेड में 70% से ज्यादा सिर्फ इंट्राडे ट्रेडिंग थी। इसका मतलब है कि निवेशक लंबे समय तक शेयर रखने के बजाय, जल्दी मुनाफा कमाने वाली ट्रेडिंग पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।

दुनिया के सबसे बड़े डेरिवेटिव्स मार्केट (derivatives market) का आकार भी इसी बात का सबूत है कि बाजार का झुकाव तेजी से ट्रेडिंग की ओर बढ़ा है। रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़ी है, 2025 तक 19.4 करोड़ से ज्यादा डीमैट अकाउंट खुल चुके हैं। लेकिन, SEBI की एक रिपोर्ट बताती है कि इक्विटी डेरिवेटिव्स मार्केट में 91% रिटेल ट्रेडर्स को FY25 में नेट लॉस हुआ है।

बजट 2026: क्या बदलेगी तस्वीर?

अब सभी की निगाहें अगले बजट 2026 पर टिकी हैं। उम्मीद है कि सरकार इस बार बाजार के नियमों में ऐसे बदलाव लाएगी जिससे कंपनियों का ध्यान विकास और क्षमता विस्तार के लिए फंड जुटाने पर केंद्रित हो, न कि सिर्फ जल्दबाजी में निकलने (exits) पर।

सरकार की कोशिश है कि 6.8% से 7.2% जीडीपी ग्रोथ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कैपिटल फॉर्मेशन (पूंजी निर्माण) को बढ़ावा मिले।

धैर्यवान पूंजी की जरूरत

भारत के कैपिटल मार्केट को मजबूत बनाने के लिए ऐसे निवेशकों की जरूरत है जो लंबे समय तक निवेश करें और कंपनियों के विकास में धैर्य रखें। पेंशन फंड, इंश्योरेंस कंपनियों और सॉवरेन वेल्थ फंड जैसे संस्थानों से आने वाली 'पेशेंट कैपिटल' (धैर्यवान पूंजी) बाजार को गहराई और स्थिरता दे सकती है।

घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) की भारतीय इक्विटी में हिस्सेदारी बढ़ी है और उन्होंने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) को पीछे छोड़ दिया है। लेकिन, लंबे समय के घरेलू निवेश को अभी और बढ़ाने की गुंजाइश है। बजट 2026 ऐसे फ्रेमवर्क बना सकता है जो निवेश की अवधि को पुरस्कृत करें और बाजार में अधिक स्थिरता लाएं।

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.