FY26 में रिकॉर्ड 2.47 लाख नई कंपनियों का गठन, भारत में बढ़ा व्यापार!

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AuthorAditya Rao|Published at:
FY26 में रिकॉर्ड 2.47 लाख नई कंपनियों का गठन, भारत में बढ़ा व्यापार!

वित्तीय वर्ष 2026 में भारत में रिकॉर्ड **2,47,755** नई कंपनियों का रजिस्ट्रेशन हुआ है। डिजिटल अपनाने और सरकारी नीतियों के सपोर्ट से यह ग्रोथ संभव हुई है। हालांकि, सर्विसेज सेक्टर सबसे आगे है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार से ही लंबे समय में आर्थिक फायदा होगा।

नई कंपनियों के रजिस्ट्रेशन में आया रिकॉर्ड उछाल

कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (Ministry of Corporate Affairs) के आंकड़ों के मुताबिक, वितीय वर्ष 2026 में भारत में 2,47,755 नई कंपनियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। यह संख्या वितीय वर्ष 2017 के 97,851 रजिस्ट्रेशन के मुकाबले काफी ज्यादा है। खास बात यह है कि इसमें से लगभग 65% ग्रोथ कोरोना महामारी के बाद के सालों में हुई है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि कंपनियों ने अपने ऑपरेटिंग खर्च को कम करने के लिए डिजिटल पेमेंट सिस्टम और ऑनलाइन टूल्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ाया।

किस सेक्टर में सबसे ज्यादा ग्रोथ?

सर्विसेज सेक्टर में सबसे ज्यादा ग्रोथ देखी गई है, जो कुल एक्टिव कंपनियों का 25% है। इसके बाद मैन्युफैक्चरिंग 19% और कम्युनिटी, पर्सनल व सोशल सर्विसेज 15% पर हैं। ट्रेडिंग एक्टिविटीज 14% नई कंपनियों का हिस्सा हैं। हालांकि, सर्विसेज सेक्टर में डिजिटल कनेक्टिविटी के कारण तेजी दिख रही है, मैन्युफैक्चरिंग में धीमी रफ्तार बताती है कि अभी भी पारंपरिक तरीकों पर निर्भरता है। इस आर्थिक रफ्तार को बनाए रखने के लिए इन नई कंपनियों का इंडस्ट्रियल या इनोवेशन-लेड ऑपरेशंस में बदलना जरूरी होगा।

बड़े शहरों से हटकर दूसरे राज्यों में भी बढ़ा कारोबार

पहले भारत में ज्यादातर बिजनेस एक्टिविटी महाराष्ट्र जैसे बड़े इंडस्ट्रियल राज्यों में केंद्रित थी। लेकिन अब नए आंकड़े बता रहे हैं कि व्यापारिक गतिविधियां दूसरे राज्यों की ओर बढ़ रही हैं। बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में सालाना कंपनी रजिस्ट्रेशन तीन गुना हो गए हैं, और नॉर्थ-ईस्ट क्षेत्र में भी एक्टिविटी बढ़ी है। यह बदलाव भारत के बिजनेस माहौल में एक बड़ा स्ट्रक्चरल चेंज दिखाता है, जो अब पारंपरिक आर्थिक केंद्रों से आगे बढ़ रहा है।

लंबी अवधि की सफलता की चुनौतियां

नई कंपनियों के रजिस्ट्रेशन का बढ़ना इंटरप्रेन्योरशिप के लिए एक अच्छा संकेत है, लेकिन राष्ट्रीय आर्थिक ग्रोथ में इनका असली योगदान इस बात पर निर्भर करेगा कि कितनी कंपनियां असल में काम शुरू करती हैं और लंबे समय तक चलती हैं। इन नए क्षेत्रीय बिजनेस इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार निवेश, भरोसेमंद बिजली की सप्लाई और कुशल लेबर की उपलब्धता की जरूरत होगी। निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि क्या सरकार क्रेडिट की आसान उपलब्धता और बिजनेस इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने पर ध्यान देती रहेगी, ताकि ये नई कंपनियां सिर्फ रजिस्ट्रेशन तक ही सीमित न रहें बल्कि असल में रोजगार और उत्पादन में योगदान कर सकें।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.