क्या है इस 'ऊर्जा' खपत की वजह?
CLASP और Bureau of Energy Efficiency (BEE) की एक संयुक्त रिपोर्ट में सामने आया है कि देश भर के 4,321 घरों के सर्वे के आधार पर, पंखे, एयर कंडीशनर (AC), और कूलर जैसे कूलिंग उपकरण अब भारतीय घरों में बिजली के सबसे बड़े कंज्यूमर बन गए हैं। यह ट्रेंड ऐसे समय में आया है जब देश की कुल ऊर्जा मांग तेजी से बढ़ रही है।*
राष्ट्रीय स्तर पर बिजली की बढ़ती मांग
रिपोर्ट बताती है कि भारतीय घरों से कुल बिजली की 25% खपत होती है, और इसमें हर साल 6% की दर से बढ़ोतरी हो रही है। पिछले एक दशक में, देश की कुल बिजली की खपत लगभग दोगुनी हो गई है, जबकि पीक डिमांड में 79% का इजाफा हुआ है।*
शहरी-ग्रामीण अंतर और एप्लायंस की कहानी
शहरों में बिजली की खपत गांवों से काफी ज्यादा है, खासकर गर्म इलाकों में। सर्वे में यह भी पाया गया कि कई एप्लायंस मॉडल अभी भी एनर्जी-एफिशिएंट नहीं हैं। हालांकि सीलिंग फैन और LED लाइटें हर जगह आम हैं, लेकिन एयर कंडीशनर (AC) केवल 13.3% घरों में मिले, जो शहरी इलाकों में 17% तक पहुँचते हैं, पर गांवों में यह आंकड़ा सिर्फ 4% है।*
भविष्य के अनुमान और सुझाए गए समाधान
विशेषज्ञों का अनुमान है कि कूलिंग एप्लायंसेज की मांग 2037-38 तक आठ गुना तक बढ़ सकती है। किचन एप्लायंसेज बिजली के दूसरे सबसे बड़े कंज्यूमर हैं, जो 28% बिजली खाते हैं। इस बढ़ती खपत को संभालने के लिए, CLASP और BEE एसी और रेफ्रिजरेटर जैसे प्रमुख उपकरणों के लिए और सख्त एनर्जी एफिशिएंसी स्टैंडर्ड्स (ऊर्जा दक्षता मानक) लागू करने पर जोर दे रहे हैं। साथ ही, वे कंज्यूमर को ज़्यादा एनर्जी-सेविंग मॉडल अपनाने के लिए फाइनेंशियल इन्सेंटिव्स (वित्तीय प्रोत्साहन), बल्क परचेजिंग प्रोग्राम्स (सामूहिक खरीद योजनाएं) और कंज्यूमर एजुकेशन (उपभोक्ता जागरूकता) जैसे उपायों की भी सिफारिश कर रहे हैं।
