Live News ›

GST कलेक्शन का रिकॉर्ड! पर आयात पर निर्भरता और घरेलू मांग में कमजोरी, क्या है मतलब?

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorSaanvi Reddy|Published at:
GST कलेक्शन का रिकॉर्ड! पर आयात पर निर्भरता और घरेलू मांग में कमजोरी, क्या है मतलब?
Overview

भारत सरकार के लिए खुशखबरी! मार्च 2026 में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) कलेक्शन **₹2 लाख करोड़** के पार पहुंच गया है, जो पिछले साल के मुकाबले **8.8%** की बढ़त दिखाता है। हालांकि, इस दमदार आंकड़े के पीछे एक महत्वपूर्ण अंतर छिपा है: आयात से होने वाली कमाई में **17.8%** की ज़बरदस्त उछाल आई है, जबकि घरेलू बिक्री से कलेक्शन सिर्फ **5.9%** बढ़ा है। यह दिखाता है कि सरकार आयात पर ज़्यादा निर्भर हो रही है, और देश की अपनी मांग (domestic demand) उतनी मज़बूत नहीं है।

आयात से मिली रिकॉर्ड कमाई!

मार्च 2026 के लिए गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) का कुल कलेक्शन ₹2,00,064 करोड़ रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 8.8% ज़्यादा है। इस रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन का बड़ा श्रेय आयात (imports) से हुई कमाई को जाता है, जिसमें 17.8% की ज़बरदस्त बढ़त दर्ज की गई और यह ₹53,861 करोड़ तक पहुंच गया। वहीं, घरेलू GST कलेक्शन महज़ 5.9% बढ़कर ₹1.46 लाख करोड़ रहा। यह अंतर साफ बताता है कि भारत का अंतर्राष्ट्रीय व्यापार तो तेज़ी से बढ़ रहा है, लेकिन देश की अंदरूनी अर्थव्यवस्था उतनी रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है।

पूरे फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए, कुल GST कलेक्शन 8.3% बढ़कर ₹22.27 लाख करोड़ रहा, जबकि नेट कलेक्शन 7.1% की बढ़त के साथ ₹19.34 लाख करोड़ दर्ज किया गया। मार्च में रिफंड (refunds) के भुगतान में 13.8% की बढ़ोतरी, यानी ₹22,074 करोड़, ने भी नेट रेवेन्यू ग्रोथ को थोड़ा कम किया।

दुनिया की नज़रों में भारत, पर अंदरूनी दबाव

दुनिया भर में भारत की आर्थिक विकास दर सबसे तेज़ रहने की उम्मीद है, और 2026 में वैश्विक विकास में इसका बड़ा योगदान होगा। अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में GDP ग्रोथ 7.5% से 7.8% के बीच रहेगी। Goldman Sachs का अनुमान है कि 2026 में यह 6.9% रह सकती है। लेकिन, इसके विपरीत OECD ने FY27 के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान घटाकर 6.1% कर दिया है, जो वैश्विक अनिश्चितताओं और बढ़ती ऊर्जा कीमतों का असर दिखाता है। 2026 में भारत की महंगाई दर 3.9% तक पहुंचने का अनुमान है, जिससे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ब्याज दरें (policy rates) बढ़ा सकता है। बढ़ता करंट अकाउंट डेफिसिट (current account deficit), जिसमें कीमती धातुओं जैसे आयात में बढ़ोतरी शामिल है, आर्थिक चुनौतियों को और बढ़ा रहा है।

राज्यों का प्रदर्शन भी अलग-अलग

GST के मजबूत ऊपरी आंकड़ों के नीचे, अर्थव्यवस्था की कुछ कमजोरियां छिपी हैं। आयात और घरेलू रेवेन्यू ग्रोथ के बीच बढ़ता अंतर, घरेलू मांग के ठंडा पड़ने का संकेत दे रहा है। Deloitte का कहना है कि घरेलू मांग में लचीलापन तो है, लेकिन इसकी ग्रोथ धीमी पड़ सकती है। राज्यों के GST रेवेन्यू प्रदर्शन में भी बड़ा अंतर दिख रहा है। महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात जैसे बड़े औद्योगिक राज्यों ने शानदार नतीजे दिखाए, वहीं तमिलनाडु और असम जैसे राज्यों में मार्च में रेवेन्यू घटा। यह बताता है कि जो राज्य घरेलू GST और रिफंड की अस्थिरता पर ज़्यादा निर्भर हैं, वे ज़्यादा मज़बूत स्थिति में नहीं हैं। अप्रैल-नवंबर 2025 के आंकड़े बताते हैं कि लगभग आधे भारतीय राज्यों को 5% से ज़्यादा ग्रोथ हासिल करने में दिक्कत हुई या उनका रेवेन्यू घटा।

भविष्य के लिए घरेलू मज़बूती पर ध्यान ज़रूरी

मार्च का GST कलेक्शन साल के अंत के लिए एक सकारात्मक तस्वीर पेश करता है, लेकिन आयात राजस्व पर निर्भरता और घरेलू व राज्य-स्तरीय प्रदर्शन में असमानता आने वाली चुनौतियों की ओर इशारा करती है। हालांकि भारत की आर्थिक विकास दर मज़बूत रहने की उम्मीद है, पर इस ग्रोथ की गुणवत्ता घरेलू मांग को बढ़ावा देने और क्षेत्रीय वित्तीय असमानताओं को दूर करने पर निर्भर करेगी। सरकार की भविष्य की नीतियां सार्वजनिक निवेश को संतुलित करने, महंगाई को काबू में रखने और वित्तीय जिम्मेदारी बनाए रखने पर केंद्रित हो सकती हैं, जैसा कि FY2026 के लिए अनुमानित 4.5% के वित्तीय घाटे (fiscal deficit) से पता चलता है।

Disclaimer:This content is for informational purposes only and does not constitute financial or investment advice. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making decisions. Investments are subject to market risks, and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors are not liable for any losses. Accuracy and completeness are not guaranteed, and views expressed may not reflect the publication’s editorial stance.