देश की इकोनॉमी के लिए फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के आंकड़े कुछ मिली-जुली तस्वीर पेश कर रहे हैं। जहाँ एक ओर गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) कलेक्शन में 5.57% की मामूली बढ़त के साथ यह पिछले 5 सालों में सबसे धीमी ग्रोथ रही, वहीं दूसरी ओर इसकी कहानी इम्पोर्ट्स (Imports) और घरेलू मांग (Domestic Demand) के बीच बड़े अंतर की है।
GST कलेक्शन के कुल आंकड़े ₹23.32 लाख करोड़ तक पहुंचे, लेकिन असली खेल इन आंकड़ों के पीछे छिपा है। इम्पोर्ट्स पर लगे टैक्स से कलेक्शन में 12.8% की शानदार उछाल आई, जो ₹6.01 लाख करोड़ रहा। वहीं, घरेलू स्तर पर सामानों और सेवाओं की बिक्री से आने वाला रेवेन्यू (Domestic Revenue) सिर्फ 3.27% बढ़कर ₹17.30 लाख करोड़ पर अटक गया। इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (IGST) इम्पोर्ट्स से 14.1% बढ़ा, जिससे कुल ग्रॉस IGST में 9.4% की बढ़त दर्ज हुई। यह बाहरी मांग पर निर्भरता इकोनॉमी को ग्लोबल ट्रेड के उतार-चढ़ाव के प्रति अधिक संवेदनशील बना सकती है।
कलेक्शन को और कम करने वाला एक और बड़ा फैक्टर रहा टैक्स रिफंड्स (Tax Refunds) का बढ़ना। कंपनियों को जारी किए गए रिफंड्स 17.9% बढ़कर ₹2.98 लाख करोड़ तक पहुँच गए। यह बढ़ोतरी ग्रॉस रेवेन्यू ग्रोथ से कहीं ज्यादा रही, जिससे नेट GST कलेक्शन में सिर्फ 4% की मामूली बढ़त देखकर ₹2.03 लाख करोड़ तक पहुंचा। घरेलू सौदों के लिए रिफंड्स में 23.8% की बड़ी वृद्धि देखी गई, जिसने नेट कलेक्शन को सीधे तौर पर प्रभावित किया।
घरेलू मांग में नरमी के संकेत मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से भी मिल रहे हैं। मार्च 2026 में मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) पिछले 45 महीनों के सबसे निचले स्तर 53.9 पर आ गया। बढ़ती लागत, प्रतिस्पर्धा और बाजार की अनिश्चितता ने फैक्टरी आउटपुट और नए ऑर्डर्स को धीमा कर दिया है। इसी का नतीजा है कि इस फाइनेंशियल ईयर में ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) बढ़कर $119.30 बिलियन हो गया, क्योंकि इम्पोर्ट्स, एक्सपोर्ट्स से काफी ज्यादा बढ़ गए।
देश के राज्यों में भी इकोनॉमिक परफॉर्मेंस अलग-अलग देखने को मिली। हरियाणा ने स्टेट GST (SGST) में 22% की ग्रोथ दर्ज की, वहीं महाराष्ट्र सबसे बड़ा कलेक्शन वाला राज्य रहा। लेकिन, चिंता की बात यह है कि 12 राज्यों में GST कलेक्शन में गिरावट आई, जिनमें झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में दोहरे अंकों की कमी देखी गई।
इसके अलावा, 1 फरवरी 2026 से GST कंपनसेशन सेस (Compensation Cess) का खत्म होना भी रेवेन्यू के लिहाज़ से एक बड़ा बदलाव है। इससे सेस कलेक्शन में 33.3% की बड़ी गिरावट आई, जो ₹99,039 करोड़ रहा। ऐसे में, सरकार अब FY27 के लिए टैक्स अनुमानों की समीक्षा कर रही है, और इकोनॉमी को सहारा देने के लिए फिस्कल डिसिप्लिन पर जोर दे रही है।
