इम्पोर्ट्स ने बढ़ाई सरकारी तिजोरी की रौनक
FY26 में कुल ग्रॉस GST कलेक्शन 8.3% बढ़कर ₹22.27 लाख करोड़ रहा। हालांकि, मार्च 2026 के आंकड़े (नेट कलेक्शन ₹1.78 लाख करोड़, 8.2% की ग्रोथ) बताते हैं कि इस तेजी में इम्पोर्ट टैक्स का योगदान जबरदस्त रहा, जो 17.8% की जोरदार उछाल के साथ डोमेस्टिक सेल्स की 5.9% ग्रोथ से कहीं आगे निकल गया। यह दिखाता है कि सरकार का रेवेन्यू अब घरेलू खपत से ज्यादा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर निर्भर हो रहा है।
पिछले सालों के मुकाबले धीमी रफ्तार?
FY26 में 7% की नेट ग्रोथ अच्छी है, लेकिन यह पिछले सालों की तुलना में थोड़ी धीमी है। FY24 में ग्रोथ करीब 11.75% और FY23 में 14.4% थी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इम्पोर्ट्स पर बढ़ती निर्भरता घरेलू मांग में नरमी का संकेत दे सकती है।
बढ़ता GST रिफंड भी चिंता का सबब
FY26 में मार्च महीने में ₹22,074 करोड़ का GST रिफंड बांटा गया, जो पिछले साल के मुकाबले 13.8% ज्यादा है। यह दर्शाता है कि या तो टैक्स अथॉरिटीज क्लेम जल्दी प्रोसेस कर रही हैं, या फिर व्यवसायों को कैश फ्लो की दिक्कत हो रही है और वे पैसे वापस पाने के लिए ज्यादा जोर दे रहे हैं।
इम्पोर्ट पर निर्भरता के खतरे
अगर ग्लोबल ट्रेड में मंदी आती है या इम्पोर्ट्स घटते हैं, तो सरकारी रेवेन्यू पर सीधा असर पड़ सकता है। यह निर्भरता घरेलू खपत की कमजोरियों को छुपा सकती है। वहीं, बढ़ते रिफंड्स व्यवसायों की लिक्विडिटी पर सवाल खड़े कर सकते हैं।
आगे का रास्ता
GST कलेक्शन में आगे भी बढ़ोतरी की उम्मीद है, जो इकोनॉमिक ग्रोथ और GST सिस्टम के मैच्योर होने से संभव है। FY27 में कंज्यूमर खर्च के बढ़ने की उम्मीद है, जो डोमेस्टिक ग्रोथ को बढ़ावा दे सकता है। हालांकि, इम्पोर्ट्स और डोमेस्टिक सेल्स के बीच का यह गैप दिखाता है कि लगातार ग्रोथ के लिए घरेलू मांग को मजबूत करना बेहद जरूरी होगा।