भारत की रफ्तार, दुनिया की चिंता?
आने वाली 27 फरवरी, 2026 को सभी की निगाहें भारत के तीसरे क्वार्टर (Q3) फाइनेंशियल ईयर 2026 के GDP आँकड़ों पर टिकी होंगी। एक्सपर्ट्स और कई रिसर्च फर्मों का अनुमान है कि यह आँकड़े 8% के पार जा सकते हैं, जिनमें SBI की रिपोर्ट 8.1% की वृद्धि का संकेत दे रही है। इस मजबूत ग्रोथ के पीछे मुख्य वजहें हैं - घरेलू मांग का मजबूत बने रहना, खेती-बाड़ी और अन्य ग्रामीण गतिविधियों से बढ़ी हुई रूरल डिमांड, और सरकारी राहत पैकेजों से मिली शहरी खर्च में तेजी। इस दिन FY26 के लिए दूसरे एडवांस एस्टिमेट्स भी जारी होंगे, और GDP सीरीज का बेस ईयर बदलकर 2022-23 कर दिया जाएगा। हालांकि, कुछ रेटिंग एजेंसियां थोड़ी सावधानी बरत रही हैं, जैसे ICRA ने 7.2% और India Ratings ने 7% ग्रोथ का अनुमान लगाया है।
ग्लोबल टेक का झटका बाज़ार पर भारी
भारत की मजबूत इकोनॉमिक उम्मीदों के बावजूद, ग्लोबल बाज़ारों पर टेक्नोलॉजी सेक्टर की गिरावट का गहरा असर दिख रहा है। हाल ही में शानदार नतीजे आने के बावजूद Nvidia के शेयर में 5% से ज़्यादा की भारी गिरावट आई, जो अप्रैल 2025 के बाद सबसे बड़ी एक दिन की गिरावट थी। निवेशकों को इसके ग्रोथ सस्टेन करने पर शक है। इस टेक-ड्रिवेन गिरावट का असर अमेरिकी बाज़ारों पर भी दिखा, जहाँ Nasdaq और S&P 500 गिरे, जबकि Dow Jones मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ। 27 फरवरी की सुबह एशियाई बाज़ार भी मिले-जुले संकेतों के साथ खुले। GIFT Nifty फ्यूचर्स करीब 25561 पर ट्रेड कर रहे हैं, जो भारतीय बाज़ारों में भी धीमी शुरुआत का संकेत दे रहे हैं।
कच्चे तेल से लेकर सोने तक, क्या हैं संकेत?
वैश्विक स्तर पर, कच्चे तेल की कीमतों में थोड़ी नरमी देखी गई। WTI क्रूड करीब "$65" और ब्रेंट क्रूड "$70.50" के आसपास ट्रेड कर रहा है। इसका असर ईरान और अमेरिका के बीच न्यूक्लियर टॉक के जारी रहने और अमेरिकी क्रूड इन्वेंट्री में बढ़ोतरी से जुड़ा है। US Dollar Index करीब 97.75 पर थोड़ा कमजोर हुआ, जिसका फायदा सोने को मिला, जो करीब "$5190" प्रति औंस के स्तर पर बना हुआ है।
बाज़ार के सामने खड़ी हैं ये चुनौतियाँ
हालांकि, भारतीय बाज़ार की मजबूती कुछ चुनौतियों का भी सामना कर रही है। ग्लोबल टेक स्टॉक्स, खासकर AI से जुड़े शेयरों में लगातार देखी जा रही वोलेटिलिटी एक बड़ा खतरा है, जो पूरे सेक्टर में फैल सकती है। Nvidia जैसी कंपनियों की ग्रोथ पर संदेह व्यापक सेक्टर रोटेशन को ट्रिगर कर सकता है, जिससे दुनिया भर के ग्रोथ स्टॉक्स पर असर पड़ेगा। अमेरिका-ईरान न्यूक्लियर टॉक्स से पैदा हुए भू-राजनीतिक तनाव, भले ही तत्काल संघर्ष का रूप न लें, लेकिन एनर्जी की कीमतों और निवेशकों के सेंटीमेंट पर असर डाल रहे हैं। इसके अलावा, फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPI) की बिकवाली का सिलसिला भी बाज़ार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है, जो डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स की खरीदारी और मजबूत GDP आँकड़ों के सकारात्मक प्रभाव को कम कर सकता है।
आगे क्या?
27 फरवरी को बाज़ार की दिशा काफी हद तक Q3 FY26 GDP डेटा की बारीकियों और उस पर बाज़ार की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी। हालाँकि ग्रोथ के अनुमान मजबूत हैं, लेकिन नए बेस ईयर के साथ आँकड़ों में कुछ बदलाव संभव हैं। एनालिस्ट्स इस पर बारीकी से नज़र रखेंगे कि क्या ग्लोबल टेक से दबाव बढ़ने पर सेक्टर रोटेशन होता है। भू-राजनीतिक घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतें भी अहम बनी रहेंगी। ब्रोकरेज हाउसेज़ का भारतीय बाज़ार पर नज़रिया अभी भी सतर्कता के साथ आशावादी है, जो डोमेस्टिक फैक्टर्स से ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन बाहरी जोखिमों पर पैनी नज़र रखे हुए हैं।