विकास के रास्तों पर अनिश्चितता
भारत की अर्थव्यवस्था फाइनेंशियल ईयर 2026 की तीसरी तिमाही (31 दिसंबर 2025 को समाप्त होने वाली) में मजबूत रफ़्तार पकड़ने की उम्मीद है। SBI रिसर्च का अनुमान है कि ग्रोथ करीब 8.1% रह सकती है, जो कई अन्य अनुमानों से काफी ज़्यादा है। वहीं, रेटिंग एजेंसी ICRA का अनुमान थोड़ा कम, 7.2% है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने पहले 7.0% का अनुमान लगाया था।
इस बीच, शुक्रवार को जारी होने वाले आधिकारिक आंकड़ों में GDP की गणना के लिए एक नया बेस ईयर (2022-23) इस्तेमाल किया जाएगा, जो पुराने 2011-12 बेस ईयर की जगह लेगा। इस बदलाव से पुराने आंकड़ों से सीधी तुलना मुश्किल होगी और नतीजों में कुछ संशोधन की आशंका है।
Moody's Ratings ने साल 2025 में भारत की GDP ग्रोथ 7% और 2026 में 6.4% रहने का अनुमान जताया है, जो इसे उभरते बाजारों में सबसे तेज़ रफ़्तार वाला बनाएगा। हालांकि, Capital Economics जैसे अन्य अनुमान 8.2% तक की ग्रोथ का इशारा करते हैं, जो विभिन्न एजेंसियों के बीच अनुमानों के बड़े अंतर को दर्शाता है। सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा GDP सीरीज को नए सिरे से कैलिब्रेट करने और बैक-सीरीज डेटा जारी करने के बाद ही ग्रोथ की असली रफ़्तार का सही अंदाजा लग पाएगा।
बैंकिंग सेक्टर: क्रेडिट की बढ़ती मांग और डिपाजिट का अंतर
बैंकों की बात करें तो, क्रेडिट (लोन) देने और डिपाजिट (जमा) स्वीकार करने के बीच का अंतर चिंताजनक रूप से बढ़ गया है। 15 जनवरी 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, क्रेडिट-डिपाजिट (CD) रेशियो रिकॉर्ड 82.2% पर पहुंच गया है, जबकि 31 दिसंबर 2025 तक यह 81.75% था। इसका मतलब है कि बैंक अपनी जमा राशि का एक बड़ा हिस्सा लोन के रूप में दे रहे हैं। यह रिटेल, MSME और कॉर्पोरेट सेक्टर से लोन की मजबूत मांग को दर्शाता है।
हालांकि, लगातार ऊंचे CD रेशियो से लिक्विडिटी (तरलता) पर दबाव पड़ सकता है, अगर डिपाजिट ग्रोथ क्रेडिट ग्रोथ के साथ तालमेल नहीं बिठा पाती है।
इस तिमाही में, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) ने निजी बैंकों की तुलना में ज़्यादा मजबूत ईयर-ऑन-ईयर नेट प्रॉफिट ग्रोथ दिखाई है। 31 दिसंबर 2025 को समाप्त नौ महीनों में, 12 PSBs ने 12.5% की बढ़ोतरी के साथ ₹1.46 लाख करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया। वहीं, आठ प्रमुख निजी बैंकों ने इसी अवधि में लगभग 3% की बढ़ोतरी के साथ ₹1.30 लाख करोड़ से ज़्यादा का प्रॉफिट कमाया।
लेकिन, हालिया रिपोर्ट्स थोड़ी अलग तस्वीर दिखाती हैं। फाइनेंशियल ईयर 2026 के पहले नौ महीनों में PSBs के कोर ऑपरेटिंग प्रॉफिट में 2% की गिरावट आई, जबकि निजी बैंकों के कोर ऑपरेटिंग प्रॉफिट में 7% की बढ़ोतरी देखी गई।
जोखिम और आगे की राह
भारत की GDP ग्रोथ की उम्मीदों के साथ कुछ बड़ी अनिश्चितताएं भी जुड़ी हैं। अलग-अलग अनुमानों (RBI का 7.0% से लेकर SBI रिसर्च का 8.1% और Capital Economics का 8.2%) के बीच बड़ा अंतर, और GDP डेटा में होने वाले बड़े बदलाव, सटीक भविष्यवाणी को मुश्किल बना रहे हैं।
लगातार 80% से ऊपर बना रहने वाला CD रेशियो, भले ही मजबूत आर्थिक गतिविधि का संकेत दे, लेकिन अगर डिपाजिट ग्रोथ धीमी रहती है तो यह लिक्विडिटी की कमी का कारण बन सकता है। PSBs की कुछ परफॉर्मेंस में नॉन-कोर इनकम पर निर्भरता जैसी कमजोरियां भी देखी जा रही हैं।
वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ाव, जैसे कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में बदलाव, कैपिटल फ्लो और करेंसी वैल्यू पर असर डाल सकते हैं। महंगाई (Inflation) फिलहाल नियंत्रण में दिख रही है, पर जनवरी 2026 में CPI 2.75% तक पहुंच गई थी, जिस पर RBI की पैनी नज़र रहेगी।
भविष्य का दृष्टिकोण
आगे चलकर, विश्लेषकों का मानना है कि बैंकिंग सेक्टर में रिकवरी की उम्मीद है। IIFL Capital की एक रिपोर्ट के अनुसार, फाइनेंशियल ईयर 2027-28 में बैंकिंग सेक्टर की कमाई 17% CAGR (कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट) से बढ़ सकती है, जिसमें निजी बैंक अपने मजबूत कोर ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस के दम पर आगे रहेंगे।
RBI ने खुद FY26 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 7.3% से बढ़ाकर 7.4% कर दिया है, जो लगातार ग्रोथ मोमेंटम में विश्वास दिखाता है। RBI का अनुमान है कि FY26 में महंगाई लगभग 2.1% रहेगी, जिससे मॉनेटरी पॉलिसी के लिए गुंजाइश बनी रहेगी।
हालांकि, बैंकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वे क्रेडिट की मांग को पूरा करने के लिए प्रभावी ढंग से डिपाजिट ग्रोथ का प्रबंधन कैसे करते हैं और बदलते इंटरेस्ट रेट माहौल में अपने एसेट-लायबिलिटी मिसमैच (संपत्ति-देनदारी का बेमेल) को कैसे संभालते हैं।