India GDP: रफ्तार धीमी! एक्सपोर्ट और कैपेक्स में गिरावट से झटका, क्या घरेलू मांग संभालेगी?

ECONOMY
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
India GDP: रफ्तार धीमी! एक्सपोर्ट और कैपेक्स में गिरावट से झटका, क्या घरेलू मांग संभालेगी?
Overview

इंडिया की इकोनॉमिक ग्रोथ (Economic Growth) की रफ्तार धीमी होती दिख रही है। ICRA की रिपोर्ट के मुताबिक, **फाइनेंशियल ईयर 2025-26** की तीसरी तिमाही (Q3) में जीडीपी ग्रोथ घटकर **7.2%** रहने का अनुमान है, जो पिछली तिमाही के **8.2%** से काफी कम है। इस गिरावट की मुख्य वजह सरकारी कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) में **23.4%** की भारी कमी और सर्विसेज व एग्रीकल्चर सेक्टर में नरमी है।

इंडस्ट्रियल ग्रोथ दमदार, पर सरकारी खर्च पर लगाम

फाइनेंशियल ईयर 2025-26 की तीसरी तिमाही (Q3) में भारत की जीडीपी ग्रोथ की रफ्तार धीमी पड़कर 7.2% रहने का अनुमान है। यह पिछली तिमाही के 8.2% के मुकाबले एक बड़ी गिरावट है। इस नरमी का सबसे बड़ा कारण सरकारी कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) में 23.4% की भारी गिरावट है। पिछले 3.1 ट्रिलियन रुपये के मुकाबले इस तिमाही में सरकारी खर्च घटकर 2.1 ट्रिलियन रुपये पर आ गया। ऐसे समय में जब सरकारी खर्च कम हुआ है, वहीं इंडस्ट्रियल सेक्टर ने शानदार प्रदर्शन किया है। ICRA का अनुमान है कि यह सेक्टर 8.3% की दर से बढ़ेगा, जो पिछले आठ तिमाहियों में सबसे अच्छी ग्रोथ है। मैन्युफैक्चरिंग GVA भी दूसरी तिमाही में 9.13% बढ़ा था। हालांकि, सर्विसेज GVA में नरमी दिख रही है, जिसके 7.8% रहने की उम्मीद है।

एक्सपोर्ट की रफ्तार धीमी, पर घरेलू मांग बनी सहारा

बाहरी मोर्चे पर तस्वीर मिली-जुली है। मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट (Merchandise Exports) में मामूली 1.9% की बढ़त देखी गई, जिसका असर ग्लोबल डिमांड में नरमी और अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ (Tariffs) पर भी है। सर्विसेज एक्सपोर्ट (Services Exports), जो भारत के लिए ग्रोथ का अहम इंजन है, वह भी 7.5% की सात-तिमाही की सबसे धीमी दर पर आ गया। अप्रैल-अक्टूबर 2025 के दौरान मर्चेंडाइज और सर्विसेज एक्सपोर्ट की कुल ग्रोथ 4.84% रही। तीसरी तिमाही में मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट बढ़कर 2.3% हो गया, जो 13 तिमाहियों का सबसे बड़ा आंकड़ा है।

हालांकि, देश की डोमेस्टिक डिमांड (Domestic Demand) एक मजबूत सहारा बनी हुई है। सितंबर 2025 में लागू हुए गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) की दरों में तर्कसंगतता (Rationalization) से खपत (Consumption) को बढ़ावा मिला है। अनुमान है कि इससे अगले चार से छह तिमाहियों में जीडीपी ग्रोथ में 100-120 बेसिस पॉइंट का इजाफा हो सकता है। प्राइवेट कंजम्पशन ग्रोथ तीसरी तिमाही में 8% पर पहुंच गई।

आगे की राह में क्या हैं चिंताएं?

इकॉनमी की मौजूदा रफ्तार पर सवाल उठ रहे हैं, खासकर डोमेस्टिक कंजम्पशन पर बढ़ती निर्भरता और सरकारी कैपिटल एक्सपेंडिचर में कमी के चलते। सरकारी कैपेक्स, जो इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट के लिए एक अहम जरिया है, उसकी कमी लंबी अवधि में ग्रोथ को धीमा कर सकती है। इतिहास गवाह है कि फिस्कल कंसॉलिडेशन (Fiscal Consolidation) के दौर में इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ धीमी रही है।

इसके अलावा, बाहरी सेक्टर ग्लोबल जियोपॉलिटिकल टेंशन और ट्रेड पॉलिसीज, खासकर अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित हो सकता है। मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट में धीमी ग्रोथ चिंता का विषय है। डोमेस्टिक डिमांड भले ही फिलहाल मजबूत हो, लेकिन ग्लोबल इकॉनमी की स्थिति बिगड़ने या ब्याज दरों (Interest Rates) की नीतियों में बदलाव से चुनौतियां आ सकती हैं।

भविष्य का अनुमान: ग्रोथ जारी रहने की उम्मीद

आगे चलकर, प्रमुख अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां ​​भारत के लिए सकारात्मक लेकिन मिश्रित दृष्टिकोण बनाए हुए हैं। IMF ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए अपना अनुमान 7.3% कर दिया है, जबकि Moody's 2025 में 7% और 2026 में 6.4% ग्रोथ का अनुमान लगा रही है। S&P और वर्ल्ड बैंक 6.3%-6.5% रेंज में ग्रोथ की उम्मीद कर रहे हैं, और MoSPI के फर्स्ट एडवांस एस्टिमेट्स 7.4% बताते हैं। ये अनुमान भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बताते हैं। हालांकि, लगातार ग्रोथ के लिए सरकार को पब्लिक कैपिटल एक्सपेंडिचर को फिर से गति देने और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को प्रोत्साहित करने की जरूरत होगी, ताकि बाहरी चुनौतियों का सामना किया जा सके और डोमेस्टिक कंजम्पशन के अलावा ग्रोथ के और भी स्रोत सुनिश्चित हो सकें।

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