RBI का प्लान: क्या है इस गिरावट की असल वजह?
विदेशी मुद्रा भंडार में आई इस कमी को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। RBI, बढ़ते डॉलर और विदेशी बाजारों से पैसे की निकासी (Outflows) के दबाव के बीच भारतीय रुपये को गिरने से बचाने के लिए विदेशी मुद्रा की बिकवाली कर रहा है। सीधे शब्दों में कहें तो, RBI बाजार में डॉलर की सप्लाई बढ़ाकर रुपये को गिरने से रोक रहा है, ताकि महंगाई न बढ़े।
सोने का खेल और डॉलर का वार
इस गिरावट की एक और बड़ी वजह है सोने के दामों में उतार-चढ़ाव। RBI अपने भंडार में रखे सोने के मूल्य का आकलन हर हफ्ते करता है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो डॉलर के टर्म्स में सोने का मूल्य घट जाता है। इस बार भी ऐसा ही हुआ, जिससे सोने की वैल्यू में $4.53 अरब की कमी आई। यानी, एक तरफ RBI रुपये को बचाने के लिए डॉलर बेच रहा है, वहीं दूसरी तरफ उसके पास रखे सोने की कीमत भी घट रही है।
क्या हैं खतरे के संकेत?
लगातार दो हफ्तों में विदेशी मुद्रा भंडार में $15 अरब से ज्यादा की कमी चिंता का विषय है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या RBI अपनी मौजूदा रणनीति पर कायम रह पाएगा? अगर भंडार इसी रफ्तार से घटता रहा, तो RBI को रुपये की स्थिरता और ब्याज दरों के बीच किसी एक को चुनना पड़ सकता है। SDRs (Special Drawing Rights) और IMF रिजर्व पोजीशन में भी थोड़ी कमी आई है, जो यह बताता है कि मुश्किल हालात के लिए RBI के पास अब कम गुंजाइश बची है।
आगे क्या उम्मीद करें?
विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा विदेशी मुद्रा भंडार अभी भी 11 महीने के आयात को कवर करने के लिए काफी है। हालांकि, भंडार में कमी की रफ्तार पर पैनी नजर रखने की जरूरत है। RBI संभवतः बाजार में अस्थिरता को कम करने के लिए अपनी दखलंदाजी जारी रखेगा। अगर भंडार में और तेज गिरावट आती है, तो RBI घरेलू ब्याज दरों को और सख्त कर सकता है। बाजार अब इस बात का इंतजार कर रहा है कि क्या रुपया बिना किसी बड़े बदलाव के स्थिर हो पाएगा।
