सोने की चमक से चमका भारत का फॉरेक्स रिजर्व!
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) 30 जनवरी 2026 को समाप्त हुए सप्ताह में एक नया कीर्तिमान रचते हुए 723.774 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। यह पिछले सप्ताह के मुकाबले 14.361 अरब डॉलर की बड़ी छलांग है। इस ऐतिहासिक बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ा हाथ सोने के भंडार (Gold Holdings) का रहा, जिसमें 14.595 अरब डॉलर का जबरदस्त इजाफा देखा गया। सोने के भंडार का मूल्य अब बढ़कर 137.683 अरब डॉलर हो गया है। यह बड़ा बदलाव वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और अस्थिरता के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की सुरक्षित संपत्तियों (Safe-Haven Assets) की ओर रणनीतिक झुकाव को दर्शाता है।
जहां सोने के भंडार में तेजी आई, वहीं विदेशी मुद्रा संपत्तियों (Foreign Currency Assets), जो रिजर्व का सबसे बड़ा हिस्सा हैं, में 493 मिलियन डॉलर की मामूली गिरावट दर्ज की गई और यह 562.392 अरब डॉलर पर आ गईं। फॉरेन करेंसी एसेट्स में यह उतार-चढ़ाव मुख्य रूप से गैर-अमेरिकी मुद्राओं के विनिमय दर में बदलाव और लेनदेन के कारण होता है।
कुल मिलाकर, रिजर्व की मजबूती को स्पेशल ड्राइंग राइट्स (SDRs) में 216 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी से भी बल मिला, जो अब 18.953 अरब डॉलर हो गए हैं। साथ ही, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ भारत की रिजर्व स्थिति में 44 मिलियन डॉलर का इजाफा हुआ, जो 4.746 अरब डॉलर पर पहुंच गई। ये छोटे घटक भी भारत के मजबूत बाहरी वित्तीय बफ़र्स को विविधतापूर्ण और टिकाऊ बनाते हैं।
वैश्विक अस्थिरता के बीच बड़ी रणनीति
गोल्ड रिजर्व (Gold Reserves) में आक्रामक बढ़ोतरी वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और संभावित मुद्रा अवमूल्यन के दबावों के खिलाफ एक सचेत रणनीति का हिस्सा है। भू-राजनीतिक तनावों और 2025-2026 में बढ़े वैश्विक आर्थिक जोखिमों ने सोने को एक पारंपरिक सुरक्षित संपत्ति के रूप में और भी महत्वपूर्ण बना दिया है। दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपने गोल्ड आवंटन को बढ़ा रहे हैं, और ऐसा लगता है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी अपने रिजर्व को मजबूत करने के लिए इसी राह पर चल रहा है। सोने में यह रणनीतिक बदलाव महंगाई के खिलाफ एक हेज (Hedge) के रूप में काम करता है और जब फिएट करेंसी (Fiat Currency) दबाव में होती है तो मूल्य का एक स्थिर भंडार प्रदान करता है।
यह रिजर्व विस्तार तब हुआ जब भारतीय रुपया (Indian Rupee) जनवरी 2026 में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.29 के अपने अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था। इस अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए RBI ने सक्रिय रूप से डॉलर बेचे। हालांकि, घरेलू लिक्विडिटी (Liquidity) को प्रबंधित करने और डॉलर की बिक्री के प्रभाव को कम करने के लिए RBI द्वारा किए गए फॉरेक्स स्वैप (Forex Swap) ऑपरेशंस के कारण कुल रिजर्व मजबूत बना रहा। हाल ही में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (US-India trade deal) की घोषणा के कारण रुपये में आई रिकवरी ने कुछ राहत दी है, लेकिन मजबूत फॉरेक्स बफ़र्स की आवश्यकता बनी हुई है।
बाजार का संदर्भ और भविष्य की राह
2024 के आंकड़ों के अनुसार, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार, तेजी से बढ़ने के बावजूद, चीन (3.46 ट्रिलियन डॉलर), जापान (1.23 ट्रिलियन डॉलर) और अमेरिका (910 अरब डॉलर) जैसी प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अभी भी काफी कम है। हालांकि, भारत के रिजर्व अब 11 महीने से अधिक के आयात और इसके लगभग 94% बाहरी ऋण को कवर करने के लिए पर्याप्त हैं, जिससे झटकों के खिलाफ इसकी बाहरी स्थिरता और लचीलापन काफी बढ़ गया है। 2025 में भारत को मिले सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग अपग्रेड (Sovereign Credit Rating Upgrades) में इस मजबूती को पहचाना गया है, जिससे निवेशकों का विश्वास बढ़ा है और संभावित रूप से उधार लेने की लागत कम हुई है।
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक का अनुमान है कि 2026 में भारत की आर्थिक वृद्धि पिछले वर्षों में चक्रीय कारकों और मजबूत घरेलू मांग से प्रेरित एक मजबूत प्रदर्शन के बाद लगभग 6.4% तक नरम हो जाएगी। जबकि वैश्विक वृद्धि 2026 में 3.3% पर स्थिर रहने की उम्मीद है, व्यापार नीति में बदलाव और भू-राजनीतिक तनाव से जोखिम बने हुए हैं। सोने के भंडार का निरंतर संचय बताता है कि भारतीय मौद्रिक अधिकारी, भले ही अर्थव्यवस्था वैश्विक विकास का एक प्रमुख चालक बनी हुई है, एक अस्थिर वैश्विक वित्तीय वातावरण में पूंजी संरक्षण और स्थिरता को प्राथमिकता दे रहे हैं। FY2025-26 की पहली छमाही के लिए करंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit) सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 0.8% रहा, जो मजबूत सेवा निर्यात और प्रेषण (Remittances) से समर्थित था।