इस साल भारतीय इक्विटी फंड्स से विदेशी निवेशकों ने **$9 बिलियन** निकाले हैं। ग्लोबल निवेशक अब अमेरिकी शेयरों (U.S. Equities) की ओर जा रहे हैं, जो कि 2023-2024 के मजबूत इनफ्लो के उलट है।
क्यों हुआ ये बड़ा बदलाव?
साल 2026 की शुरुआत से ही विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी फंड्स से $9 बिलियन की भारी रकम निकाली है। यह एक बड़ा संकेत है कि ग्लोबल निवेशक अपने पोर्टफोलियो का बड़ा हिस्सा अब अमेरिकी बाजारों की ओर लगा रहे हैं। यह निकासी ऐसे समय में हुई है जब मार्च 2023 से अक्टूबर 2024 के बीच इन फंड्स में लगभग $20 बिलियन का निवेश आया था।
फंड्स पर क्या हुआ असर?
इस निकासी का असर अलग-अलग तरह के फंड्स पर पड़ रहा है। लॉन्ग-ओनली फंड्स (Long-only funds), जो लंबे समय के लिए शेयर रखते हैं, से इस साल $7 बिलियन निकाले गए हैं। वहीं, एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) से भी $2 बिलियन की निकासी हुई है। इससे साफ है कि बड़े संस्थानिक (Institutional) और रिटेल निवेशक दोनों ही भारत में अपना निवेश कम कर रहे हैं।
कहां से हुई सबसे ज्यादा बिकवाली?
यह बिकवाली (Selling Pressure) दुनिया के हर कोने से एक जैसी नहीं है। लक्जमबर्ग (Luxembourg) स्थित फंड्स ने सबसे ज्यादा $3.5 बिलियन निकाले हैं। इसके बाद अमेरिका से $2.4 बिलियन और जापान से $2.1 बिलियन की निकासी हुई है। वहीं, आयरलैंड (Ireland) के फंड्स इस मामले में स्थिर रहे हैं।
AI और कमोडिटी सेंटीमेंट में बदलाव
इस बड़े बदलाव की एक वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में निवेश के प्रति घटता उत्साह भी है। पहले निवेशक एमर्जिंग मार्केट फंड्स (Emerging Market Funds) को AI सप्लाई चेन के प्रॉक्सी के तौर पर देख रहे थे। लेकिन अब, उनका ध्यान सिर्फ उन्हीं कंपनियों पर है जो सीधे AI से जुड़ी हैं।
AI निवेश में आई नरमी के चलते, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे देशों के फंड्स में कुछ दिलचस्पी दिखी है, लेकिन यह AI निवेश की ऊंचाइयों के मुकाबले धीमी है।
दूसरी ओर, कीमती धातुओं (Precious Metals) के बाजार में कुछ नरमी के संकेत मिल रहे हैं। अप्रैल के बाद से गोल्ड फंड्स से करीब $14 बिलियन निकाले गए थे, लेकिन अब इसमें स्थिरता दिख रही है। हाल ही में गोल्ड फंड्स में $317 मिलियन का पहला साप्ताहिक इनफ्लो देखा गया। सिल्वर फंड्स में बिकवाली भी कम हुई है।
भारतीय निवेशकों के लिए यह जानना ज़रूरी है कि क्या यह फ्लो (Flow) जारी रहेगा। हालांकि डोमेस्टिक संस्थागत निवेशक (Domestic Institutional Investors) अक्सर विदेशी बिकवाली के दौरान बाजार को सहारा देते हैं, लेकिन लंबे समय तक जारी रहने वाली बड़ी निकासी से बाजार की लिक्विडिटी और विदेशी स्वामित्व वाले स्टॉक्स के भाव पर असर पड़ सकता है।
