India Fiscal Deficit: पहली तिमाही में ₹3.1 लाख करोड़ का घाटा, जानिए निवेशकों के लिए क्या है मायने

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AuthorMehul Desai|Published at:
India Fiscal Deficit: पहली तिमाही में ₹3.1 लाख करोड़ का घाटा, जानिए निवेशकों के लिए क्या है मायने

FY27 की पहली तिमाही में भारत का फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit) बढ़कर ₹3.1 ट्रिलियन हो गया है। यह पूरे साल के लक्ष्य का **18.2%** है। सरकारी खर्च में बढ़ोतरी, खासकर कैपिटल इन्वेस्टमेंट (Capital Investment) में, इसकी मुख्य वजह है।

पहली तिमाही में सरकारी खजाने का हाल

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2026-27 फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) की पहली तिमाही में देश का फिस्कल डेफिसिट ₹3.1 ट्रिलियन रहा। यह पूरे साल के लिए तय किए गए लक्ष्य का 18.2% है। आपको बता दें कि सरकार ने पूरे फाइनेंशियल ईयर के लिए ₹16.96 ट्रिलियन यानी GDP का 4.3% फिस्कल डेफिसिट का लक्ष्य रखा है।

पिछले साल की इसी तिमाही में यह आंकड़ा ₹2.8 ट्रिलियन था। फिस्कल डेफिसिट तब होता है जब सरकार का कुल खर्च, उसकी कमाई से ज़्यादा हो जाता है, और इस अंतर को पाटने के लिए सरकार को उधार लेना पड़ता है।

खर्च बढ़ा, कमाई भी बढ़ी

इस तिमाही में फिस्कल डेफिसिट बढ़ने की मुख्य वजह सरकारी खर्च में हुई बढ़ोतरी है। अप्रैल-जून के दौरान सरकार ने कुल ₹13.6 ट्रिलियन खर्च किए, जो पिछले साल इसी अवधि के ₹12.2 ट्रिलियन से ज़्यादा है। इसमें कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) यानी इंफ्रास्ट्रक्चर, सड़क और रेलवे जैसी संपत्तियों पर होने वाला खर्च ₹3.4 ट्रिलियन तक पहुंच गया, जो पिछले साल ₹2.75 ट्रिलियन था।

वहीं, सरकार की कमाई की बात करें तो नेट टैक्स रेवेन्यू (Net Tax Revenue) बढ़कर ₹6.4 ट्रिलियन हो गया, जो पिछले साल ₹5.4 ट्रिलियन था। हालांकि, नॉन-टैक्स रेवेन्यू (Non-Tax Revenue), जिसमें सरकारी कंपनियों से मिलने वाला डिविडेंड (Dividend) और ब्याज शामिल है, में मामूली बढ़त देखी गई और यह ₹3.8 ट्रिलियन रहा।

निवेशकों के लिए क्या है मतलब?

फिस्कल डेफिसिट की रफ्तार निवेशकों के लिए एक अहम पैमाना है क्योंकि यह सीधे तौर पर सरकारी उधारी को प्रभावित करती है। अगर डेफिसिट बढ़ता है, तो सरकार को अंतर को पूरा करने के लिए बाज़ार से ज़्यादा उधार लेना पड़ सकता है। इसका असर बॉन्ड यील्ड (Bond Yield) और अर्थव्यवस्था में ब्याज दरों पर पड़ सकता है। इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकारी खर्च बढ़ना कंस्ट्रक्शन, इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए सकारात्मक माना जाता है क्योंकि इससे मांग बढ़ती है। हालांकि, बढ़ते घाटे के बीच निवेशकों को सरकार की कुल उधारी और यह भी देखना होगा कि वह साल के बाकी हिस्सों में अपने फिस्कल लक्ष्यों को कैसे पूरा करती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.