वित्त मंत्रालय का बड़ा खेल! ₹50,072 करोड़ का हेल्थ सेस डकार गई सरकार? CAG की रिपोर्ट में खुलासा

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
वित्त मंत्रालय का बड़ा खेल! ₹50,072 करोड़ का हेल्थ सेस डकार गई सरकार? CAG की रिपोर्ट में खुलासा
Overview

भारत के वित्त मंत्रालय पर एक बड़ा आरोप लगा है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की एक ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालय ने 2018 और 2024 के बीच करीब ₹50,072 करोड़ का हेल्थ सेस निर्धारित सार्वजनिक खातों में ट्रांसफर नहीं किया है। पब्लिक हेल्थ एक्टिविस्ट्स इस फंड की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं।

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CAG ऑडिट से हुआ सनसनीखेज खुलासा

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की एक महत्वपूर्ण ऑडिट रिपोर्ट ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की वित्तीय देखरेख में बड़ी गड़बड़ियों को उजागर किया है। यह मामला खास तौर पर हेल्थ सेस (Health Cess) के कलेक्शन से जुड़ा है।

हेल्थ सेस कलेक्शन में भारी कमी

CAG की 2024-25 के लिए आई रिपोर्ट के मुताबिक, 2018-19 से 2024-25 के बीच कुल ₹96,627 करोड़ का हेल्थ सेस जमा किया गया था। इसमें से एक बड़ी रकम, यानी ₹50,072 करोड़, सही पब्लिक अकाउंट्स में ट्रांसफर ही नहीं किया गया। यह कुल जमा राशि का लगभग 52% है। अकेले 2024-25 के वित्तीय वर्ष में, प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा निधि (Pradhan Mantri Swasthya Suraksha Nidhi) से ₹21,085 करोड़ के कलेक्शन में से ₹6,646 करोड़ वितरित नहीं किए गए।

वित्तीय जवाबदेही की मांग

पब्लिक हेल्थ एडवोकेसी ग्रुप, जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया (JSAI), ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से जवाब मांगा है। JSAI ने सवाल उठाया है कि हेल्थ और एजुकेशन सेस के लिए अलग अकाउंटिंग हेड (accounting heads) बनाने में इतनी देरी क्यों हुई, जो मार्च 2024 में ही हुआ। यह ग्रुप CAG की बार-बार की आपत्तियों और संवैधानिक प्रावधानों की कथित अनदेखी पर भी सवाल उठा रहा है।

स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि सेस फंड्स को कलेक्ट करने और ट्रांसफर करने की जिम्मेदारी वित्त मंत्रालय की है।

पारदर्शिता पर सवाल और अनस्पेंट बजट

CAG के अनुसार, इन 'शॉर्ट ट्रांसफर्स' (short transfers) के लिए कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। JSAI का तर्क है कि इन विशेष फंड्स को कंसॉलिडेटेड फंड (Consolidated Fund) में मिलाने से यह पता नहीं चलता कि क्या इनका इस्तेमाल पब्लिक हेल्थ के लिए ही हो रहा है, जिससे वित्तीय जवाबदेही कमजोर होती है।

इस समस्या को और बढ़ाते हुए, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय कथित तौर पर मानव संसाधन, मेडिकल एजुकेशन और सामान्य स्वास्थ्य पहलों जैसे प्रमुख क्षेत्रों के लिए आवंटित बजट का पूरी तरह से उपयोग करने में संघर्ष कर रहा है। पिछले तीन सालों में विभिन्न योजनाओं, जिसमें प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (Pradhan Mantri Ayushman Bharat Health Infrastructure Mission) भी शामिल है, के लिए स्वीकृत बजट का एक बड़ा हिस्सा खर्च नहीं हो पाया है।

पब्लिक हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर पर संभावित असर

JSAI का अनुमान है कि ₹50,072 करोड़ के ट्रांसफर न होने से भारत के पब्लिक हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा असर पड़ सकता था। संगठन का सुझाव है कि इन पैसों से 100 से अधिक नए डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल और 100 सरकारी मेडिकल कॉलेज बनाए जा सकते थे। इसके अलावा, इन फंड्स का उपयोग प्राइमरी और कम्युनिटी हेल्थ सेंटरों को अपग्रेड करने और दूरदराज के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में, जहाँ स्वास्थ्य कर्मचारियों की भारी कमी है, उन्हें नियुक्त करने और उचित मुआवजा देने के लिए किया जा सकता था।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.