कच्चे तेल में भारी उछाल, महंगाई और फिस्कल डेफिसिट पर बढ़ी चिंता
पश्चिम एशिया में छिड़े संघर्ष ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट में हलचल मचा दी है। मार्च 2026 के बाद ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) $108 प्रति बैरल के पार चला गया और एक बार तो $120 तक भी पहुंच गया। यह दाम पहले के मुकाबले काफी ज्यादा हैं। तेल की इस बढ़ी हुई कीमतों का सीधा असर महंगाई पर दिख रहा है, जिससे FY2026-27 के लिए CPI महंगाई दर 5.1% के आसपास रहने का अनुमान है।
सरकार ने FY2026-27 के लिए फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit) का लक्ष्य 4.3% रखा है, जो FY2025-26 के संशोधित अनुमान 4.4% से कम है। हालांकि, करंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit) एक बड़ी चुनौती बना हुआ है, जिसके FY2026-27 में 1.8% से 2.1% GDP के बीच रहने की आशंका है। यह पिछले साल से ज्यादा है। हॉरमूज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण रास्तों से व्यापार में आई रुकावटों ने ऊर्जा आयात और ट्रेड बैलेंस दोनों को प्रभावित किया है।
महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन और AI का जॉब मार्केट पर असर
भारत की इंपोर्ट पर निर्भरता सिर्फ जीवाश्म ईंधनों तक सीमित नहीं है। देश लिथियम, कोबाल्ट और निकल जैसे खनिजों पर बहुत ज्यादा निर्भर है, जो एनर्जी ट्रांजिशन और मैन्युफैक्चरिंग लक्ष्यों के लिए ज़रूरी हैं। कुछ प्रमुख खनिजों के लिए 100% इंपोर्ट पर निर्भरता के चलते, भारत सप्लाई रिस्क को मैनेज करने के लिए छह महीने का स्ट्रैटेजिक रिजर्व (Strategic Reserve) बनाने और कई देशों से सोर्सिंग करने जैसी रणनीतियों पर विचार कर रहा है।
दूसरी तरफ, AI जॉब मार्केट को बड़े पैमाने पर बदलने के लिए तैयार है। अनुमान है कि 2030 तक AI करीब 170 मिलियन नई नौकरियां पैदा कर सकता है, लेकिन यह 92 मिलियन पारंपरिक नौकरियों को भी खत्म कर सकता है, खासकर उन कामों को जिनमें दोहराव होता है। भारत के IT सेक्टर में पहले से ही छंटनी और "AI-नेटिव" कंपनियों की ओर रुझान देखा जा रहा है, जो अपस्किलिंग (Upskilling) और "AI-प्लस" रोल्स के लिए तैयार होने की ज़रूरत को दर्शाता है।
मज़बूत डोमेस्टिक डिमांड से सहारा, पर जोखिम बरकरार
इन चुनौतियों के बावजूद, भारत का आर्थिक आउटलुक (Economic Outlook) पॉजिटिव बना हुआ है, जिसमें FY2026-27 के लिए GDP ग्रोथ 6.5-7% के आसपास रहने का अनुमान है। 19.1% के डेट-टू-GDP रेश्यो (Debt-to-GDP Ratio) और बड़े फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व (Foreign Exchange Reserves) के कारण भारत बाहरी झटकों से निपटने के लिए अच्छी स्थिति में है।
हालांकि, पश्चिम एशिया में लंबा खिंचने वाला संघर्ष महंगाई के लिए बड़ा खतरा है, जो RBI के महंगाई नियंत्रण और डोमेस्टिक डिमांड पर असर डाल सकता है। एनर्जी प्राइस की अस्थिरता फिस्कल लक्ष्यों पर दबाव डाल सकती है, जिससे ग्रोथ सपोर्ट और डेफिसिट कम करने के बीच मुश्किल फैसले लेने पड़ सकते हैं। महत्वपूर्ण खनिजों पर इंपोर्ट पर ज़्यादा निर्भरता एक अंडरलाइंग कमजोरी है, खासकर जब चीन की प्रोसेसिंग क्षमता ज़्यादा है। AI के कारण नई नौकरियां पैदा होने की संभावना के साथ-साथ नौकरी खोने का भी खतरा है, जिससे आय असमानता बढ़ सकती है। सरकार एनर्जी सिक्योरिटी बढ़ाने, इंपोर्ट पर निर्भरता कम करने और AI के दौर के लिए लेबर मार्केट को तैयार करने पर फोकस कर रही है।
