भारत पर राजकोषीय दबाव: कच्चे तेल के बढ़ते दाम, सब्सिडी की समीक्षा तय?

ECONOMY
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AuthorAditya Rao|Published at:
भारत पर राजकोषीय दबाव: कच्चे तेल के बढ़ते दाम, सब्सिडी की समीक्षा तय?
Overview

भारत सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 (FY26) के लिए अपने ज्यादातर राजकोषीय लक्ष्यों को हासिल कर लिया है। हालाँकि, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल आने वाले वित्तीय वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए दबाव बना रहे हैं। यदि वैश्विक कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो अधिकारियों को उर्वरक और ईंधन सब्सिडी की समीक्षा करनी पड़ सकती है।

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FY26 के लक्ष्य पूरे, पर FY27 की राह में चुनौतियाँ?

भारतीय सरकार वित्तीय वर्ष 2025-26 (FY26) के लिए निर्धारित ज्यादातर राजकोषीय संकेतकों को पूरा करने में सफल रही है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, टैक्स रेवेन्यू (Tax Revenue) ने संशोधित अनुमानों को पार कर लिया है। कस्टम ड्यूटी 102%, एक्साइज ड्यूटी 101%, और सेंट्रल GST 100.8% तक दर्ज किया गया है, जिससे सरकार राजकोषीय प्रबंधन को लेकर आश्वस्त है।

पश्चिम एशिया का तनाव और बढ़ती ऊर्जा लागत

लेकिन, यह सफलता आने वाले वित्तीय वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए कई सवाल खड़े कर रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आ रही तेजी भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। ब्रेंट क्रूड (Brent crude) के दाम लगभग $107.92 प्रति बैरल और WTI फ्यूचर्स $96.39 प्रति बैरल के स्तर पर पहुँच गए हैं। इस बढ़ोतरी से भारत का आयात बिल (Import Bill) सीधे तौर पर बढ़ेगा, जिससे फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit) पर दबाव बढ़ना तय है।

ऊर्जा आयात पर निर्भरता और सब्सिडी पर मंथन

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर करता है, खासकर कच्चे तेल के मामले में यह निर्भरता करीब 82% है, जबकि प्राथमिक ऊर्जा का आयात लगभग 40% है। यह निर्भरता भारत को वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक झटकों के प्रति बेहद संवेदनशील बनाती है। वित्तीय वर्ष 2027 के लिए अनुमानित उर्वरक सब्सिडी ₹1.71 लाख करोड़ और ईंधन सब्सिडी ₹12,085 करोड़ है। यदि वैश्विक तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो सरकार को इन सब्सिडी के लिए अतिरिक्त फंड का इंतजाम करना पड़ सकता है या फिर इनकी समीक्षा का मुश्किल फैसला लेना पड़ सकता है।

रेटिंग एजेंसियों की चिंता और कर्ज का बोझ

रेटिंग एजेंसी फिच (Fitch Ratings) का अनुमान है कि बढ़ती सब्सिडी और अन्य सहायता उपायों के चलते FY27 में भारत का फिस्कल डेफिसिट सरकार के 4.3% के लक्ष्य को पार कर 4.5% तक जा सकता है। वहीं, मूडीज (Moody's) ने भारत की 'Baa3' रेटिंग को स्थिर तो रखा है, लेकिन देश के उच्च घाटे, कर्ज और ब्याज लागत को लेकर चिंता व्यक्त की है। वर्तमान में भारत का डेट-टू-जीडीपी रेश्यो (Debt-to-GDP Ratio) लगभग 81% है, जबकि सरकार का लक्ष्य 2031 तक इसे घटाकर 50% करना है। रुपये की गिरती कीमत (लगभग 0.0106 USD प्रति 1 INR) भी आयात को महंगा बना रही है।

भविष्य की राह: संतुलन साधने की चुनौती

सरकार ने FY27 के लिए 4.3% के फिस्कल डेफिसिट का लक्ष्य रखा है और धीरे-धीरे इसे कम करने की योजना है। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि अस्थिर कमोडिटी कीमतों और बढ़ते खर्च के कारण यह लक्ष्य चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। ऐसे में, बाहरी आर्थिक दबावों के बीच राजकोषीय अनुशासन बनाए रखना सरकार के लिए एक बड़ी परीक्षा होगी।

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