Morgan Stanley ने भारत के FY27 के लिए GDP ग्रोथ के अपने अनुमान को 6.2% से बढ़ाकर 6.7% कर दिया है। इस बदलाव का मुख्य कारण ब्रोकरेज फर्म का अब यह अनुमान लगाना है कि FY27 में कच्चे तेल (Crude Oil) का औसत भाव $87.5 प्रति बैरल रहेगा, जो पहले के $95 प्रति बैरल के अनुमान से कम है। हालांकि, यह भी बताया गया है कि ऊंची कमोडिटी कीमतों और सप्लाई चेन में लगातार आ रही रुकावटों के चलते जून 2026 तिमाही में ग्रोथ घटकर 6.5% पर आ सकती है।
वैश्विक स्तर पर, IMF ने 2026 के लिए 3.1% और OECD ने 2.9% ग्रोथ का अनुमान लगाया है, जो अनिश्चितता दर्शाते हैं। भारत के FY27 अनुमानों पर अलग-अलग एजेंसियों की राय भी मिली-जुली है। IMF ने 6.5%, वर्ल्ड बैंक ने 6.6%, UN ने 2026 के लिए 6.4% और मूडीज ने 6.0% ग्रोथ का अनुमान जताया है।
पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता ऊर्जा बाजारों और सप्लाई चेन को बाधित कर रही है, जिससे वैश्विक मांग पर अनिश्चितता बनी हुई है। इसी संघर्ष के चलते ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) का भाव हाल ही में $120 प्रति बैरल तक पहुंच गया था, हालांकि बाद में इसमें नरमी की उम्मीद है। वहीं, भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील (Trade Deal) को लेकर भी कुछ जटिलताएं हैं, क्योंकि USTR सेक्शन 301 जांचें पूरी होने तक किसी बड़े समझौते की संभावना कम दिख रही है।
घरेलू मोर्चे पर, ग्रामीण इलाकों में मांग (Rural Demand) अच्छी बनी हुई है, जो फसल और कीमतों में स्थिरता से बढ़ी है। लेकिन, एल नीनो (El Niño) के विकसित होने का खतरा फसल की पैदावार और किसानों की आय को प्रभावित कर सकता है। एल नीनो आमतौर पर भारत में बारिश को कम और गर्मी को बढ़ा देता है, जिससे चावल और गेहूं जैसी फसलों को नुकसान हो सकता है और खाद्य महंगाई बढ़ सकती है, जो ग्रामीण विकास को धीमा कर देगा।
इस बीच, रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के FY27 के दौरान ब्याज दरों (Interest Rates) को स्थिर बनाए रखने की उम्मीद है। RBI विकास की जरूरतों और सप्लाई से जुड़े जोखिमों से पैदा होने वाली महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखेगा। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यदि महंगाई 5% से ऊपर बनी रहती है, तो FY28 में ब्याज दरों में 0.25% की दो बार बढ़ोतरी हो सकती है।
इन सबके बावजूद, 6.7% के अनुमान के साथ भी कई बड़े जोखिम बने हुए हैं। यदि पश्चिम एशिया की अस्थिरता के कारण तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो भारत की ग्रोथ पर इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसी तरह, एल नीनो के कारण कमजोर मॉनसून ग्रामीण मांग को झटका दे सकता है, जो वर्तमान में अर्थव्यवस्था को सहारा दे रही है। यदि पश्चिम एशिया संघर्ष बढ़ता है, तो भारत की GDP ग्रोथ 6.1-6.2% तक गिर सकती है, खासकर यदि कच्चे तेल का औसत भाव $120 प्रति बैरल हो जाए। Morgan Stanley का अनुमान है कि FY28 में भारत की GDP ग्रोथ बढ़कर 7% तक पहुंच सकती है, जब सप्लाई की दिक्कतें कम होंगी और कमोडिटी की कीमतें स्थिर होंगी।
