2025 में भारत में डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) में **44%** का जोरदार उछाल आया है, जिसने एशिया को दुनिया का टॉप निवेश हब बनाए रखने में मदद की है। मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी जैसे अहम सेक्टरों में कैपिटल का बढ़ता फ्लो इस ग्रोथ को दर्शाता है।
ग्लोबल निवेश में भारत का दमदार प्रदर्शन
साल 2025 में ग्लोबल फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) इनफ्लो 6% बढ़कर $1.6 ट्रिलियन तक पहुंच गया, जिसने पिछले दो सालों की गिरावट पर लगाम लगा दी। इस ग्लोबल रिकवरी में भारत एक अहम खिलाड़ी बनकर उभरा, जहाँ विदेशी कैपिटल इनफ्लो में 44% की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस ग्रोथ ने साउथ एशिया के मजबूत प्रदर्शन में भी योगदान दिया और इस क्षेत्र की ग्लोबल कैपिटल मार्केट में स्थिति को और मजबूत किया।
एशिया का दबदबा कायम
डेवलपिंग एशिया दुनिया भर के निवेशकों के लिए पहली पसंद बना रहा, जिसने $644 बिलियन का निवेश आकर्षित किया, जो कि कुल ग्लोबल निवेश का लगभग 40% है। एशिया के अंदर निवेश का परिदृश्य बदल रहा है, जहाँ हाल के दिनों में ईस्ट एशिया के पारंपरिक हब की तुलना में साउथईस्ट एशियन इकोनॉमीज़ में कैपिटल अट्रैक्शन की ग्रोथ तेज देखी गई है। यह दिखाता है कि महाद्वीप की अपील एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल सर्विसेज और ग्लोबल सप्लाई चेन में गहरी पैठ के कारण लगातार बढ़ रही है।
निवेश की बदलती प्राथमिकताएं
निवेशक अब सिर्फ लागत पर आधारित फैसले लेने के बजाय इकोनॉमिक सिक्योरिटी और इंडस्ट्रियल पॉलिसी पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। कैपिटल खास हाई-प्रायोरिटी वाले सेक्टर्स जैसे सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और ग्रीन एनर्जी टेक्नोलॉजीज में केंद्रित हो रहा है। 2025 में ग्लोबल ग्रीनफील्ड इन्वेस्टमेंट वैल्यू का 44% इन सेक्टर्स से आया, जो पांच साल पहले सिर्फ 16% था। यह ट्रेंड उन देशों के लिए फायदेमंद है जो इंडस्ट्रियल सब्सिडी और स्थापित इंफ्रास्ट्रक्चर ऑफर करते हैं, जबकि छोटे इकोनॉमीज़ के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है जिनके पास ऐसे कैपिटल फ्लो के लिए वित्तीय संसाधन कम हैं।
ग्लोबल ट्रेंड्स और भविष्य का अनुमान
एशिया ने जहां मजबूती दिखाई, वहीं बाकी दुनिया में रिकवरी असमान रही। यूरोप में इनफ्लो में 39% की बड़ी बढ़ोतरी देखी गई, जिससे $285 बिलियन का आंकड़ा पार हुआ और डेवलप्ड इकोनॉमीज़ के ओवरऑल परफॉर्मेंस को सहारा मिला। इसके विपरीत, अफ्रीका में FDI में 26% की गिरावट आई और यह $70 बिलियन तक सीमित रह गया। अमेरिका दुनिया भर में सबसे ज्यादा विदेशी निवेश पाने वाला देश बना हुआ है, जिसके बाद सिंगापुर, हांगकांग और चीन का नंबर आता है।
2025 के सकारात्मक आंकड़ों के बावजूद, 2026 का आउटलुक सतर्क बना हुआ है। ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ में नरमी, लगातार जियोपॉलिटिकल अस्थिरता और अप्रत्याशित ट्रेड पॉलिसीज निवेशक सेंटिमेंट को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, घटती इंटरेस्ट रेट्स प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग को कुछ सहारा दे सकती हैं, लेकिन डेवलपिंग देशों की उच्च निवेश स्तर बनाए रखने की क्षमता लगातार राष्ट्रीय नीतियों और ग्लोबल स्ट्रेटेजिक सप्लाई चेन में सफलतापूर्वक एकीकृत होने की उनकी क्षमता पर निर्भर करेगी।
