सेल्स ग्रोथ में आई नरमी का असर अलग-अलग सेक्टर्स पर भिन्न रहा। जहां सर्विसेज सेक्टर की नेट सेल्स ग्रोथ मामूली बढ़त के साथ 12.7% रही (पिछले साल 12.2% थी), वहीं मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बड़ी गिरावट देखने को मिली। मैन्युफैक्चरिंग की सेल्स ग्रोथ घटकर 5.1% रह गई, जो पिछले साल 6.8% थी। यह अंतर भारत के औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों को प्रभावित करने वाली विभिन्न आर्थिक स्थितियों को दर्शाता है।
सेल्स ग्रोथ के धीमे पड़ने और खर्चों में बढ़ोतरी के बावजूद, कंपनियों ने नेट प्रॉफिट (Net Profit) में दमदार प्रदर्शन किया। ऑपरेटिंग प्रॉफिट (Operating Profit) में धीमी 10.7% की वृद्धि दर्ज की गई (FY24 में 22.1% थी)। लेकिन, सबसे खास बात यह रही कि प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (Profit After Tax) में 22.2% का जबरदस्त इजाफा हुआ। यह उछाल मुख्य रूप से कोर सेल्स (Core Sales) से हुई कमाई के बजाय नॉन-ऑपरेटिंग इनकम (Non-Operating Income) में हुई बड़ी बढ़त और कम ब्याज लागत (Interest Costs) के कारण संभव हुआ।
इन FDI कंपनियों में निवेश करने वाले प्रमुख देशों में सिंगापुर, अमेरिका और मॉरीशस का दबदबा रहा, जिनसे आधे से ज्यादा कंपनियों ने सीधे निवेश प्राप्त किया। जापान, नीदरलैंड्स और यूनाइटेड किंगडम भी महत्वपूर्ण निवेशक रहे। इनमें से ज्यादातर कंपनियां मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज सेक्टर में काम करती हैं, खासकर इन्फॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी (ICT) पर केंद्रित सर्विस फर्मों की बड़ी संख्या है।
