भारत पर आर्थिक चुनौती
भारत अपने करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) पर कड़ी नजर रख रहा है, जो दिसंबर तिमाही में बढ़कर $13.2 अरब यानी जीडीपी का 1.3% हो गया है। पिछले साल इसी अवधि में यह $11.3 अरब था। ट्रेड डेफिसिट में बढ़ोतरी, खासकर अमेरिका को निर्यात में कमी, इस बढ़ोतरी का एक बड़ा कारण है।
हालांकि, चिंता की बात यह है कि अप्रैल-दिसंबर की अवधि के लिए CAD घटकर $30.1 अरब (जीडीपी का 1%) रहा, जो पिछले साल के $36.6 अरब (जीडीपी का 1.3%) से कम है।
मंत्री गोयल का भरोसा
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि सभी सरकारी एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं ताकि बढ़ते डेफिसिट को कंट्रोल किया जा सके और बाहरी जोखिमों को कम किया जा सके। उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक अनिश्चितताओं का इस्तेमाल आर्थिक सुधार और मजबूती के मौके के तौर पर कर रहा है।
गोयल ने माना कि वैश्विक अर्थव्यवस्था चुनौतीपूर्ण है, लेकिन उन्हें विश्वास है कि भारत इन मुश्किलों से पार पा लेगा। अनुमान है कि FY27 तक CAD जीडीपी का 2.3% तक पहुंच सकता है, जिसका मुख्य कारण कच्चे तेल की ऊंची कीमतें होंगी। इस फाइनेंशियल ईयर के लिए बैलेंस ऑफ पेमेंट्स (BoP) डेफिसिट $65 अरब रहने का अनुमान है।
ट्रेड डेफिसिट और आने वाले खतरे
CAD में बढ़ोतरी का एक कारण अमेरिका को निर्यात में आई कमी भी है। 2024 में, अमेरिका का भारत के साथ गुड्स ट्रेड डेफिसिट $46 अरब रहा। अमेरिका से भारत का आयात 4.5% बढ़कर $87 अरब हुआ, जबकि भारत को अमेरिका का निर्यात 3.4% बढ़कर $42 अरब रहा।
विशेषज्ञों की चिंता यह है कि अगर कैपिटल इनफ्लो (पूंजी का प्रवाह) बढ़ते ट्रेड और करंट अकाउंट डेफिसिट की रफ्तार से मेल नहीं खा पाता है, तो भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ सकता है। कुछ विश्लेषकों का सुझाव है कि सोने जैसे गैर-ज़रूरी आयात को कम करना और शायद फ्यूल की कीमतों में समायोजन करना कुछ संभावित रणनीतियां हो सकती हैं। भारत का कच्चे तेल पर निर्भरता ही उसके CAD का मुख्य कारण है।
आगे की राह
लंबी अवधि में भारत का CAD भले ही कम हुआ हो, लेकिन हाल की तिमाही में बढ़ोतरी और भविष्य में इसके और बढ़ने के अनुमान जोखिम पैदा करते हैं। आयातित ऊर्जा, खासकर कच्चे तेल पर निर्भरता एक बड़ी कमजोरी है। भू-राजनीतिक तनावों से बढ़ीं कच्चे तेल की ऊंची कीमतें विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव डाल सकती हैं। HSBC का अनुमान है कि FY27 में भारत का CAD जीडीपी का 2.3% तक पहुंच सकता है, जो FY26 में अनुमानित 0.9% से काफी ज्यादा है।
बढ़ता BoP डेफिसिट रुपये की स्थिरता को भी प्रभावित कर सकता है, जिससे आयात महंगा हो जाएगा और महंगाई बढ़ सकती है। हालांकि भारत के पास अच्छा-खासा विदेशी मुद्रा भंडार है, लेकिन यह देखना होगा कि बढ़ते घाटे को पूरा करने के लिए कैपिटल इनफ्लो पर्याप्त रहेगा या नहीं।
मंत्री गोयल का विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय पर जोर देना और चुनौतियों से निपटने का भरोसा, CAD को प्रबंधित करने के लिए एक सक्रिय रणनीति का संकेत देता है। संभावित नीतिगत कदमों में गैर-ज़रूरी आयात को कम करना, विदेशी पूंजी को आकर्षित करना और फ्यूल की कीमतों में समायोजन शामिल हो सकता है। सरकार का लक्ष्य वैश्विक अनिश्चितताओं को सुधारों और मजबूत सप्लाई चेन के ज़रिए अवसरों में बदलना है। मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरता बनाए रखने के लिए करंट अकाउंट डेफिसिट और कैपिटल अकाउंट फ्लो, दोनों पर लगातार ध्यान देना होगा।
