चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर V. Anantha Nageswaran ने इस पहल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह कदम भारतीय अर्थव्यवस्था को भू-राजनीतिक तनाव और बाजार की अनिश्चितताओं जैसी बाहरी चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार करेगा। यह न केवल बजट पर पड़ने वाले दबाव को कम करेगा, बल्कि महंगाई को नियंत्रित करने में भी मदद करेगा, जिससे सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले छोटे किसान, सूक्ष्म व्यवसायी और दिहाड़ी मजदूरों को राहत मिलेगी।
इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत, NITI Frontier Tech Hub द्वारा जारी 'DPI@2047 for Viksit Bharat' रोडमैप का अनुमान है कि भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) 2030 तक ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GDP) में 4% तक का अहम योगदान दे सकता है। इस पहल का एक मुख्य उद्देश्य लगातार ग्रोथ बनाए रखना और एक मजबूत, व्यापक आर्थिक लचीलापन (resilience) विकसित करना है, जो आज के अनिश्चित ग्लोबल माहौल में बेहद जरूरी है। रिपोर्ट में भारत के वर्तमान समय को 'एक पीढ़ी में एक बार मिलने वाला निर्णायक मोड़' बताया गया है।
DPI 2.0 की एक अहम सिफारिश डिसेंट्रलाइज्ड एग्जीक्यूशन (decentralized execution) है। इसके तहत राज्यों को जिला-स्तरीय कार्यक्रमों का उपयोग करके स्थानीय विकास की रणनीतियों का नेतृत्व करने के लिए सशक्त बनाया जाएगा। केंद्र सरकार और NITI Aayog सपोर्ट, फंडिंग और गाइडेंस देने का काम करेंगे। यह तरीका भारत की विशाल विविधता को पहचानता है, जिसके लिए कस्टम-मेड डिजिटल सिस्टम्स की जरूरत है ताकि मजबूत, आत्मनिर्भर क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा मिल सके, न कि एक समान रणनीति से आगे बढ़ा जाए।
रोडमैप में दो साल के कोलैबोरेटिव ट्रांसफॉर्मेशन साइकिल्स का सुझाव दिया गया है। पहला साइकिल, जो 2026-27 के लिए प्लान किया गया है, माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) और एग्रीकल्चर (कृषि) पर फोकस करेगा। इन सेक्टर्स को चुनने की वजह यह है कि इनका सीधे तौर पर लाखों लोगों की आजीविका पर असर पड़ता है। प्रमुख राज्य और यूनियन टेरिटरी इफेक्टिव मॉडल विकसित करने के लिए पायलट प्रोजेक्ट्स चलाएंगे, जिन्हें बाद में बड़े पैमाने पर कैपेसिटी-बिल्डिंग इनिशिएटिव्स के साथ बढ़ाया जाएगा।
संतुलित विकास सुनिश्चित करने के लिए, पांच प्रमुख क्षेत्रों—उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम और पूर्वोत्तर—में से कम से कम एक राज्य को चुना जाएगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि पायलट प्रोजेक्ट्स और भविष्य के रोलआउट्स विभिन्न क्षेत्रीय जरूरतों और परिस्थितियों को दर्शाते हैं। राज्यों और प्राइवेट सेक्टर के भीतर मजबूत इंस्टीट्यूशनल कैपेसिटी (institutional capacity) विकसित करना भी DPI-संचालित परिवर्तनों की सफल तैनाती के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology) और NITI Aayog के तहत एक सेंट्रल कोऑर्डिनेशन टीम, DPI, AI और विभिन्न सेक्टर्स के विशेषज्ञों वाली एक एक्सपर्ट एडवाइजरी ग्रुप और एक्सपर्ट ऑर्गेनाइजेशन्स का एक समूह स्थापित किया जाएगा। भारत 2027 में एक न्यूट्रल ग्लोबल बॉडी (neutral global body) का प्रस्ताव देकर अपने अंतर्राष्ट्रीय नेतृत्व को भी मजबूत करने का इरादा रखता है। यह बॉडी स्केलेबल DPI मॉडल्स को प्रदर्शित करेगी और सार्वजनिक लाभ के लिए DPI और AI पर वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देगी।
