मार्च में क्यों गिरी थी निर्यात की रफ्तार?
मार्च 2026 में भारतीय मर्चेंडाइज निर्यात (Merchandise Exports) में पिछले साल की तुलना में 7.4% की गिरावट आई थी, जो $38.92 बिलियन पर आ गए थे। इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी संकट रहा, जिसकी वजह से इस क्षेत्र के साथ भारत का व्यापार 50% से भी ज्यादा घट गया। निर्यात 57.95% और आयात 51.64% तक गिर गए।
महंगा शिपिंग और लंबी दूरी बनी मुसीबत
पश्चिम एशिया में तनाव के कारण हॉरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से माल की आवाजाही बाधित हुई। इसके चलते जहाजों को केप ऑफ गुड होप (Cape of Good Hope) जैसे लंबे और खर्चीले रास्तों से गुजरना पड़ रहा है। इन लंबे रास्तों की वजह से माल पहुंचने में 12-15 दिन ज्यादा लग रहे हैं और माल भाड़े (Freight Charges) में भारी बढ़ोतरी हुई है। कंटेनर पर $4,000 तक का इमरजेंसी सरचार्ज (Emergency Surcharge) भी देना पड़ रहा है, जिससे एक्सपोर्टर्स का मुनाफा कम हो रहा है। वॉर रिस्क इंश्योरेंस प्रीमियम (War Risk Insurance Premium) भी काफी बढ़ गया है।
पूरे फाइनेंशियल ईयर के लिए अच्छी खबर
इन चुनौतियों के बावजूद, पूरे फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में भारतीय निर्यात ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है। कुल निर्यात $860 बिलियन तक पहुंच गया, जो पिछले साल से 4.22% ज्यादा है। वहीं, थाइलैंड जैसे देशों के निर्यात में मार्च में 18.7% की शानदार ग्रोथ देखी गई, जबकि चीन ने भारतीय मांग के दम पर केमिकल निर्यात बढ़ाया।
ट्रेड डील्स और FDI से मजबूती
भारत सरकार विदेशी निवेश (Foreign Direct Investment - FDI) को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए FDI $90 बिलियन के पार जाने की उम्मीद है। इसके अलावा, भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (India-US Bilateral Trade Agreement - BTA) का पहला चरण पूरा होने वाला है, जिससे लेबर-इंटेंसिव और एग्री-बेस्ड सेक्टर को फायदा होने की उम्मीद है। भारत 12 फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTAs) पर भी बातचीत कर रहा है।
बढ़ती महंगाई और आर्थिक दबाव
पश्चिम एशिया संकट का असर कच्चे माल, एनर्जी और फर्टिलाइजर की सप्लाई पर भी पड़ रहा है, जिससे लागतें बढ़ रही हैं। मार्च में होलसेल इन्फ्लेशन (Wholesale Inflation) बढ़कर 3.88% तक पहुंच गया। वित्त मंत्रालय ने भी मिडिल ईस्ट संकट से बढ़ती आर्थिक जोखिमों की चेतावनी दी है। अगर एनर्जी की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो मार्च में $2.44 बिलियन तक सिमटा व्यापार घाटा (Trade Deficit) फिर से बढ़ सकता है। HSBC जैसे एनालिस्ट्स का मानना है कि ऊंची एनर्जी कीमतों से यह घाटा टल नहीं सकता।
एक्सपोर्टर्स के लिए आगे क्या?
पश्चिम एशिया के महत्वपूर्ण बाजारों के साथ व्यापार में आई 50% से ज्यादा की गिरावट (2025 में इन देशों ने $11.8 बिलियन का भारतीय एग्री-एक्सपोर्ट खरीदा था) भारत के निर्यात क्षेत्र की बड़ी कमजोरी को दर्शाती है। खासकर खराब होने वाले सामान (Perishable Goods) के एक्सपोर्टर्स को ज्यादा जोखिम का सामना करना पड़ रहा है। सर्विसेज एक्सपोर्ट (Services Exports) भले ही मजबूत हैं, लेकिन मर्चेंडाइज ट्रेड पर दबाव बना हुआ है। नई ट्रेड डील्स और समझौते भारतीय एक्सपोर्टर्स की कॉम्पिटिटिवनेस को बढ़ाने में मदद करेंगे, लेकिन पश्चिम एशिया संकट से जुड़े भू-राजनीतिक अनिश्चितता और बढ़ती लागतें आने वाले समय में निर्यात के लिए एक बड़ी चुनौती रहेंगी।
