भारतीय एक्सपोर्ट्स पर मंडराया खतरा: US ट्रेड डील अटकी, पश्चिम एशिया के संकट से बढ़ी मुश्किलें

ECONOMY
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AuthorMehul Desai|Published at:
भारतीय एक्सपोर्ट्स पर मंडराया खतरा: US ट्रेड डील अटकी, पश्चिम एशिया के संकट से बढ़ी मुश्किलें
Overview

भारत अपने एक्सपोर्ट (निर्यात) को तेजी से बढ़ाने की तैयारी में था, लेकिन अब राह में कई बड़ी बाधाएं आ गई हैं। खासकर अमेरिका के साथ एक अहम ट्रेड डील का रुक जाना और पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर रहा है।

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पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) और अमेरिका के साथ एक महत्वपूर्ण ट्रेड डील का लटका रहना, भारत के एक्सपोर्ट (निर्यात) की महत्वाकांक्षी योजनाओं पर पानी फेर सकता है। इन बाहरी चुनौतियों के चलते भारतीय निर्यातकों की लागत बढ़ रही है और सप्लाई चेन (Supply Chain) की स्थिरता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

सरकार का लक्ष्य वित्त वर्ष 2027 तक एक्सपोर्ट को $950 बिलियन तक पहुंचाना है, जिसके लिए कई देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTAs) पर जोर दिया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री पियूष गोयल के अनुसार, ओमान और यूनाइटेड किंगडम (UK) के साथ आने वाले एग्रीमेंट्स से अच्छी उम्मीदें हैं। भारत-EFTA ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (TEPA) पहले से लागू है, और न्यूजीलैंड के साथ भी डील फाइनल होने वाली है, जिसके 24 अप्रैल तक साइन होने की उम्मीद है।

लेकिन, सबसे बड़ा पेच अमेरिका के साथ ट्रेड डील में फंसा है। डील फाइनल हो चुकी है, पर इसे लागू करने में मुश्किलें आ रही हैं। वजह यह है कि कुछ अदालती फैसलों के कारण भारत की 'कंपीटिटिव एज' (Competitive Edge) यानी बाजार में प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता कमजोर हो गई है, जिसे फिर से हासिल करने की जरूरत है। अगर यह डील कारगर साबित हुई, तो अमेरिकी टैरिफ (Tariffs) 50% से घटकर 18% हो सकते हैं, जो वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों के मुकाबले भारत को बेहतर स्थिति में ला सकता है। हालांकि, कुछ जानकारों का मानना है कि इस डील से मिलने वाले फायदे उम्मीद से कम हो सकते हैं और यह डील मुख्य रूप से 'मॉडस्ट टैरिफ रिलीफ' (Modest Tariff Relief) ही दे पाएगी।

दूसरी तरफ, पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों और व्यापार मार्गों को बुरी तरह प्रभावित किया है। हॉरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे प्रमुख शिपिंग मार्गों में आई रुकावटों के चलते माल ढुलाई (Freight) और बीमा (Insurance) की लागत आसमान छू रही है। इससे एलपीजी (LPG) की सप्लाई में दिक्कतें आ रही हैं और ऊर्जा की कीमतें भी ऊंची बनी रहने की आशंका है। इस वजह से वर्ल्ड बैंक ने भारत के वित्त वर्ष 2027 के लिए GDP ग्रोथ अनुमान को घटाकर 6.6% कर दिया है, जबकि RBI ने वित्त वर्ष 2027 के लिए GDP ग्रोथ को 6.9% रहने का अनुमान लगाया है।

इसके अलावा, भारत की अपनी निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता (Export Competitiveness) पर भी ध्यान देने की जरूरत है। भले ही 2024 में मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट $442.6 बिलियन और वित्त वर्ष 2025 में कुल एक्सपोर्ट $825.3 बिलियन तक पहुंच गए हों, लेकिन वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी अभी भी कम है। लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस इंडेक्स (LPI) में भी भारत चीन और वियतनाम जैसे देशों से पीछे है। साथ ही, प्रमुख व्यापारिक देशों में धीमी आर्थिक वृद्धि (Economic Growth) का मतलब है कि नए बाजारों से मिलने वाले फायदे भी कम हो सकते हैं।

सरकार भले ही FTAs को एक्सपोर्ट ग्रोथ का मुख्य इंजन बता रही है, लेकिन असली चिंता 'कंपीटिटिव एज' के अनिश्चित होने और पश्चिम एशिया संकट से जुड़ी है। Crisil जैसी एजेंसियां FTAs के दम पर 13% की मजबूत ग्रोथ का अनुमान लगा रही हैं, लेकिन भू-राजनीतिक जोखिम और अमेरिकी डील का भविष्य पर अनिश्चितता के बादल छाए हुए हैं। निर्यात के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को हासिल करने के लिए इन बाधाओं को दूर करना अहम होगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.