भारत इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग के लिए 'मल्टीपल ऑफ 10' लेवी पर कर रहा विचार

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
भारत इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग के लिए 'मल्टीपल ऑफ 10' लेवी पर कर रहा विचार
Overview

एक नए प्रस्ताव में इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े सामानों और सेवाओं पर 'मल्टीपल ऑफ 10' (10 गुना) शुल्क लगाने का सुझाव दिया गया है, जिससे सालाना लगभग ₹20,000 करोड़ जुटाए जा सकते हैं। इस विचार का उद्देश्य उपभोक्ता व्यवहार पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाले बिना आवश्यक सेवाओं जैसे यात्रा और दूरसंचार की कीमत की बेलोच मांग (price inelastic demand) का लाभ उठाकर बुनियादी ढांचे के विकास को वित्तपोषित करना है।

बुनियादी ढांचा वित्तपोषण के लिए नई राजस्व रणनीति

भारत में बुनियादी ढांचे की फंडिंग को बढ़ावा देने के लिए एक नई कराधान प्रणाली का एक महत्वपूर्ण वित्तीय प्रस्ताव सामने आया है। यह अवधारणा 'मल्टीपल ऑफ 10' सिद्धांत पर आधारित है, जहां बुनियादी ढांचा क्षेत्र के लिए आवश्यक विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं पर एक विशेष शुल्क, जिसे कर, उपकर या अधिभार कहा जाता है, लगाया जाएगा। इस दृष्टिकोण का उद्देश्य मूल्य की बेलोच मांग (price inelastic demand) का लाभ उठाकर राजस्व उत्पन्न करना है, जिससे उपभोक्ता व्यय पर न्यूनतम प्रभाव पड़े [cite: A, B]। प्रस्ताव के अनुसार, इससे सालाना लगभग ₹20,000 करोड़ राजस्व उत्पन्न होने की उम्मीद है, जबकि मुद्रास्फीति संबंधी चिंताओं को कम रखा जाएगा [cite: A, B]। यह सरकार के बुनियादी ढांचे को बढ़ाने के चल रहे प्रयासों के अनुरूप है, जो आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण चालक है।

भारत की बुनियादी ढांचा वित्तपोषण की खाई को पाटना

भारत को अपने महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा विकास लक्ष्यों को पूरा करने में एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें खरबों रुपये के निवेश की आवश्यकता का अनुमान है। सरकार ने बुनियादी ढांचा खर्च को प्राथमिकता दी है, हाल के वर्षों में पूंजीगत व्यय में उल्लेखनीय वृद्धि की है, फिर भी एक महत्वपूर्ण वित्तपोषण अंतर बना हुआ है, जिसके लिए पारंपरिक कर राजस्व से परे अभिनव वित्तपोषण समाधानों की आवश्यकता है। सरकार पहले से ही विशिष्ट उद्देश्यों, जिसमें सड़कों जैसे बुनियादी ढांचे का विकास शामिल है, को वित्तपोषित करने के लिए उपकर और अधिभार जैसे मौजूदा तंत्रों का उपयोग करती है। प्रस्तावित 'मल्टीपल ऑफ 10' लेवी को इस रणनीति का विस्तार माना जा सकता है, जिसका लक्ष्य अंतिम उपयोगकर्ताओं पर अनुचित बोझ डाले बिना या उपभोग पैटर्न को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित किए बिना महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए एक समर्पित राजस्व धारा बनाना है [cite: A, B]।

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