भारत का बड़ा वार! MERCOSUR और SACU से बढ़ाएगा ट्रेड, ग्लोबल संरक्षणवाद को देगा पटखनी

ECONOMY
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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
भारत का बड़ा वार! MERCOSUR और SACU से बढ़ाएगा ट्रेड, ग्लोबल संरक्षणवाद को देगा पटखनी
Overview

वैश्विक संरक्षणवाद (Global Protectionism) के बढ़ते खतरे के बीच, भारत अपने ट्रेड समझौतों का विस्तार कर रहा है। देश MERCOSUR (मर्कोसुर) ब्लॉक और सदर्न अफ्रीकन कस्टम्स यूनियन (SACU) के साथ बातचीत को तेज कर रहा है, ताकि नए एक्सपोर्ट बाज़ार खोजे जा सकें और सप्लाई चेन को मजबूत किया जा सके।

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भारत की नई ट्रेड रणनीति: MERCOSUR और SACU पर फोकस

दुनिया भर में बढ़ते ट्रेड प्रोटेक्शनिज़्म (Trade Protectionism) के माहौल में, भारत अपनी विदेश व्यापार रणनीति में बड़ा बदलाव ला रहा है। भारत ने MERCOSUR (मर्कोसुर) के साथ अपने मौजूदा प्रिफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट (PTA) को और मजबूत करने और सदर्न अफ्रीकन कस्टम्स यूनियन (SACU) के साथ एक नए ट्रेड समझौते की बातचीत फिर से शुरू करने का फैसला किया है। इस कदम का मकसद उन जोखिमों से निपटना है जो वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता से पैदा हो रहे हैं, और साथ ही एक्सपोर्ट के लिए नए अवसर तलाशना है।

MERCOSUR और SACU के साथ गहरे होते रिश्ते

भारत, MERCOSUR के साथ अपने PTA को काफी विस्तार देने की तैयारी में है। अभी यह समझौता 450 टैरिफ लाइन्स (Tariff Lines) को कवर करता है, लेकिन इसे बढ़ाकर 4,000 टैरिफ लाइन्स तक ले जाने का प्रस्ताव है। MERCOSUR, जिसमें ब्राजील, अर्जेंटीना, पैराग्वे, उरुग्वे और हाल ही में शामिल हुए बोलीविया जैसे देश हैं, एक बड़ा आर्थिक समूह है जिसका संयुक्त जीडीपी (GDP) लगभग $2.94 ट्रिलियन है। फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में MERCOSUR के साथ भारत का कुल व्यापार $17.48 बिलियन रहा, जिसमें $8.12 बिलियन का एक्सपोर्ट शामिल है।

इसके अलावा, भारत सदर्न अफ्रीकन कस्टम्स यूनियन (SACU) के साथ भी ट्रेड पैक्ट पर काम कर रहा है। SACU में दक्षिण अफ्रीका, बोत्सवाना, नामीबिया, लेसोथो और एस्वातिनी जैसे देश शामिल हैं। 2020 में SACU के साथ कुल व्यापार $10.94 बिलियन था। 2002 में शुरू हुई SACU के साथ PTA की बातचीत लंबे समय से अटकी हुई थी, लेकिन अब 2020 और 2025 में हुई चर्चाओं के बाद इसमें तेजी आई है।

कम प्रतिस्पर्धा वाले देशों से बड़ा व्यापार

सूत्रों के मुताबिक, भारत MERCOSUR और SACU जैसे देशों के साथ व्यापार बढ़ाने में कम जोखिम देखता है। इन देशों के पास उत्पादों की उतनी विविध रेंज नहीं है और उनके एक्सपोर्ट वॉल्यूम भी कम हैं, जिससे भारत के घरेलू उद्योगों पर ज्यादा असर पड़ने की संभावना कम है। यह यूरोपीय यूनियन (EU) जैसे विकसित देशों के साथ होने वाली जटिल वार्ताओं से अलग है। भारत की यह रणनीति उन बाज़ारों से होने वाले संभावित नुकसान से बचने और साथ ही अपनी इंडस्ट्री को बढ़ाना है।

चुनौतियां और भविष्य की राह

हालांकि, इन समझौतों को आगे बढ़ाने में कुछ बड़ी चुनौतियां भी हैं। MERCOSUR के सदस्य देशों, खासकर ब्राजील और अर्जेंटीना के बीच आंतरिक मतभेद हैं, जो कई बार संरक्षणवादी नीतियों को जन्म देते हैं। उरुग्वे जैसे देशों का चीन के साथ अलग से ट्रेड डील करने का प्रयास भी ब्लॉक की एकता को कमजोर कर सकता है। इसके अलावा, MERCOSUR के 'कम उत्पाद रेंज' वाले तर्क को कम करके नहीं आंका जा सकता, खासकर ब्राजील जैसे बड़े कृषि निर्यातक देश को देखते हुए, जो MERCOSUR की जीडीपी का करीब 75% है। भारत का SACU के साथ व्यापार में घाटा भी एक चिंता का विषय है। भौगोलिक दूरी, लॉजिस्टिक्स की दिक्कतें और SACU के जटिल कॉमन एक्सटर्नल टैरिफ (Common External Tariff) भी इन समझौतों को सफल बनाने में बड़ी बाधाएं हैं।

भारत अब ग्लोबल साउथ (Global South) में अपनी उपस्थिति बढ़ाने पर ज़ोर दे रहा है। यह रणनीति आर्थिक स्थिरता बढ़ाने और विकासशील देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है। MERCOSUR PTA में टैरिफ लाइन्स को दोगुना करने का प्रस्ताव महत्वाकांक्षी है, और SACU के साथ बातचीत अफ्रीकी बाजारों को और गहराई से जोड़ने का प्रयास दर्शाती है। इन पहलों से भारत वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं का मुकाबला कर सकेगा और अपनी औद्योगिक ताकत का लाभ उठा सकेगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.