भारतीय इक्विटी फंड्स के लिए अच्छी खबर है! महीनों की भारी बिकवाली के बाद, इन फंड्स में **$17 मिलियन** का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया है। हालांकि एक्टिव फंड्स से पैसा निकल रहा है, पर एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) में निवेशकों की दिलचस्पी लौट रही है।
Detailed Coverage
महीनों की बिकवाली के बाद आई राहत
लंबे समय से चले आ रहे भारी कैपिटल आउटफ्लो (Capital Outflow) के दौर के बाद, भारतीय इक्विटी फंड्स ने आखिरकार राहत की सांस ली है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, इन फंड्स में $17 मिलियन का शुद्ध इनफ्लो (Net Inflow) देखा गया है। यह फरवरी 2026 से अब तक हुए $8.6 बिलियन के भारी रिडेम्पशन (Redemptions) के बाद एक बड़ा बदलाव है, जो भारतीय शेयर्स पर पड़ रहे दबाव को कम कर सकता है।
ETF में दम, एक्टिव फंड्स में अभी भी दबाव
यह रिकवरी सभी तरह के फंड्स के लिए एक समान नहीं है। $118 मिलियन का इनफ्लो इंडिया-फोकस्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) में आया, जिसने इस स्थिरता को लाने में मुख्य भूमिका निभाई। वहीं, एक्टिव लॉन्ग-ओनली फंड्स, जहां फंड मैनेजर सीधे स्टॉक्स चुनते हैं, वे अभी भी दबाव में हैं और $101 मिलियन का नेट आउटफ्लो झेल रहे हैं। इससे पता चलता है कि जहां पैसिव इन्वेस्टर्स (Passive Investors) मार्केट में लौट रहे हैं, वहीं एक्टिव फंड मैनेजर्स अभी भी मौजूदा वैल्यूएशन (Valuation) को लेकर निवेशकों के संशय को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं।
इमर्जिंग मार्केट्स (EM) में निवेश का बदलता मिजाज
भारत के अलावा, ब्रॉडर इमर्जिंग मार्केट्स (EM) कैटेगरी भी एक स्ट्रैटेजिक रीएलोकेशन (Strategic Reallocation) से फायदा उठा रही है। EM इंडेक्स के अपने शिखर से 10% की गिरावट के बाद, ग्लोबल इमर्जिंग मार्केट फंड्स ने इस हफ्ते $1.9 बिलियन का इनफ्लो आकर्षित किया है। यह पिछले हफ्ते $1.8 बिलियन के इनफ्लो के बाद हुआ है, जो संकेत देता है कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स हालिया गिरावट का फायदा उठाकर कम दामों पर पोजीशन बना रहे हैं।
सेक्टर प्रेफरेंस और जोखिम
कैपिटल फ्लो (Capital Flow) यह दिखाता है कि निवेशक अपने पोर्टफोलियो को कैसे पोजीशन कर रहे हैं। टेक्नोलॉजी फंड्स पसंदीदा बने हुए हैं, जहां लगातार इनफ्लो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से सीधे जुड़ी कंपनियों के प्रति वरीयता को दर्शाता है। इसके विपरीत, इंडस्ट्रियल फंड्स मई 2025 के बाद पहली बार निगेटिव रोलिंग फोर-वीक फ्लो (Negative Rolling Four-Week Flows) का सामना कर रहे हैं, जो ब्रॉडर इंडस्ट्रियल प्ले से दूरी का संकेत है।
एक और ट्रेंड जो ध्यान देने योग्य है, वह है कंजम्पशन-लिंक्ड फंड्स (Consumption-linked Funds) से लगातार पैसा निकलना, जो नवंबर 2025 से जारी है। भले ही निकासी की रफ्तार धीमी हुई है, यह घरेलू खपत की मांग को लेकर सतर्कता को दर्शाता है। वहीं, गोल्ड फंड्स ने अप्रैल के बाद सबसे बड़ा साप्ताहिक इनफ्लो दर्ज किया है, जो अक्सर यह संकेत देता है कि कुछ निवेशक मार्केट की अस्थिरता के बीच सुरक्षित एसेट्स (Safer Assets) की तलाश कर रहे हैं।
आने वाले हफ्तों में यह देखना अहम होगा कि क्या भारत-केंद्रित फंड्स में $17 मिलियन का यह नेट इनफ्लो बना रहता है या यह आउटफ्लो साइकिल में एक अस्थायी ठहराव साबित होता है। निवेशक इस बात पर ध्यान देंगे कि क्या एक्टिव फंड्स अपनी आउटफ्लो की लकीर को पलट सकते हैं और क्या ग्लोबल इमर्जिंग मार्केट इंडेक्स के नए वैल्यूएशन लेवल के एडजस्ट होने पर भारतीय ETFs के लिए मांग बनी रहती है।
