चीनी कंपनियों को राहत: 'बेनिफिशियल ओनरशिप' पर फोकस
वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) ने विदेशी निवेश के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। पहले जहां भारत की ज़मीनी सीमा वाले देशों (जैसे चीन) से आने वाले निवेश के लिए सरकारी मंजूरी ज़रूरी थी, अब नियमों को 'बेनिफिशियल ओनरशिप' (beneficial ownership) यानी असली मालिक कौन है, इस पर केंद्रित किया गया है। अब वे विदेशी कंपनियाँ जो भारत में निवेश करना चाहती हैं, और जिनमें 10% तक की हिस्सेदारी चीनी या हांगकांग के निवेशकों की है, वे 'ऑटोमैटिक रूट' के ज़रिए निवेश कर सकेंगी।
यह नियम 1 मई से प्रभावी हो गया है। इससे पहले, 2020 के प्रेस नोट 3 के तहत ऐसे निवेश के लिए सरकारी अप्रूवल की ज़रूरत पड़ती थी। सरकार का मानना है कि यह 'बेनिफिशियल ओनरशिप' वाला तरीका ज़्यादा लक्षित है और हर अप्रत्यक्ष चीनी हिस्सेदारी को जोखिम नहीं माना जाएगा। आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2000 से दिसंबर 2025 तक भारत में आए कुल FDI इक्विटी इनफ्लो में चीन की हिस्सेदारी केवल 0.32% (लगभग $2.51 बिलियन) रही है। यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं को दूर करते हुए संभावित निवेश को आकर्षित करने के लिए उठाया गया है।
इंश्योरेंस सेक्टर में 100% FDI: विकास की नई राह
इंश्योरेंस सेक्टर के लिए भी एक क्रांतिकारी फैसला लिया गया है। अब इस सेक्टर में 100% विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) 'ऑटोमैटिक रूट' से संभव होगा। पहले यह सीमा 26%, 49% या 74% तक सीमित थी। भारत में इंश्योरेंस का बाजार सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के मुकाबले करीब 3.7% है, जो वैश्विक औसत (7%) से काफी कम है। इससे पता चलता है कि यहाँ विकास की भारी गुंजाइश है।
इस फैसले से उम्मीद है कि इंश्योरेंस सेक्टर में बड़े पैमाने पर विदेशी पूंजी आएगी, जिससे नई टेक्नोलॉजी और ग्लोबल विशेषज्ञता का लाभ मिलेगा। साथ ही, प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और ग्राहकों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी। फॉरेन री-इंश्योरर्स (foreign reinsurers) के लिए नेट-ओन्ड फंड (net-owned fund) की ज़रूरतें भी कम की गई हैं। हालांकि, लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) के लिए 20% की विदेशी निवेश सीमा पहले की तरह ही बनी रहेगी।
भू-राजनीतिक और आर्थिक समीकरण
यह नीतिगत समायोजन ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य बदल रहा है। चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, लेकिन निवेश और व्यापारिक संबंध वैश्विक घटनाओं से प्रभावित रहे हैं। 'बेनिफिशियल ओनरशिप' पर जोर देना यह दर्शाता है कि भारत अब सीधी हिस्सेदारी और अप्रत्यक्ष मालिकाना हक के बीच अंतर कर रहा है, और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि स्पष्ट नीतियों और भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि के साथ, यह देश विदेशी निवेशकों के लिए और अधिक आकर्षक बनेगा।
जोखिम और भविष्य की राह
नियमों में ढील के बावजूद कुछ जोखिम बने हुए हैं। सीधे चीन या हांगकांग में पंजीकृत निवेशकों को 'ऑटोमैटिक रूट' से बाहर रखा गया है, ताकि सुरक्षा बनी रहे। यह सुनिश्चित करने के लिए कि 'बेनिफिशियल ओनर' की परिभाषा का पालन हो, कड़ी निगरानी रखी जाएगी। कुछ विश्लेषक इसे चीन से बड़े पूंजी प्रवाह में बड़ी वृद्धि के बजाय नियामक स्पष्टता के तौर पर देख रहे हैं, लेकिन विदेशी निवेश, खासकर रणनीतिक प्रतिद्वंद्वियों से, को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंताएँ बनी रहेंगी।
इंश्योरेंस में बढ़ा हुआ FDI, प्रतिस्पर्धा को तेज करेगा, जिससे बाजार में समेकन (consolidation) और दक्षता में सुधार हो सकता है। ये सुधार 'सभी के लिए बीमा 2047' (Insurance for All by 2047) के राष्ट्रीय लक्ष्य का समर्थन करते हैं।
