जानिए क्या हैं FDI के नए नियम?
राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, भारत सरकार ने FDI पॉलिसी में अहम बदलावों को मंजूरी दी है। साल 2020 में लागू किए गए प्रेस नोट 3 (Press Note 3) के बाद, जो विदेशी निवेश को लेकर कड़े नियम लाए गए थे, अब उनमें ढील दी गई है। खास तौर पर, जिन देशों की भारत के साथ ज़मीनी सीमा है, उनके लिए निवेश की प्रक्रिया सरल की गई है। अब अगर इन देशों के निवेशकों की 10% या उससे कम हिस्सेदारी (beneficial ownership) है और वे कंपनी का सीधा कंट्रोल (direct control) नहीं रखते, तो उन्हें सरकारी मंज़ूरी (government approval) की ज़रूरत नहीं होगी, वे ऑटोमैटिक रूट से निवेश कर सकते हैं। वहीं, यदि हिस्सेदारी 10% से ज़्यादा है या सीधे उन देशों (जैसे चीन या हांगकांग) में कंपनी रजिस्टर्ड है, तो सरकारी मंज़ूरी ज़रूरी होगी। वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) जल्द ही फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के तहत इसकी औपचारिक नोटिफिकेशन जारी करेगा।
मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगी रफ़्तार
डायरेक्टोरेट जनरल फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT) कुछ खास मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए 60 दिनों के अंदर अप्रूवल (approval) देने की प्रक्रिया को तेज़ करने पर भी काम कर रहा है। इसमें कैपिटल गुड्स (capital goods), इलेक्ट्रॉनिक कैपिटल गुड्स, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, पॉलीसिलिकॉन और इंगट-वेफर जैसे अहम क्षेत्र शामिल हैं। इस कदम का मकसद घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना और भारत को ग्लोबल वैल्यू चेन (global value chains) में मज़बूत स्थिति दिलाना है।
FDI इनफ्लो में लगातार तेज़ी
इन नीतिगत बदलावों के बीच, भारत में डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) का प्रवाह लगातार बना हुआ है। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के अप्रैल से फरवरी के बीच, री-इन्वेस्टेड अर्निंग्स (reinvested earnings) सहित कुल FDI $88.29 बिलियन तक पहुंच गया, जो पिछले साल की समान अवधि के $80.61 बिलियन से ज़्यादा है। वहीं, नेट FDI इस अवधि में बढ़कर $6.26 बिलियन हो गया, जो 2024-25 में $959 मिलियन था। DPIIT का अनुमान है कि FY26 के अंत तक कुल FDI $90 बिलियन तक पहुंच सकता है। इन्वेस्ट इंडिया (Invest India), जो राष्ट्रीय निवेश संवर्धन एजेंसी है, ने 2025-26 में $6.1 बिलियन से ज़्यादा के 60 प्रोजेक्ट्स को संभव बनाया है, जिससे करीब 31,000 नौकरियां पैदा होने का अनुमान है।
जोखिम और रेगुलेटरी चुनौतियाँ
विदेशों से पूंजी आकर्षित करने के प्रयासों के बावजूद, भारत को अभी भी रेगुलेटरी (regulatory) और भू-राजनीतिक जोखिमों (geopolitical risks) का सामना करना पड़ता है। जटिल कानूनी और टैक्स व्यवस्था, साथ ही कभी-कभी प्रशासनिक देरी, निवेशकों के लिए मुश्किलें पैदा कर सकती हैं। FEMA नोटिफिकेशन में हो रही देरी इस बात का संकेत है कि प्रशासनिक स्तर पर अभी और तालमेल बिठाने की ज़रूरत है। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव भी बाज़ार में अस्थिरता ला सकते हैं। यही कारण है कि 2020 में प्रेस नोट 3 जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कदम भारत की FDI रणनीति का अहम हिस्सा बने हुए हैं।
निवेश का भविष्य
प्रक्रियाओं को सरल बनाने और निवेश आकर्षित करने की भारत की प्रतिबद्धता, साथ ही चल रहे सुधार, FDI इनफ्लो के लिए एक सकारात्मक आउटलुक (outlook) दिखाते हैं। पड़ोसी देशों के लिए निवेश नियमों में छूट और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए तेज़ अप्रूवल प्रक्रिया, भारत की ग्लोबल वैल्यू चेन में भूमिका को और मज़बूत करने की उम्मीद है। इन पहलों का सफल कार्यान्वयन इस निवेश गति को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
