भारत और यूरोपीय संघ (EU) दिसंबर 2026 तक एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार हैं। यह समझौता 93% भारतीय एक्सपोर्ट को ड्यूटी-फ्री एक्सेस देगा, लेकिन साथ ही यूरोपीय सामानों के लिए भारतीय बाज़ार भी खोलेगा।
क्या है खास?
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच एक बड़ा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) होने वाला है। उम्मीद है कि दिसंबर 2026 तक इस पर हस्ताक्षर हो जाएंगे और अगले साल फरवरी-मार्च तक इसे लागू भी कर दिया जाएगा। कॉमर्स और इंडस्ट्री मिनिस्टर पीयूष गोयल ने इस बात की पुष्टि की है। इस डील के तहत, भारत से होने वाले करीब 93% एक्सपोर्ट को यूरोपीय देशों में ड्यूटी-फ्री एंट्री मिलेगी।
कौन से सेक्टर होंगे मालामाल?
इस समझौते से भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए नए रास्ते खुलेंगे। टेक्सटाइल, फुटवियर, फार्मा, जेम्स और ज्वैलरी, और एग्रीकल्चर जैसे सेक्टर्स को बड़ा फायदा हो सकता है। इंपोर्ट ड्यूटी हटने से भारतीय प्रोडक्ट्स यूरोप में सस्ते होंगे, जिससे इन सेक्टर्स की कंपनियों को फायदा हो सकता है और एक्सपोर्ट वॉल्यूम बढ़ सकता है।
बढ़ेगी डोमेस्टिक मार्केट में कॉम्पिटिशन
जहां एक तरफ भारतीय एक्सपोर्टर्स को फायदा होगा, वहीं दूसरी तरफ यूरोपीय सामानों के लिए भारत का बाज़ार भी खुलेगा। इससे ऑटोमोबाइल, मशीनरी और स्पेशियलिटी केमिकल्स जैसे सेक्टर्स में डोमेस्टिक कंपनियों को तगड़ी कॉम्पिटिशन का सामना करना पड़ सकता है। यूरोप से लग्जरी कारें और महंगी वाइन जैसी चीजें सस्ती हो सकती हैं, जिससे भारतीय मैन्युफैक्चरर्स के मार्जिन पर दबाव आ सकता है।
सस्टेनेबिलिटी का पेंच
एक बड़ा फैक्टर है यूरोप का कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM)। इसके तहत स्टील, एल्युमीनियम और सीमेंट जैसे हाई-एमिशन वाले सामानों पर इंपोर्ट ड्यूटी लगेगी। इसका मतलब है कि भारतीय एक्सपोर्टर्स को सख्त एनवायरनमेंटल स्टैंडर्ड्स पूरे करने होंगे, जिसमें अतिरिक्त खर्च आ सकता है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
निवेशकों को इस डील की फाइनल लिस्ट देखनी चाहिए कि किस सेक्टर में कब और कितनी ड्यूटी कम होगी। साथ ही, ऑटो और केमिकल जैसे सेक्टर्स की कंपनियां यूरोपीय कॉम्पिटिशन से कैसे निपटती हैं, इस पर भी नज़र रखनी होगी। यह भी देखना ज़रूरी होगा कि भारतीय एक्सपोर्टर्स EU के सस्टेनेबिलिटी नॉर्म्स को पूरा कर पाते हैं या नहीं।
