ऑटोमोबाइल सेक्टर में आएगा बूम
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर को नई दिशा देगा और ग्लोबल वैल्यू चेन में इसकी स्थिति मजबूत करेगा। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, अगले साल से लागू होने वाले इस समझौते में ऑटोमोबाइल जैसे संवेदनशील सेक्टरों के लिए चरणबद्ध तरीके से ड्यूटी घटाई जाएगी। साथ ही, कोटे के आधार पर रियायतें भी मिलेंगी, जिससे घरेलू ऑटो इंडस्ट्री की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
निवेश और मैन्युफैक्चरिंग में आएगी तेजी
एडिशनल सेक्रेटरी (Additional Secretary), (Darpan Jain) ने बताया कि यह डील भारत में विदेशी निवेश को आकर्षित करने, ऑटोमोबाइल प्रोडक्शन को बढ़ावा देने और तीसरे देशों में निर्यात बढ़ाने के लिए डिज़ाइन की गई है। इस कदम से भारत EU के मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम में एक अहम खिलाड़ी के तौर पर उभरेगा। यूरोपीय कारों पर कस्टम ड्यूटी 110% से घटाकर 10% की जाएगी, जो सालाना 2,50,000 गाड़ियों तक सीमित होगी। इससे भारतीय ग्राहकों के लिए यूरोपीय कारें सस्ती होंगी और उनकी उपलब्धता बढ़ेगी।
सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट से आसान होगी आवाजाही
व्यापार के अलावा, यह समझौता EU सदस्य देशों के साथ सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट (SSAs) को भी कवर करता है। भारत के पहले से ही 14 EU देशों के साथ ऐसे समझौते हैं, और 7 और देशों के साथ बातचीत जारी है। छह और देशों के साथ समझौते करने की योजना है। ये SSAs EU में अस्थायी रूप से काम करने वाले भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए बहुत ज़रूरी हैं। इनसे दोहरी सोशल सिक्योरिटी पेमेंट से बचा जा सकेगा और वे आसानी से लाभ का दावा कर पाएंगे। इससे श्रमिकों की आवाजाही आसान होगी और EU में काम कर रहे बड़ी संख्या में भारतीय समुदाय को मदद मिलेगी।
एक्सपोर्टर्स को मिलेगा फायदा
EU के पास 40 से ज़्यादा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट हैं जो 70 देशों को कवर करते हैं। इस नए समझौते से भारतीय एक्सपोर्टर्स को इस बड़े नेटवर्क का फायदा मिलेगा। EU भारत के कुल मर्चेंडाइज ट्रेड का लगभग 12% है। FICCI जैसे उद्योग संगठनों का कहना है कि इन समझौतों को एक्सपोर्टर्स, खासकर छोटे और मध्यम आकार के उद्यमों (MSMEs) और सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए ठोस फायदों में बदलना ज़रूरी है। यह व्यापक रणनीति नए अवसर खोलेगी और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में भारत की स्थिति को मजबूत करेगी।
