FTA का डबल स्टैंडर्ड: फायदे की उम्मीद, पर कब?
Mercedes-Benz India के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO, संतोष अय्यर, का मानना है कि Free Trade Agreements (FTAs) भारत को ग्लोबल इकोनॉमी में आगे बढ़ाने और डोमेस्टिक इंडस्ट्रीज को दुनिया भर में कॉम्पिटिटिव बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे। उनका कहना है कि FTAs सिर्फ ड्यूटी में कमी से कहीं बढ़कर हैं, ये इंटरनेशनल इकोनॉमी के साथ गहरे रिश्ते बनाते हैं। लेकिन, India-European Union (EU) FTA, जो जनवरी 2026 में फाइनल हुआ, के मामले में यह उम्मीद तुरंत पूरी नहीं होगी। इस एग्रीमेंट के तहत यूरोपीय कारों पर मौजूदा 70% से 110% तक के टैरिफ को धीरे-धीरे 5 से 10 सालों में घटाकर 10% किया जाएगा। पर, इन फायदों पर कुछ सीमाएं (quotas) भी हैं, जिनके तहत सालाना लगभग 2.5 लाख गाड़ियों (जो €15,000 से महंगी हों) को ही इस रियायत में शामिल किया जाएगा। इसलिए, Mercedes-Benz Group AG के लिए भारतीय बाजार से तुरंत कमाई में बढ़ोतरी या प्राइसिंग पावर का बढ़ना अभी सीमित रहेगा।
वैल्यूएशन और मार्केट ग्रोथ: चुनौतियों के बीच...
फिलहाल, Mercedes-Benz Group AG का Trailing Twelve Months (TTM) Price-to-Earnings (P/E) ratio 8.49 से 9.79 के बीच है, जो इसे 'value stock' की कैटेगरी में रखता है। यह Volkswagen (7.6x) और BMW (8.52x) जैसे प्रतिस्पर्धियों के बराबर है। हालांकि, कंपनी को हाल के दिनों में मिली-जुली वैश्विक तस्वीर का सामना करना पड़ा है। 2025 की चौथी तिमाही (Q4 2025) में, रेवेन्यू 9.2% घटकर €132.2 बिलियन रह गया, और adjusted EBIT 39.9% गिरकर €8.2 बिलियन पर आ गया। एनालिस्ट्स की राय मिली-जुली है, 'Moderate Buy' की रेटिंग और 12 महीने के टारगेट प्राइस से स्टॉक में कुछ तेजी की उम्मीद है। दूसरी ओर, भारतीय लग्जरी कार बाजार की बात करें तो यह तेजी से बढ़ रहा है। 2025 में जहां यह USD 1.26 बिलियन का था, वहीं 2034 तक इसके USD 2 बिलियन के करीब पहुंचने का अनुमान है। इसकी वजह देश में बढ़ती अमीरी और लोगों की ख्वाहिशें हैं। खासकर लग्जरी SUVs की मांग ज़बरदस्त है। Mercedes-Benz India भी इसका फायदा उठा रही है, जहां कारों की औसत बिक्री कीमत करीब ₹1 करोड़ है और भारत कंपनी के अल्ट्रा-लग्जरी Maybach ब्रांड के लिए एक टॉप मार्केट बन गया है।
मंदी का डर: इलेक्ट्रिक वाहन, चीन और सीमित मांग
आगे की राह आसान नहीं है। FTAs के तत्काल फायदों के अलावा, Mercedes-Benz को कई बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कंपनी इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) की ओर बढ़ने के लिए भारी निवेश कर रही है, जिसमें काफी पैसा लग रहा है। वहीं, चीन का महत्वपूर्ण बाजार, जो कंपनी की कमाई का बड़ा जरिया है, वहां कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। नए एनर्जी व्हीकल (NEVs) खासकर कम कीमत वाले सेगमेंट में तेज़ी से अपनी जगह बना रहे हैं। Mercedes-Benz का अनुमान है कि 2026 में चीन में बिक्री 2025 के स्तर से नीचे रहेगी, और सुधार साल की दूसरी छमाही में ही देखने की उम्मीद है। इसके अलावा, भारत में लग्जरी कार बाजार, भले ही बढ़ रहा है, फिर भी यह एक niche मार्केट है, जिसकी पैठ 2% से भी कम है। यहां खरीदार कीमत के प्रति संवेदनशील हैं, जिससे FTAs का वॉल्यूम पर तत्काल प्रभाव सीमित रहेगा। India-EU FTA के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को शुरुआती टैरिफ रियायत से बाहर रखा गया है, जिससे घरेलू कंपनियों और भारत की EV रणनीति को सुरक्षा मिली है। यानी, इम्पोर्टेड यूरोपीय EVs को फायदा मिलने में और देर होगी। कंपनी ने आने वाले समय में प्राइसिंग पर दबाव बने रहने और साल की दूसरी छमाही में नतीजों के बिगड़ने की चेतावनी भी दी है।
भविष्य की राह और एनालिस्ट्स की राय
2026 के लिए Mercedes-Benz Group का अनुमान है कि ग्रुप रेवेन्यू पिछले साल के स्तर पर ही रहेगा, जबकि ग्रुप EBIT 2025 के स्तर से काफी ऊपर जाने की उम्मीद है, जो आंशिक रूप से पिछली पुनर्गठन लागतों के कारण है। हालांकि, Mercedes-Benz Cars के लिए रिटर्न ऑन सेल्स (RoS) का अनुमान 3-5% के बीच सतर्कता से रखा गया है, जो मौजूदा प्रतिस्पर्धा और लागत दबाव को दर्शाता है। मध्य-अवधि के लक्ष्यों में अमेरिकी बिक्री बढ़ाना और कुल बिक्री में xEV हिस्सेदारी 15% से अधिक करना शामिल है। एनालिस्ट्स का औसतन मानना है कि स्टॉक में 6-14% तक की तेजी की संभावना है, और 12 महीने के टारगेट प्राइस लगभग €63-€66 के आसपास हैं। यह दर्शाता है कि कंपनी की लंबी अवधि की रणनीति, जिसमें बाजार का विस्तार और प्रोडक्ट इनोवेशन शामिल है, वर्तमान बाधाओं को पार कर सकती है, बशर्ते वह जटिल वैश्विक और घरेलू बाजार की स्थितियों से प्रभावी ढंग से निपट सके।