India Demat Account Growth: मार्केट की उथल-पुथल का असर! नए Demat Accounts खुलने की रफ़्तार 22% घटी

ECONOMY
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
India Demat Account Growth: मार्केट की उथल-पुथल का असर! नए Demat Accounts खुलने की रफ़्तार 22% घटी
Overview

साल 2026 के वित्तीय वर्ष (FY26) में भारत में नए Demat Accounts के जुड़ने की रफ़्तार में काफी सुस्ती देखी गई। पिछले साल के मुकाबले यह **22%** कम रहा, जहाँ कुल मिलाकर लगभग **32 मिलियन** नए Demat Accounts खुले।

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FY26 में क्यों थमी Demat Accounts की रफ़्तार?

भारत के शेयर बाज़ार में जारी उथल-पुथल (volatility) का सीधा असर नए निवेशकों के जुड़ने की गति पर पड़ा है। डिपॉजिटरीज़ NSDL और CDSL के आंकड़ों के अनुसार, FY26 में कुल 32 मिलियन नए Demat Accounts जुड़े, जो FY25 की तुलना में 22% की गिरावट दर्शाता है। इसके साथ ही, देश भर में Demat Accounts की कुल संख्या 225 मिलियन के पार निकल गई है।

इस नरमी की मुख्य वजह इक्विटी बाज़ारों का कमजोर प्रदर्शन रहा। FY26 में, भारत के प्रमुख इंडेक्स, Nifty 50 में 5.1% और Sensex में 7.1% की गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले छह सालों में सबसे खराब प्रदर्शनों में से एक था। ब्रॉडर मार्केट्स का प्रदर्शन मिला-जुला रहा, जहाँ Nifty Midcap 100 में 1.9% का उछाल देखा गया, वहीं Nifty Smallcap 100 में लगभग 6% की गिरावट आई। ग्लोबल अनिश्चितताओं, जैसे ट्रेड एक्शन और भू-राजनीतिक तनावों, ने भी मार्केट में अस्थिरता बढ़ाई। इसके चलते फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) की बिकवाली जारी रही, जिसने रिटेल निवेशकों का भरोसा कुछ हद तक कम किया। FY25 में Demat Accounts की संख्या बढ़ाने में अहम भूमिका निभाने वाले IPOs में भी निवेशकों की दिलचस्पी कम देखी गई। हालांकि, FY26 में 112 IPOs से ₹1.8 ट्रिलियन जुटाए गए, लेकिन लिस्टिंग गेन्स घटकर 8% रह गए, जो पिछले साल 30% थे, और रिटेल भागीदारी काफी कमजोर हुई।

लंबी अवधि के लिए मजबूत बुनियाद

बाज़ार की मौजूदा चुनौतियों के बावजूद, भारत में फाइनेंशियल एसेट्स में निवेश बढ़ाने वाले मजबूत स्ट्रक्चरल फैक्टर्स अभी भी बरकरार हैं। लोगों का ध्यान बढ़ती वित्तीय जागरूकता और डिजिटल एडॉप्शन के ज़रिए सेविंग्स को फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स में लगाने की ओर बढ़ रहा है। भारत की जीडीपी में मजबूत ग्रोथ का अनुमान है, जो FY27 में 6.4% से 7% से अधिक रहने की उम्मीद है। यह आर्थिक विस्तार मॉनेटरी पॉलिसी में नरमी, सरकारी स्टिमुलस, टैक्स रिफॉर्म्स और बिज़नेस करने में आसानी लाने वाली पहलों से प्रेरित है। इन सब के चलते, FY27 में Demat Accounts की ग्रोथ सामान्य स्तर पर लौटने की उम्मीद है, जो पेंडेमिक के बाद देखी गई असाधारण उछाल से अलग होगी। बैंकिंग, फाइनेंसियल सर्विसेज और इंश्योरेंस (BFSI) सेक्टर के FY27 से मजबूत वापसी करने का अनुमान है, जिसकी अर्निंग्स FY2027-28 में 16-17% बढ़ने की उम्मीद है।

NSDL और CDSL के बीच मुकाबला

डिपॉजिटरी सेवाओं के क्षेत्र में NSDL और CDSL के बीच कड़ा मुकाबला जारी है। अप्रैल 2026 की शुरुआत में, NSDL का मार्केट कैप लगभग ₹17,652 करोड़ था, जिसका पी/ई रेशियो (P/E ratio) 47.3 था। वहीं, CDSL का मार्केट कैप करीब ₹247,937 करोड़ था और उसका पी/ई रेशियो 52.06 था। NSDL के पास 65,000 से अधिक डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट सेंटर्स का बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर है, जो CDSL के 18,918 सेंटर्स से ज़्यादा है। हालांकि, CDSL रिटेल निवेशक अकाउंट्स जोड़ने और मुनाफे में NSDL से तेज़ रफ़्तार से बढ़ रहा है। Q3 FY26 में CDSL ने NSDL के 13 लाख की तुलना में 76 लाख बेनिफिशियल ओनर अकाउंट्स जोड़े, जिससे रिटेल सेगमेंट में उसकी पकड़ मज़बूत हुई।

विकास के लिए खतरे और चिंताएं

Demat Accounts की ग्रोथ और मार्केट पार्टिसिपेशन को कई कारक प्रभावित कर सकते हैं। 2025 में FPIs ने लगभग $18 बिलियन निकाले, जिसने डोमेस्टिक इक्विटी पर दबाव बनाए रखा। भू-राजनीतिक तनाव और एनर्जी प्राइस वोलेटिलिटी प्रमुख चिंताएं हैं, जो निवेशक भावना और आर्थिक स्थिरता को प्रभावित कर सकती हैं। प्राइमरी मार्केट में रिकॉर्ड फंडरेज़िंग के बावजूद, रिटेल भागीदारी में कमी और कम लिस्टिंग गेन्स IPO फैटीग (IPO fatigue) का संकेत दे सकते हैं, खासकर अगर मार्केट परफॉरमेंस कमजोर बनी रहती है। बाज़ार पर नज़र रखने वालों का यह भी कहना है कि बड़े शहरों में ग्रोथ की रफ़्तार धीमी होने लगी है, जिसका मतलब है कि भविष्य की ग्रोथ टियर-2 और टियर-3 शहरों पर निर्भर करेगी। डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग में सख़्त रेगुलेटरी ओवरसाइट और जोखिमों के बारे में निवेशकों की बढ़ती जागरूकता ने सट्टा ट्रेडिंग को धीमा कर दिया है। कुछ एनालिस्ट भू-राजनीतिक जोखिमों और एनर्जी कॉस्ट को लेकर भारत को लेकर सतर्क हैं, सप्लाई डिसरप्शन और बैलेंस ऑफ पेमेंट्स स्ट्रेस जैसी समस्याओं की चेतावनी दे रहे हैं।

भविष्य का आउटलुक और विश्लेषकों की राय

FY27 की ओर देखते हुए, विश्लेषक उम्मीद करते हैं कि Demat Accounts की ग्रोथ FY25 के पीक पर लौटने के बजाय सामान्य स्तर पर लौट आएगी। ICRA का अनुमान है कि FY2027 में इंडस्ट्री-वाइड नेट ऑपरेटिंग इनकम (NOI) में लगभग 10% की बढ़ोतरी होगी। Motilal Oswal का अनुमान है कि FY27 से BFSI सेक्टर की अर्निंग्स में बड़ी रिकवरी आएगी, जो FY2027-28 के दौरान 16-17% की ग्रोथ दिखा सकती है। हालांकि कुछ विदेशी ब्रोकरेज सतर्क हैं, डोमेस्टिक विश्लेषक आकर्षक वैल्यूएशन और मजबूत डोमेस्टिक इन्वेस्टर फ्लो को सकारात्मक संकेत मानते हैं। Nomura ने साल 2026 के अंत तक Nifty के 29,300 तक पहुंचने का अनुमान लगाया है, जो 12% रिटर्न का संकेत देता है, बशर्ते निवेशक का भरोसा और इंटरेस्ट रेट कट्स की संभावना बेहतर हो। यह आउटलुक तेज़, इवेंट-ड्रिवन ग्रोथ से हटकर, व्यापक अर्थव्यवस्था द्वारा समर्थित टिकाऊ विस्तार की ओर बदलाव का संकेत देता है।

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