भारत में क्रेडिट विस्तार की रफ्तार धीमी पड़ गई है। ट्रांसयूनियन सिबिल (TransUnion CIBIL) की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2024-26 के लिए क्रेडिट-एक्टिव कंज्यूमर की ग्रोथ रेट घटकर **9%** रह गई है, जो 2017-19 के **14%** से काफी कम है। हालांकि, क्रेडिट पेनिट्रेशन बढ़कर योग्य आबादी के **28%** तक पहुंच गया है। अब लेंडर्स (Lenders) तेजी से विस्तार के बजाय टिकाऊ और लक्षित लेंडिंग पर फोकस कर रहे हैं।
रिटेल और कमर्शियल बॉरोअर्स के लिए बदलता माहौल
यह धीमी ग्रोथ बैंकों और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) के लिए एक बदलते माहौल का संकेत है। इंडस्ट्री अब जिम्मेदार और समावेशी लेंडिंग पर ज्यादा ध्यान दे रही है। मार्च 2026 तक क्रेडिट पेनिट्रेशन बढ़कर योग्य आबादी का लगभग 28% हो गया है, जो 2017 में केवल 11% था। लेकिन 'न्यू-टू-क्रेडिट' (NTC) यानी पहली बार कर्ज लेने वालों की संख्या मार्च 2026 तक घटकर 13% रह गई है, जो 2017 में 32% थी।
कमर्शियल लेंडिंग (Commercial Lending) पर इसका असर और भी ज्यादा दिख रहा है। 'क्रेडिट एक्टिव' यानी सक्रिय रूप से लोन लेने वाले बिज़नेस का अनुपात 2017 के 10% से घटकर 9% हो गया है। साथ ही, 'एवर क्रेडिटेड' यानी अब तक लोन ले चुके बिज़नेस का हिस्सा 50% से घटकर 41% रह गया है। सबसे खास बात यह है कि बिज़नेस के लिए न्यू-टू-क्रेडिट ओरिजिनेशन (New-to-credit originations) में भारी गिरावट आई है, जो 2017 के 60% से घटकर 39% पर आ गई है। इससे पता चलता है कि स्थापित बिज़नेस तो लोन ले रहे हैं, लेकिन नए या छोटे बिज़नेस को लोन देने में लेंडर्स ज्यादा सतर्क हो गए हैं।
आगे की ग्रोथ के मौके और मॉनिटरिंग
ग्रोथ कम होने के बावजूद, रिपोर्ट बताती है कि भारत में अभी भी काफी संभावनाएं हैं। 28% के क्रेडिट पेनिट्रेशन के साथ, यह मार्केट अमेरिका और कनाडा जैसे विकसित देशों के 80% के स्तर से काफी पीछे है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ग्रोथ का अगला चरण मौजूदा बॉरोअर्स के साथ गहरे जुड़ाव और MSME सेक्टर पर एक नए, लक्षित दृष्टिकोण से आएगा।
इन्वेस्टर्स (Investors) इस बात पर नजर रख सकते हैं कि लेंडर्स इस कम ग्रोथ वाले माहौल में अपनी बैलेंस शीट को कैसे एडजस्ट करते हैं। यह देखना अहम होगा कि लेंडर्स के टारगेटेड स्ट्रैटेजी की ओर बढ़ने पर क्रेडिट क्वालिटी में गिरावट आती है या सुधार होता है। लोन पोर्टफोलियो की स्थिरता, धीमी वॉल्यूम ग्रोथ के बावजूद प्रॉफिट मार्जिन बनाए रखने की फाइनेंशियल संस्थानों की क्षमता, और नए NTC सेगमेंट तक पहुंचने में डिजिटल-लेड लेंडिंग की सफलता, आने वाली तिमाही की कमाई (Quarterly Earnings) और मैनेजमेंट कमेंट्री में ट्रैक करने के लिए महत्वपूर्ण कारक होंगे।
