जून के महीने में भारत के कोर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोडक्शन में **5%** की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो मई के **3.2%** के मुकाबले एक अच्छी बढ़त है। यह सुधार नए बेस ईयर इंडेक्स सीरीज को अपनाने के बाद हुआ है। खास बात यह है कि इस बार नौ सेक्टर्स को शामिल किया गया है, जबकि पहले आठ थे।
नए इंडेक्स में किसका रहा दबदबा?
जून 2026 में भारत के कोर इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर्स ने 5% का प्रोडक्शन ग्रोथ दिखाया है, जो मई के 3.2% के मुकाबले एक बड़ी छलांग है। यह नया ढाँचा 2022-23 को बेस ईयर मानता है और इसमें अब नौ सेक्टर्स को ट्रैक किया जाता है, जिसमें हाल ही में आयरन ओर को जोड़ा गया है।
इस ग्रोथ में सबसे आगे आयरन ओर रहा, जिसके प्रोडक्शन में 43.9% का जबरदस्त उछाल देखा गया। इसके अलावा, बिजली उत्पादन और सीमेंट मैन्युफैक्चरिंग में भी 9.8% की बढ़ोतरी हुई। स्टील प्रोडक्शन भी 4.6% बढ़कर ऊपर की ओर बढ़ा। यह दर्शाता है कि कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े सेक्टर्स में अच्छी खासी एक्टिविटी बनी हुई है।
कहाँ आई मंदी?
हालांकि, यह ग्रोथ सभी सेक्टर्स में एक समान नहीं है। नेचुरल गैस, क्रूड ऑयल, रिफाइनरी प्रोडक्ट्स और फर्टिलाइजर्स (उर्वरक) के प्रोडक्शन में जून में गिरावट आई। ऑयल से जुड़े सेक्टर्स में कमजोरी को अर्थशास्त्रियों ने ग्लोबल क्रूड ऑयल की गिरती कीमतों और बढ़ते इंपोर्ट वॉल्यूम से जोड़ा है। फर्टिलाइजर इंडस्ट्री के लिए यह लगातार चौथी महीने की गिरावट है, जिसे एक्सपर्ट्स ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण सप्लाई चेन में आई दिक्कतों से भी जोड़ा है।
क्या कहती है तस्वीर?
नए इंडेक्स सीरीज के कारण पिछले सालों के डेटा से सीधी तुलना मुश्किल है, लेकिन यह मौजूदा इंडस्ट्रियल एक्टिविटी का एक स्पष्ट चित्र पेश करता है। टॉपलाइन नंबर में तेजी दिख रही है, लेकिन एनालिस्ट्स का कहना है कि ट्रैक किए गए नौ में से केवल चार सेक्टर्स में ही ग्रोथ दर्ज हुई है। स्टील प्रोडक्शन, जो इंडस्ट्रियल डिमांड का एक अहम पैमाना है, 4.6% की दर से बढ़ा, जो लगभग दो साल में सबसे धीमी रफ्तार है। वहीं, बिजली सेक्टर की 9.8% की ग्रोथ में खास मौसम की स्थिति, जैसे कि बारिश की कमी, जिसने बिजली की मांग बढ़ाई, ने भी योगदान दिया।
अप्रैल-जून 2026 की तिमाही के लिए कुल ग्रोथ रेट 3.6% रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि के 1.0% ग्रोथ से ज्यादा है। अब इन्वेस्टर्स और इकोनॉमिस्ट्स जून के पूरे इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) डेटा का इंतजार कर रहे हैं। अनुमान है कि ओवरऑल इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन में 3-4% की मामूली ग्रोथ हो सकती है, जो इस बात पर निर्भर करेगा कि स्टील और सीमेंट में बनी तेजी, एनर्जी और फर्टिलाइजर सेगमेंट्स की कमजोरी को कितना ऑफसेट कर पाती है।
