भारत के कोर सेक्टर के उत्पादन में जून के महीने में **5%** की जोरदार वृद्धि दर्ज की गई है, जो पिछले पांच महीनों में सबसे तेज़ रफ़्तार है। इस उछाल का मुख्य कारण लौह अयस्क (Iron Ore) के उत्पादन में आई **43.9%** की ज़बरदस्त तेज़ी है। सरकार ने इंडेक्स ऑफ कोर इंडस्ट्रीज (ICI) को नए बेस ईयर **2022-23** के साथ अपडेट किया है, जिसमें पहली बार लौह अयस्क को भी शामिल किया गया है।
लौह अयस्क और बिजली ने खींचा विकास का रथ
जून 2026 में कोर सेक्टर के उत्पादन में 5% की बढ़ोतरी हुई, जो पांच महीनों में सबसे अच्छी है। इस शानदार प्रदर्शन में लौह अयस्क का अहम योगदान रहा, जिसके उत्पादन में पिछले साल की तुलना में 43.9% की ज़बरदस्त उछाल देखी गई। हालांकि, नए इंडेक्स में इसका वेटेज सिर्फ 4.9% है, फिर भी इसके प्रदर्शन ने कुल आंकड़े को काफी ऊपर पहुंचाया। बिजली उत्पादन में भी 9.8% की बढ़ोतरी हुई, जिसका कारण गर्मी के मौसम में बढ़ी हुई बिजली की मांग है। इसी के साथ, सीमेंट उत्पादन में भी 9.8% का अच्छा ग्रोथ दिखा, जो इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में जारी तेजी का संकेत है। स्टील उत्पादन 4.6% बढ़ा।
पेट्रोलियम और फर्टिलाइजर सेक्टर में गिरावट जारी
जहां एक ओर कुछ सेक्टरों ने कमाल दिखाया, वहीं दूसरी ओर पेट्रोलियम से जुड़े उद्योगों पर दबाव बना रहा। कच्चे तेल (Crude Oil) का उत्पादन 4.2% घट गया, जो पिछले 18 महीनों से जारी गिरावट का सिलसिला है। नेचुरल गैस उत्पादन में 7.4% की कमी आई, यह लगातार 24वीं बार है जब इसमें गिरावट दर्ज हुई है। रिफाइनरी उत्पादों के उत्पादन में भी 4.7% की गिरावट देखी गई। जानकारों का मानना है कि कच्चे तेल की कम ग्लोबल कीमतों के चलते इंपोर्ट बढ़ा है और एक्सपोर्ट पर असर पड़ा है, जिससे डोमेस्टिक प्रोडक्शन पर लगातार दबाव बना हुआ है। फर्टिलाइजर उत्पादन में भी 3.3% की गिरावट आई।
नए आर्थिक आंकड़ों को समझना ज़रूरी
बेस ईयर बदलने का असर पिछले आर्थिक विकास के आंकड़ों पर भी पड़ा है। नई सीरीज के तहत, 2024-25 के लिए ग्रोथ अनुमान को 6.9% से घटाकर 4.3% कर दिया गया है, जबकि 2025-26 के लिए इसे 1.1% से बढ़ाकर 3% किया गया है। निवेशकों और पॉलिसी बनाने वालों के लिए यह ज़रूरी है कि वे नए आंकड़ों को समग्र रूप से देखें, न कि पुराने और अपडेटेड बेंचमार्क की तुलना करें।
आगे आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि क्या बिजली और सीमेंट जैसे कोर सेक्टरों की रिकवरी जारी रहेगी, खासकर अगर मॉनसून सामान्य रहता है। साथ ही, निवेशक इस पर भी नज़र रखेंगे कि तेल और गैस सेक्टर में जारी गिरावट कब थमेगी या ग्लोबल प्राइसिंग डायनामिक्स का डोमेस्टिक आउटपुट पर असर कब तक बना रहेगा।
