India Core Sector Growth: मई में रफ्तार धीमी, 7 महीने का सबसे निचला स्तर

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AuthorAditya Rao|Published at:
India Core Sector Growth: मई में रफ्तार धीमी, 7 महीने का सबसे निचला स्तर

मई 2026 में भारत के आठ प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टरों की ग्रोथ घटकर **0.5%** रह गई, जो पिछले 7 महीनों का सबसे निचला स्तर है। कोयला और तेल जैसे ऊर्जा से जुड़े सेक्टरों में प्रोडक्शन घटा है, जबकि स्टील और बिजली की मांग मजबूत बनी हुई है। यह मंदी आगे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए चुनौती बन सकती है।

क्या हुआ?

मई 2026 में भारत के आठ प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टरों - कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली - में ग्रोथ की रफ्तार काफी धीमी होकर 0.5% पर आ गई। यह अक्टूबर 2025 के बाद सबसे धीमी रफ्तार है, जो यह दर्शाता है कि औद्योगिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ा है। ये आठ सेक्टर अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम हैं, क्योंकि ये भारत के इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन इंडेक्स (IIP) का लगभग 40% हिस्सा बनाते हैं।

कौन से सेक्टर पिछड़े?

इस मंदी की मुख्य वजह ऊर्जा और कच्चे माल वाले सेगमेंट में आई गिरावट रही। कोयला उत्पादन, जो इंडेक्स का 10.33% हिस्सा है, पिछले साल के मुकाबले मई में 9.3% घट गया। कच्चे तेल का उत्पादन भी 4.6% गिरा। रिफाइनरी उत्पाद सेगमेंट, जो 28.04% वेटेज के साथ सबसे बड़ा हिस्सा है, में 8.7% की बड़ी गिरावट देखी गई। इसके अलावा, प्राकृतिक गैस का उत्पादन 4.9% और उर्वरक उत्पादन 0.9% कम हुआ। अप्रैल और मई के लिए इन सेक्टरों की कुल ग्रोथ 1.1% पर कमजोर बनी हुई है।

मजबूत बने रहने वाले सेक्टर

कुल मिलाकर मंदी के बावजूद, कुछ सेग्मेंट्स में मजबूती दिखी, जिसने बड़ी गिरावट को रोका। इस्पात (Steel) उत्पादन में मई में 5% की वृद्धि हुई, जिससे वित्तीय वर्ष के पहले दो महीनों में 5.2% की मजबूत कुल ग्रोथ दर्ज की गई। सीमेंट उत्पादन भी मजबूत बना रहा, जिसमें मई में 8.4% की उछाल आई। बिजली उत्पादन, जो 19.85% वेटेज के साथ दूसरा सबसे बड़ा हिस्सा है, में भी 8.7% की वृद्धि दर्ज की गई। इन सेक्टर्स के मिले-जुले आउटपुट ने ऊर्जा से जुड़े सेग्मेंट्स में हुई गिरावट की भरपाई करने में मदद की।

निवेशकों के लिए क्यों अहम?

कोर सेक्टर का डेटा अक्सर देश के कुल औद्योगिक उत्पादन के लिए एक लीडिंग इंडिकेटर (Leading Indicator) के तौर पर देखा जाता है। जब ये सेक्टर - जो बाकी अर्थव्यवस्था के लिए कच्चा माल और ऊर्जा प्रदान करते हैं - पिछड़ते हैं, तो यह संकेत दे सकता है कि मैन्युफैक्चरिंग डिमांड या इंडस्ट्रियल कैपेसिटी यूटिलाइजेशन (Industrial Capacity Utilization) में दिक्कतें आ सकती हैं। निवेशक आमतौर पर इस डेटा का उपयोग कंस्ट्रक्शन, पावर और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की कंपनियों के स्वास्थ्य का अंदाजा लगाने के लिए करते हैं। बिजली और स्टील में मजबूती इंफ्रास्ट्रक्चर डिमांड के लिए एक सकारात्मक संकेत है, वहीं ऊर्जा उत्पादन में कमजोरी चिंता का विषय बन सकती है अगर यह जारी रहती है, क्योंकि इससे औद्योगिक लागत और सप्लाई चेन की स्थिरता पर असर पड़ सकता है।

आगे क्या देखें?

बाजार के प्रतिभागी विस्तृत मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में इस ट्रेंड के विस्तार को देखने के लिए आधिकारिक इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) रिपोर्ट का इंतजार करेंगे। मुख्य ध्यान इस बात पर रहेगा कि कोयला और तेल उत्पादन में गिरावट एक अस्थायी सप्लाई-साइड समस्या है या कमजोर होती औद्योगिक मांग का संकेत। इसके अलावा, बिजली की खपत और स्टील की मांग के रुझान पर भी नजर रखना महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि ये समग्र औद्योगिक विकास के आंकड़ों को सहारा देते रहेंगे।

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