सीमेंट और स्टील ने बढ़ाई कोर सेक्टर की रफ्तार
अप्रैल 2026 में भारत के कोर इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टरों में 1.7% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो पिछले दो महीनों में सबसे तेज़ ग्रोथ है। इस सकारात्मक मोमेंटम को सीमेंट और स्टील इंडस्ट्रीज से बड़ा सहारा मिला, जहां उत्पादन में क्रमशः 9.4% और 6.2% का इजाफा हुआ। बिजली उत्पादन भी 4.1% बढ़ा, जिसने कुल ग्रोथ में योगदान दिया। ये बढ़ोतरी इंडस्ट्रियल एक्टिविटी के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि कोर सेक्टर इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन इंडेक्स (IIP) का 40% से अधिक हिस्सा बनाते हैं।
असमान रिकवरी, सेक्टरों में गिरावट
कुल मिलाकर ग्रोथ के बावजूद, आठों कोर सेक्टरों का विश्लेषण एक असमान आर्थिक रिकवरी दिखाता है। पांच प्रमुख सेक्टरों में उत्पादन घटा: कोयले का उत्पादन 8.7% गिरा, कच्चे तेल में 3.9%, प्राकृतिक गैस में 4.3%, रिफाइनरी उत्पादों में 0.5%, और उर्वरकों में 8.6% की गिरावट आई। ऊर्जा और कमोडिटी जैसे ज़रूरी क्षेत्रों में यह व्यापक गिरावट लगातार आर्थिक दबाव को उजागर करती है। ICRA Ltd के सीनियर इकोनॉमिस्ट राहुल अग्रवाल जैसे विश्लेषकों का कहना है कि पश्चिम एशिया में चल रहा संकट इस सेक्टर-विशिष्ट कमजोरी का कारण है, जिसने आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित किया है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता पैदा की है।
IIP ग्रोथ की उम्मीद, पर व्यापक अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतियां
अर्थव्यवस्था के जानकारों को उम्मीद है कि अप्रैल के कोर सेक्टर के प्रदर्शन से आने वाले इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन इंडेक्स (IIP) ग्रोथ को सहारा मिलेगा। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (India Ratings & Research) ने 5% के आसपास IIP ग्रोथ का अनुमान लगाया है। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च यह भी भविष्यवाणी करती है कि कम बेस इफेक्ट और उर्वरक उत्पादन में अपेक्षित सुधार के कारण मई 2026 में कोर सेक्टर की रिकवरी जारी रहेगी, जिसमें लगभग 3% ग्रोथ का अनुमान है। हालांकि, ICRA के राहुल अग्रवाल ने यह भी नोट किया कि आठ में से पांच सेक्टरों के सिकुड़ने से, समग्र आर्थिक तस्वीर चुनौतीपूर्ण बनी हुई है, और पश्चिम एशिया संकट आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करना जारी रख सकता है।
भू-राजनीतिक जोखिम और सेक्टरों में असंतुलन से भविष्य पर छाया
बाहरी कारक भारत के आर्थिक परिदृश्य को तेजी से आकार दे रहे हैं। पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनावों के कारण जीडीपी ग्रोथ के अनुमानों में कटौती की गई है। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च अब वित्त वर्ष 2027 (FY27) में भारत की जीडीपी ग्रोथ 6.7% रहने का अनुमान लगा रहा है, जो वित्त वर्ष 2026 (FY26) के 7.6% से कम है। यह अनुमान कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, भू-राजनीतिक अस्थिरता और संभावित अल नीनो प्रभाव जैसे जोखिमों को दर्शाता है। ICRA ने पश्चिम एशिया संकट से जुड़ी कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण वित्त वर्ष 2027 के लिए अपने जीडीपी ग्रोथ पूर्वानुमान को घटाकर 6.2% कर दिया है। Crisil चेतावनी देता है कि पश्चिम एशिया में लंबे समय से चल रहे संघर्ष से अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है, जिसमें ऊर्जा की ऊंची कीमतें, व्यापार में बाधाएं और सप्लाई चेन की समस्याएं ग्रोथ को धीमा कर सकती हैं और महंगाई बढ़ा सकती हैं। संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग (UN DESA) ने 2026 के लिए भारत के ग्रोथ अनुमान को घटाकर 6.4% कर दिया है, यह कहते हुए कि पश्चिम एशिया संकट ऊर्जा-आयात करने वाले देशों के लिए महंगाई को बढ़ावा देता है और ग्रोथ की संभावनाओं को कमजोर करता है। कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता उसे ईंधन की कीमतों में लगातार वृद्धि के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील बनाती है। पूरे वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए, आठ कोर इंडस्ट्रीज की संचयी ग्रोथ 2.7% थी।
भविष्य की ग्रोथ के लिए मिले-जुले संकेत
हालांकि अप्रैल में कोर सेक्टर का प्रदर्शन औद्योगिक गतिविधि के लिए एक सकारात्मक संकेत देता है, लेकिन ऊर्जा और कमोडिटी सेक्टरों में महत्वपूर्ण गिरावट के साथ-साथ बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिम, काफी चुनौतियां पेश करते हैं। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च और ICRA के पूर्वानुमानों से आगामी वित्तीय वर्ष के लिए ग्रोथ की उम्मीदों में कमी का संकेत मिलता है, जो वैश्विक ऊर्जा कीमतों और क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति भारतीय अर्थव्यवस्था की संवेदनशीलता को उजागर करता है।
