वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई तूफानी तेजी और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। इस स्थिति को देखते हुए, केंद्र सरकार MSMEs और निर्यातकों को और अधिक सहारा देने की योजना बना रही है, ताकि वे सप्लाई चेन में आ रही रुकावटों और बढ़ती लागत का सामना कर सकें।
कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल, भारत पर सीधा असर
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम फरवरी के अंत से लगभग 50% बढ़कर इस महीने $119 प्रति बैरल तक पहुंच गए थे। भारत अपनी जरूरत का करीब 88% कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में यह बढ़ोतरी सीधे तौर पर देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है। खासकर, हॉरमुज़ जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों पर संभावित व्यवधानों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं।
सरकार ने ईंधन आपूर्ति स्थिर करने के लिए उठाए कदम
सरकार इस दबाव को कम करने के लिए पहले ही कई कदम उठा चुकी है। घरेलू ईंधन की कीमतों को स्थिर रखने के लिए पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) घटाई गई है और डीजल को इससे छूट दी गई है। साथ ही, वैश्विक स्तर पर आपूर्ति घटने की आशंका के चलते डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर एक्सपोर्ट ड्यूटी (Export Duty) फिर से लगा दी गई है, ताकि घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
निर्यातकों को लागत और जोखिम से निपटने में मदद
निर्यातकों को शिपिंग मुश्किलों और बढ़ती लागत से निपटने में मदद करने के लिए, डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (Directorate General of Foreign Trade) ने समर्थन बढ़ाया है। ₹497 करोड़ की नई RELIEF (Resilience & Logistics Intervention for Export Facilitation) स्कीम के तहत ऊंचे शिपिंग खर्च, बीमा और युद्ध जोखिमों को कवर किया जाएगा। इसके अलावा, निर्यातकों के लिए RoDTEP स्कीम के तहत पूरे फायदे 31 मार्च तक फिर से बहाल कर दिए गए हैं।
वैश्विक तनाव के बीच मिली-जुली आर्थिक तस्वीर
हालिया मंथली इकोनॉमिक रिव्यू (Monthly Economic Review) में भी इन जोखिमों को उजागर किया गया है, जिसमें कहा गया है कि इन चुनौतियों से लागत बढ़ रही है और आपूर्ति सीमित हो रही है। चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर वी. अनंत नागेश्वरन (V Anantha Nageswaran) ने सरकारी खजाने को स्वस्थ रखते हुए व्यवसायों और परिवारों के लिए लक्षित राहत की आवश्यकता पर जोर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, हालांकि मजबूत घरेलू आर्थिक नींव कुछ हद तक सुरक्षा प्रदान करती है, लेकिन निकट भविष्य में पश्चिम एशिया संकट के कारण ग्रोथ के लिए अनिश्चितता बनी हुई है।