यह महत्वाकांक्षी खर्च योजना, जो इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए अब तक का सबसे बड़ा आवंटन है, वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के बीच आर्थिक लचीलेपन (economic resilience) को बढ़ावा देने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर रणनीतिक फोकस को दर्शाती है। एक्सपेंडिचर सेक्रेटरी वी वी लालनाम ने इस बात की पुष्टि की है कि भारत अपने रिकॉर्ड ₹12.22 लाख करोड़ के कैपिटल एक्सपेंडिचर प्लान पर FY27 के लिए कायम रहेगा।
प्रमुख खर्च क्षेत्र और वैश्विक संकट
इस बड़े बजट का लक्ष्य राजमार्गों (Highways), रेलवे (Railways), और बंदरगाहों (Ports) जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को मजबूत करना है। यह सब अस्थिर वैश्विक ऊर्जा बाजार के बीच भी जारी रहेगा। पश्चिम एशिया में जारी संकट ने कच्चे तेल की कीमतों को $126 प्रति बैरल के पार पहुंचा दिया है, जो संघर्ष-पूर्व स्तरों से काफी ज्यादा है। इससे भारत की आयात लागत सीधे तौर पर बढ़ती है और महंगाई को बढ़ावा मिलता है।
आयात निर्भरता और महंगाई का जोखिम
भारत अपनी जरूरत का करीब 87% कच्चा तेल आयात करता है, और 90% एलपीजी (LPG) स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरता है। इन चिंताओं को कम करने के लिए, सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) में कटौती की, जिस पर सिर्फ 15 दिनों में करीब ₹7,000 करोड़ का अनुमानित खर्च आया। इससे फिस्कल डेफिसिट पर दबाव बढ़ रहा है, जो बजट के 4.3% से बढ़कर 4.5% या उससे भी ऊपर जा सकता है।
विकास पर असर और विश्लेषकों की राय
विश्लेषकों का मानना है कि आपातकालीन खर्चों में बढ़ोतरी, सब्सिडी में वृद्धि और ड्यूटी कटौतियों से राजस्व हानि के कारण यह स्थिति बन सकती है। ऊर्जा आयात पर उच्च निर्भरता सप्लाई चेन (Supply Chain) के जोखिम और महंगाई का दबाव बढ़ाती है। कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमतें आर्थिक विकास को धीमा कर सकती हैं, जो वर्तमान वर्ष के लिए करीब 6.5% रहने का अनुमान है।
हालांकि, कुछ अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं उम्मीद की किरण दिखा रही हैं। IMF ने भारत के ग्रोथ फोरकास्ट को 6.5% तक बढ़ाया है, और S&P Global का मानना है कि भारत के मजबूत फंडामेंटल्स (Fundamentals) तेल के झटकों को सह सकते हैं। Fitch Ratings ने FY27 के लिए ग्रोथ 6.4% रहने का अनुमान जताया है। मूडीज (Moody's) ने महंगाई और बेरोजगारी के जोखिमों पर चिंता जताई है, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार सार्वजनिक निवेश को विकास का मुख्य जरिया माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य FY31 तक कर्ज को GDP के 50% तक कम करना है, जो वर्तमान दबावों के प्रभावी प्रबंधन पर निर्भर करेगा।
