भारत ने आर्थिक सुधारों की ग्लोबल रैंकिंग में ज़बरदस्त छलांग लगाई है। 2010 से 2023 के बीच भारत **25 पायदान** चढ़कर **57वें** स्थान पर पहुंच गया है। रिपोर्ट के अनुसार, GST और इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) जैसे बड़े सुधारों ने बिजनेस के लिए बेहतर माहौल बनाने में अहम भूमिका निभाई है।
सुधारों का असर, रैंकिंग में उछाल
कॉम्पिटेयर फाउंडेशन की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने आर्थिक सुधारों के मामले में बड़ी तरक्की की है। 2010 से 2023 के बीच भारत 25 पायदान ऊपर चढ़कर ग्लोबल रैंकिंग में 57वें नंबर पर आ गया है। यह प्रगति देश में बिजनेस के माहौल को बेहतर बनाने और कॉम्पिटिटिव मार्केट्स को बढ़ावा देने के लिए किए गए बड़े बदलावों का नतीजा है।
GST और IBC का बड़ा योगदान
इस सुधार का श्रेय कई बड़े नीतिगत बदलावों को दिया जा रहा है। गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) लागू होने से जटिल इनडायरेक्ट टैक्स सिस्टम आसान हुआ, जिससे बिजनेस के लिए मुश्किलें कम हुईं। वहीं, इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) ने कंपनियों के फंसे पैसों को निकालने और दिवालियापन के मामलों को सुलझाने के लिए एक मजबूत फ्रेमवर्क तैयार किया। इन बदलावों ने 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बेहतर बनाया है।
मार्केट डिस्टॉर्शन इंडेक्स क्या है?
यह रैंकिंग 'मार्केट डिस्टॉर्शन परफॉरमेंस इंडेक्स' पर आधारित है, जो यह मापता है कि कोई देश निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और मार्केट एफिशिएंसी को कितना बढ़ावा देता है। रेगुलेटरी बाधाओं को कम करके, भारत ने अपने मार्केट्स को ज़्यादा डायनामिक बनाया है। निवेशकों के लिए यह एक अच्छा संकेत है, क्योंकि यह एक पारदर्शी और अनुमानित रेगुलेटरी सिस्टम की ओर इशारा करता है, जिससे कंपनियों के बिजनेस की लागत कम हो सकती है।
आगे क्या?
रिपोर्ट का मानना है कि ग्रोथ की अगली सीढ़ी पर चढ़ने के लिए अभी भी कुछ चुनौतियों पर काम करना बाकी है। कॉम्पिटेयर फाउंडेशन ने एविडेंस-बेस्ड कंपटीशन पॉलिसीज पर ध्यान देने की सलाह दी है। इसमें कुछ सेक्टरों में इन्वेस्टमेंट पर लगी पाबंदियों की समीक्षा और अंतरराष्ट्रीय ट्रेडिंग पार्टनर्स के साथ मिलकर रेगुलेटरी बैरियर को कम करना शामिल है। ये कदम भारत की अर्थव्यवस्था को लंबे समय तक ग्रोथ देने और ग्लोबल सप्लाई चेन में गहराई से जुड़ने के लिए अहम माने जा रहे हैं।
निवेशकों के लिए ध्यान देने योग्य बातें
मैक्रो-इकोनॉमिक ट्रेंड्स पर नज़र रखने वाले निवेशकों के लिए, इन कंपटीशन पॉलिसीज का लगातार लागू होना सबसे महत्वपूर्ण रहेगा। IBC का कितनी प्रभावी ढंग से बड़े दिवालिया मामलों को सुलझाना और ट्रेड फैसिलिटेशन का सुव्यवस्थित होना, सरकार द्वारा सुधारों की गति को बनाए रखने के प्रमुख संकेतक होंगे। इसके अलावा, विभिन्न इंडस्ट्रीज में कैपिटल फ्लो और फॉरेन इन्वेस्टमेंट को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकने वाले सेक्टर-स्पेसिफिक इन्वेस्टमेंट रेगुलेशंस पर भी नज़र रखनी होगी।
