India Business Activity: जून में अर्थव्यवस्था की रफ्तार तेज, 32 महीनों का रिकॉर्ड टूटा

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
India Business Activity: जून में अर्थव्यवस्था की रफ्तार तेज, 32 महीनों का रिकॉर्ड टूटा

भारत की आर्थिक रफ्तार जून में ज़ोरदार दिखी है! ICRA बिज़नेस एक्टिविटी मॉनिटर के अनुसार, जून में इकोनॉमिक ग्रोथ **12%** रही, जो पिछले **32 महीनों** का सबसे बड़ा आंकड़ा है। इंडस्ट्री और ऑटोमोबाइल सेक्टर में ज़बरदस्त उछाल देखने को मिला। हालांकि, ICRA का कहना है कि बढ़ती इनपुट कॉस्ट (input costs) कंपनियों के मुनाफे (profit margins) पर दबाव डाल सकती है।

Detailed Coverage

इंडस्ट्री और ऑटोमोबाइल सेक्टर की धांसू परफॉरमेंस!

जून में इकोनॉमिक एक्टिविटी में आई तेज़ी की सबसे बड़ी वजह इंडस्ट्री और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में बड़ा उछाल रहा। बारिश सामान्य से कम होने का फायदा माइनिंग और कंस्ट्रक्शन को मिला। कोर सेक्टर आउटपुट, जो कि कोयला, आयरन ओर, सीमेंट और रिफाइनरी प्रोडक्ट्स से जुड़ा है, 5% बढ़ा। यह पिछले 5 महीनों में सबसे तेज़ ग्रोथ है।

ऑटोमोबाइल सेक्टर भी पीछे नहीं रहा। पैसेंजर व्हीकल प्रोडक्शन 17.6% और टू-व्हीलर आउटपुट 28.1% बढ़ा। इसके अलावा, GST ई-वे बिल जनरेशन में 14.5% और नॉन-ऑयल मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट में 16.5% की बढ़ोतरी ने भी इस ग्रोथ को सपोर्ट किया।

प्रॉफिट मार्जिन पर खतरा और डिमांड की चिंता

ज़बरदस्त वॉल्यूम ग्रोथ के बावजूद, ICRA के एनालिस्ट्स प्रॉफिट पर कुछ चिंता जता रहे हैं। प्रोडक्शन बढ़ने से कंपनियों के टॉप-लाइन रेवेन्यू में तो इज़ाफा हो सकता है, लेकिन बढ़ती इनपुट कॉस्ट (input costs) मुनाफे पर भारी पड़ सकती है। ऐसे में कंपनियां ये बढ़ी हुई लागत ग्राहकों पर डालने की कोशिश कर सकती हैं, जिससे डिमांड पर असर पड़ सकता है, खासकर अगर महंगाई (inflation) ऐसे ही बढ़ती रही तो।

लेबर मार्केट के आंकड़े भी मिले-जुले हैं। ऑल-इंडिया बेरोजगारी दर जून में 5.5% पर बनी हुई है। गांवों में रोज़गार की स्थिति थोड़ी संभली है, लेकिन शहरों में बेरोजगारी 6.6% पर है।

सेक्टर की मिली-जुली तस्वीर और आगे का जोखिम

सभी सेक्टरों की कहानी एक जैसी नहीं है। डोमेस्टिक एयर पैसेंजर ट्रैफिक जून में 1% घट गया, जो मई के ग्रोथ ट्रेंड के उलट है। बिजली उत्पादन (electricity generation) और स्टील कंजम्प्शन में भी ग्रोथ थोड़ी धीमी पड़ी है, हालांकि ये अब भी पॉजिटिव टेरिटरी में हैं।

आगे चलकर, साउथवेस्ट मॉनसून का असमान वितरण (uneven distribution) एक बड़ी चिंता है। अच्छी बारिश न सिर्फ एग्रीकल्चर के लिए ज़रूरी है, बल्कि खाने-पीने की चीजों की महंगाई को कंट्रोल में रखने के लिए भी अहम है, जिसका सीधा असर लोगों की खर्च करने की क्षमता पर पड़ता है।

निवेशकों को जुलाई के शुरुआती आंकड़ों पर नज़र रखनी चाहिए। व्हीकल रजिस्ट्रेशन और बिजली की डिमांड में कुछ नरमी के संकेत मिले हैं। कंपनियां इन लागत के दबावों (cost headwinds) को कैसे मैनेज करती हैं, यह इस इकोनॉमिक ग्रोथ की सस्टेनेबिलिटी के लिए बड़ा फैक्टर साबित होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.