यूनियन बजट 2026-27 के पेश होने के तुरंत बाद भारतीय शेयर बाजारों में भारी बिकवाली (Sell-off) देखने को मिली। Nifty 50 और BSE Sensex में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट की मुख्य वजह डेरिवेटिव्स पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में की गई बड़ी बढ़ोतरी रही। इस कदम ने ट्रेडर्स और निवेशकों को चौंका दिया, जिससे बाजार में अचानक हलचल मच गई।
हालांकि, बजट में सिर्फ बाजार को प्रभावित करने वाले फैसले ही नहीं थे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए इस बजट का लक्ष्य घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देना और अमेरिका जैसे देशों के साथ व्यापारिक तनाव को संभालना भी है। सरकार ने कुछ खास घरेलू सेक्टर्स, जैसे मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल और एग्रीकल्चर पर ध्यान केंद्रित किया है।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए, सरकार सात रणनीतिक क्षेत्रों में प्रोडक्शन बढ़ाने पर जोर दे रही है। इसके साथ ही, पब्लिक कैपिटल एक्सपेंडिचर (Public Capital Expenditure) को बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ किया गया है। टेक्सटाइल सेक्टर को एकीकृत कार्यक्रमों से फिर से मजबूत करने की योजना है, जिसका मकसद एक्सपोर्ट और रोजगार बढ़ाना है, खासकर मैन-मेड फाइबर (MMF) और प्रीमियम कॉटन अपैरल पर फोकस रहेगा। एग्रीकल्चर की बात करें तो, पशुपालन और मत्स्य पालन के लिए फंड बढ़ाया गया है। वहीं, इंपोर्ट पर निर्भरता कम करने के लिए अखरोट (Walnuts) जैसी हाई-वैल्यू फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा। टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 और ग्लोबल क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर हब बनाने की पहल की जा रही है।
अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के मोर्चे पर, बजट ने अमेरिका के साथ संभावित तनाव को कम करने के लिए बादाम (Almonds) और अखरोट (Walnuts) जैसे कुछ सामानों पर ड्यूटी कम की है। लेकिन, संवेदनशील उत्पादों पर महत्वपूर्ण आयात शुल्क (Import Duties) बनाए रखे गए हैं। यह कदम भारत के व्यापारिक रिश्तों को विविधता देने और वैश्विक राजनीति की अस्थिरता के खिलाफ लचीलापन बनाने की बड़ी योजना का हिस्सा है।
आर्थिक मोर्चे पर, सरकार ने नॉमिनल GDP ग्रोथ 10% और रियल GDP ग्रोथ 7% से 7.5% रहने का अनुमान लगाया है। फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit) को GDP का 4.3% रखने का लक्ष्य है, जबकि डेट-टू-जीडीपी रेश्यो (Debt-to-GDP Ratio) 55.6% रहने की उम्मीद है। इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 में मजबूत आर्थिक बफ़र्स पर जोर दिया गया है।
इस बजट पर राजनीतिक विरोध भी देखने को मिला। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चिंता जताई कि बजट में 'आम आदमी और बंगाल के लिए कुछ खास नहीं है'। हालांकि, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इन आलोचनाओं को खारिज करते हुए कहा कि बजट एक समग्र (Holistic) प्रक्रिया थी जिसमें विभिन्न आर्थिक कारकों पर विचार किया गया।
उद्योगों को उम्मीद है कि बजट के स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स, खासकर मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और एक्सपोर्ट में, इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, भविष्य के विकास के लिए 'फाउंडर इक्विटी' (Founder Equity) जैसे कुछ क्षेत्रों में और नीतिगत हस्तक्षेप की जरूरत महसूस की जा रही है। STT Hike पर बाजार की तत्काल नकारात्मक प्रतिक्रिया दर्शाती है कि जबकि फिस्कल प्रूडेंस (Fiscal Prudence) महत्वपूर्ण है, ट्रेडिंग लागत पर सीधा असर निवेशकों की भावनाओं को अल्पावधि में प्रभावित कर सकता है।